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नक्सली हिंसा से निपटने के लिए हथियारों में ट्रैकिंग और बायोमैट्रिक का होगा इस्तेमाल

नक्सली हिंसा से निपटने के लिये प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षा बल के जवानों को ट्रैकिंग और बायोमीट्रिक सिस्टम से लैस अत्याधुनिक हथियार देने की पहल की गयी है।
Author नई दिल्ली | May 8, 2017 18:18 pm
(File Photo)

नक्सली हिंसा से निपटने के लिये प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षा बल के जवानों को ट्रैकिंग और बायोमीट्रिक सिस्टम से लैस अत्याधुनिक हथियार देने की पहल की गयी है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सुरक्षा एजेंसियों के यहां आयोजित सम्मेलन में यह बात कही। सिंह ने कहा कि नक्सली संगठन आम तौर पर सुरक्षाबलों से लूटे हथियारों का ही इस्तेमाल करते हैं। इसे रोकने के लिये जवानों को बायोमीट्रिक और ट्रैकिंग सिस्टम युक्त स्मार्ट गन मुहैया कराना करागर विकल्प साबित होगा। उन्होंने कहा कि हथियारों में लगे ट्रैकर की मदद से लूटे गये हथियारों के साथ नक्सली गुटों की भी निशानदेही की जा सकेगी।

इतना ही नहीं उन्होंने जवानों के जूतों और बुलेटप्रूफ जैकिट में भी जीपीएस युक्त ट्रैकर लगाने की जानकारी दी। जिससे अभियान पर निकले जवानों की पल पल की जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने नक्सलियों द्वारा बारूदी सुरंगों के लिये इस्तेमाल किये जाने वाले जिलेटिन एवं अन्य विस्फोटक सामग्री को विशिष्ट पहचान नंबर देने का भी सुझाव दिया। जिससे इनके दुरच्च्पयोग को रोका जा सके। बैठक के दौरान सिंह ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण में हो रहे इजाफे पर संतोष व्यक्त करते हुये इस बात की जरूरत पर बल दिया कि इनसे खुफिया जानकारियां अधिक से अधिक हासिल करने में कामयाबी मिले। उन्होंने कहा कि नक्सलियों का आत्मसमर्पण तब ही लाभप्रद साबित होगा।

इसके अलावा उन्होंने नक्सलरोधी अभियानों की कामयाबी के लिये खुफिया तंत्र को राज्य की एजेंसियों और स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाने की जरूरत पर बल दिया। सिंह ने कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की तुलना में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में खुफिया सूचनाएं जुटाने का प्रतिशत कम है। इसके लिये सार्वजनिक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ) के तहत बस्तर क्षेत्र के लिये विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा जिससे समूचे इलाके को क्षेत्रीय स्तर पर जोड़ा जा सके।

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