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राजस्थान में नए साल में मुख्य सचिव, दौड़ में कई अफसर

राजस्थान के मुख्य सचिव सीएस राजन के इस साल के दिसंबर में रिटायर होने के साथ ही प्रदेश में नए मुख्य सचिव की तलाश तेज हो गई है।
Author जयपुर | November 25, 2015 02:36 am

राजस्थान के मुख्य सचिव सीएस राजन के इस साल के दिसंबर में रिटायर होने के साथ ही प्रदेश में नए मुख्य सचिव की तलाश तेज हो गई है। इस पद के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद के तीन अफसरों को दौड़ में माना जा रहा है। नए मुख्य सचिव को लेकर प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में कयासबाजी के दौर भी चल रहे हैं। इसके साथ ही राजे अपने मुख्यमंत्री कार्यालय को मजबूत करेंगी और और तेजतर्रार आइएएस अफसर को सीएमओ में तैनात करेंगी।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए सबसे अहम पद माना जाने वाले मुख्य सचिव के लिए राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में अफसरों के नाम सामने आने लगे हैं। प्रदेश में 1978 बैच के आइएएस अफसर और मौजूदा मुख्य सचिव सीएस राजन दिसंबर में रिटायर हो रहे हैं। इस पद के लिए प्रदेश में तीन अफसरों 1980 बैच के ए मुखोपाध्याय और 1981 बैच के अशोक जैन और राकेश वर्मा के नाम सरकार के सामने तेजी से उभर कर आए हैं। ये तीनों ही अफसर अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर है। इनमें मुखोपाध्याय मौजूदा में गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो जैन नगरीय विकास विभाग और राकेश वर्मा प्रशासनिक सुधार महकमे को संभाल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्य सचिव की तैनाती में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद ही सबसे अहम होगी। दौड़ में शामिल तीनों अफसर ही राजे के पसंदीदा हैं। वरिष्ठता के हिसाब से मुखोपाध्याय के सबसे ज्यादा आसार हैं। इसके बावजूद अशोक जैन और राकेश वर्मा को भी मुख्यमंत्री का सबसे भरोसेमंद अफसर माना जाता है।

प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्रों में माना जा रहा है कि अब सरकार आने वाले समय के लिए ऐसे अफसर को मुख्य सचिव तैनात करेगी जो लंबे समय तक इस पद पर रहे। वसुंधरा सरकार का दो वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है और अब आने वाले दो साल उसे अपने कामकाज को जनता के बीच ले जाना है। इसके लिए ही उसे दमदार और सरकार के साथ कदमताल कर सके, ऐसे अफसर की तलाश है। इसमें ए मुखोपाध्याय का सेवाकाल जून 2017 तक का बाकी है तो अशोक जैन का कार्यकाल जनवरी 2018 तक है। ये दोनों ही अफसर डेढ़ से दो साल तक की अवधि के लिए मुख्य सचिव हो सकते हैं। इससे सरकार को अपनी योजनाओं को तेज गति से लागू करवाने में कोई परेशानी नहीं आएगी। राकेश वर्मा अगस्त 2016 में ही रिटायर हो जाएंगे।

प्रदेश में भाजपा की वसुंधरा सरकार दो साल में अभी तक अपने कामकाज की कोई छाप जनता में नहीं छोड़ पाई है। इसके लिए सत्ताधारी भाजपा का मानना है कि सरकार को प्रशासनिक अफसरों का पूरा सहयोग नहीं मिल पाया। इसके चलते ही सरकार की छवि जनता में बिगड़ गई। प्रशासन में मुख्य सचिव के अलावा मुख्यमंत्री के सचिव का पद भी खासा महत्त्वपूर्ण होता है। प्रदेश के सीएमओ में इस बार कोई वरिष्ठ अधिकारी तैनात नहीं होने के कारण भी प्रशासन तंत्र पर उसकी पकड़ कमजोर ही रही। सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे अब सीएमओ में एक तेजतर्रार आइएएस अफसर को भी तैनात करने की तैयारी कर रही है।

अभी मुख्यमंत्री के सचिव के तौर पर 1993 बैच के आइएएस अफसर तन्मय कुमार ही सीएमओ का तमाम कामकाज देख रहे हैं। प्रदेश के आइएएस अफसरों की लाबी में काफी जूनियर अफसर माना जाता है। इससे ही सीएमओ की प्रशासन तंत्र पर मजबूत पकड नहीं बन पाई और सरकार की कई मामलों में किरकिरी भी हुई। इनमें सबसे अहम जयपुर में मंदिरों को तोडे जाने के मसले पर वसुंधरा राजे को आरएसएस की नाराजगी झेलनी पड़ी। आरएसएस का मानना है कि सीएमओ ने ही मुख्यमंत्री तक सही सूचनाएं नहीं भिजवाई। वसुंधरा राजे अब सीएमओ में तन्मय कुमार के ही बैच के आइएएस अफसर शिखर अग्रवाल को सचिव के तौर पर लाने की तैयारी में है। अग्रवाल अभी जयपुर विकास प्राधिकरण में आयुक्त है। उन्हें प्रदेश के आइएएस अफसरों में तेजतर्रार के साथ ही तुरंत निर्णय लेने वाला अफसर माना जाता है। मुख्यमंत्री भी अग्रवाल की कार्यक्षमता से खासी प्रभावित हैं।

 

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