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वायुसेना के विमानों से पहुंचाए गए थे नए करेंसी नोट

सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि आठ नवंबर 2016 को विमौद्रीकरण की घोषणा के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में करेंसी नोटों की ढुलाई के लिए भारतीय वायु सेना के विमानों का इस्तेमाल किया गया था।
Author नई दिल्ली | March 29, 2017 01:36 am
सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि आठ नवंबर 2016 को विमौद्रीकरण की घोषणा के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में करेंसी नोटों की ढुलाई के लिए भारतीय वायु सेना के विमानों का इस्तेमाल किया गया था।

सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि आठ नवंबर 2016 को विमौद्रीकरण की घोषणा के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में करेंसी नोटों की ढुलाई के लिए भारतीय वायु सेना के विमानों का इस्तेमाल किया गया था। रक्षा राज्यमंत्री डा. सुभाष भामरे ने एक सवाल के जवाब में बताया कि 33 उड़ानों के जरिये कुल 604.80 टन भार को विमानों से पहुंचाया गया था। उन्होंने बताया कि भारतीय वायु सेना के किसी भी विमान ने नए करेंसी नोटों में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा धागे को लाने के लिए विदेश में उड़ान नहीं भरी थी।
इन उड़ानों पर होने वाले खर्च के बारे में पूछने पर भामरे ने बताया कि प्रभार तय किए जाते हैं और इस प्रकार की हवाई सहायता के लिए संबंधित एजंसियों से निर्धारित वसूली दरों के अनुसार, वसूली की जाती है।

वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक सवाल के जवाब में बताया कि विमौद्रीकरण के बाद असली दिखने वाले कोई जाली भारतीय करेंसी नोट बरामद नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में भारत बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ और एनआइए ने 2000 रुपए मूल्यवर्ग के जाली भारतीय करेंसी नोट जब्त किए गए। फोरेंसिक लैब ने इन नोटों के मुद्रण में स्टाम्प पेपर का प्रयोग किए जाने की सूचना दी थी। उन्होंने बताया कि इन नोटों को स्कैन या फोटोकॉपी किए गया है। विशेष मानकों की जांच से पता चलता है कि ये नोट घटिया क्वालिटी के हैं।

मेघवाल ने बताया कि विमु्रदीकरण के बाद असली दिखने वाले कोई जाली भारतीय करेंसी नोट बरामद नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने देश में जाली भारतीय करेन्सी नोटों की तस्करी और परिचालन पर रोक लगाने व आतंकवाद के वित्त पोषण को खत्म करने के लिए कई उपाय किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जाली करेंसी नोटों की तस्करी रोकने और प्रतिरक्षण उपाय करने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में मेघवाल ने बताया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए गठित वातल समिति ने अपनी रिपोर्ट में भुगतान संबंधी अर्थतंत्र में संरचनागत सुधारों की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि डिजिटल भुगतान संबंधी व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए सरकार ने रतन पी वातल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी।
उन्होंने बताया कि इस समिति ने भुगतान संबंधी अर्थतंत्र में संरचनागत सुधारों की सिफारिश की है जिनमें भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन किया जाना भी शामिल है। मेघवाल ने बताया कि मौजूदा भुगतान और निपटान प्रणाली विनियमन और पर्यवेक्षण बोर्ड की जगह भारतीय रिजर्व बैंक में भुगतान विनियामक बोर्ड सृजित करने के लिए तौर तरीके वित्त विधेयक, 2017 में शामिल किए गए हैं।

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