December 07, 2016

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न्यूयॉर्क में 1960 में फिडेल कास्त्रो को होटलों ने नहीं दिया था कमरा, यूएन कैंपस में ही तंबू गाड़ने की धमकी के बाद महासचिव ने कराया था इंतजाम

भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब मैं कास्त्रो से मिला तो उन्होंने मुझसे कहा, "क्या आप को पता है कि जब मैं न्यूयार्क के उस होटल में रुका तो सबसे पहले मुझसे मिलने कौन आया?

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो और पूर्व पीएम राजीव गांधी के साथ नटवर सिंह

सितंबर 1960 में संयुक्त राष्ट्र की 15वीं वर्षगांठ समारोह में जब दुनिया भर के बड़े नेताओं का न्यूयॉर्क में जमावड़ा लगा था, तब फिदेल कास्त्रो भी न्यूयार्क पहुंचे थे लेकिन उन्हें वहां के किसी भी होटल ने ठहरने के लिए कमरा नहीं दिया था। इससे उन्हें बहुत बड़ा धक्का लगा था कि वहाँ का कोई होटल उन्हें अपने यहाँ रखने के लिए तैयार नहीं है। एक दिन तो वो क्यूबा के दूतावास में रहे लेकिन अगले दिन उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव डैग हैमरशोल्ड से मुलाकात की और कहा था कि ये आप की जिम्मेदारी है कि मेरे और मेरे प्रतिनिधिमंडल के रहने की व्यवस्था करें वर्ना मैं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के प्रांगण में ही तंबू डाल कर रहने लगूंगा। इसके बाद यूएन महासचिव की पहल पर अगले दिन न्यूयॉर्क का टेरेसा होटल ने उन्हें अपने यहाँ कमरा दिया था।

भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब मैं कास्त्रो से मिला तो उन्होंने मुझसे कहा, “क्या आप को पता है कि जब मैं न्यूयार्क के उस होटल में रुका तो सबसे पहले मुझसे मिलने कौन आया? महान जवाहर लाल नेहरू। मेरी उम्र उस समय 34 साल थी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति का कोई तजुर्बा नहीं था मेरे पास। नेहरू ने मेरा हौसला बढ़ाया जिसकी वजह से मुझमें गजब का आत्मविश्वास जगा। मैं ताउम्र नेहरू के उस एहसान को नहीं भूल सकता।”

नटवर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे आलेख में कहा है, “फिदेल कास्त्रो और क्यूबा दोनों एक-दूसरे के पर्याय के रूप में जाने जाते थे। उनकी मौत पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है। वो एक ऐसी शख्सियत थे जिन्हें पूरी दुनिया जानती थी। फिदेल कास्त्रो साल 1979 में हवाना में हुए 6ठे शिखर सम्मेलन के अध्यक्ष थे। 1983 में इंदिरा गांधी ने क्यूबा के इस महान नेता से पदभार संभाला थे, तब मैं 7वें शिखर सम्मेलन का महासचिव था।”

नटवर सिंह ने लिखा है, “आखिरी बार मैं उनसे सितंबर 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ हवाना में मिला था। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात और बातचीत करीब 6 घंटे तक चली थी। कास्त्रो राजीव गांधी की शख्सियत, स्टाइल और उन पर पड़े प्रभावों के बारे में हमलोगों के सामने रख रहे थे। यह मेरे लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर एक आश्चर्यजनक ट्यूशन था। हालांकि, यह एकतरफा था लेकिन कास्त्रो के प्रभावशाली व्यक्तित्व ने इसे ठोस बना दिया था।” नटवर कहते हैं कि भारत हमेशा से फिदेल कास्त्रो को सम्मान और स्नेह के भाव से देखता रहेगा।

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First Published on November 27, 2016 8:50 am

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