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भाजपा से बगावत के बाद पहली ही पारी में हिट हुए नवजोत सिंह सिद्धू, क्रिकेट में पहले ही विश्‍व कप में लगातार चार अर्द्धशतक लगा हुए थे चर्चित

भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर (पूर्व) सीट से विधान सभा चुनाव जीतकर कैप्टन अमरिंदर सिंह मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने हैं।
विधान सभा चुनाव 2017 में अमृतसर (पूर्व) सीट से जीतने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पत्नी नवजोत सिंह कौर के साथ। (PTI Photo)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू ने गुरुवार (16 मार्च) को अपने करियर में एक नई पारी की शुरुआत की। सिद्धू ने पंजाब की नवगठित अमरिंदर सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लिया। चुनाव से पहले और नतीजे आने के बाद इस बात की जबरदस्त चर्चा थी कि सिद्धू को पंजाब का डिप्टी-सीएम बनाया जा सकता है। कैबिनेट मंत्री के रूप में उनके शपथ ग्रहण के साथ ही इस चर्चा को विराम लग गया है। सिद्धू पंजाब चुनाव से ठीक पहले जनवरी में कांग्रेस में यह कहते हुए शामिल हुए थे कि वो जन्मजात कांग्रेसी हैं। भाजपा के टिकट पर दो बार लोक सभा और एक बार राज्य सभा सांसद रहे सिद्धू ने पिछले साल जुलाई में पार्टी और राज्य सभा सदस्यता छोड़ी थी।

सिद्धू की पत्नी नवजोत सिंह कौर भाजपा की विधायक थीं। उन्होंने भी अपने पति के साथ भाजपा छोड़ दी। पति-पत्नि दोनों ही राज्य में भाजपा के साझीदार शिरोमणी अकाली दल (बादल) से नाराज थे। उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर भी की। भाजपा छोड़ने के बाद सिद्धू के आम आदमी पार्टी में जाने की चर्चा जोरों पर चली। लेकिन सिद्धू और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के बीच हुई बैठकों और बयानबाजियों के बाद उनके आप में जाने की संभावनाओं को कटु अंत हो गया।

सिद्धू का जन्म 20 अक्टूबर 1963 को पंजाब के पटियाला में हुआ था। उनके पिता स्थानीय क्रिकेटर थे और चाहते थे कि उनके बेटा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बने। सिद्धू ने 1981-82 में प्रथम श्रेणी के मैच में डेब्यू किया। बहुत जल्द ही उन्होंने अपने पिता का सपना पूरा करते हुए 1983-84 में अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में और 1987 में वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया। उनकी असली पहचान 1987 में हुए वनडे विश्व कप से बनी। अपने पहले ही विश्व कप में लगातार चार अर्ध-शतक ठोक कर भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। सिद्धू ने अपने क्रिकेट करियर में कुल 51 टेस्ट और 131 वनडे खेले। अपने क्रिकेट करियर के दौरान सिद्धू ने ज्यादातर शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी की। उन्होंने 1999 में अपना आखिरी टेस्ट और 1998 में अपना आखिरी वनडे खेला।

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सिद्धू ने क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में अपना करियर की दूसरी पारी शुरू की और जल्द ही अपने चुटीले अंदाज और अलहदा शायरी के लिए चर्चित हो गए। क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में सफलता हासिल करने के बाद सिद्धू ने छोटे पर्दे का रुख किया और टीवी पर भी जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। हिन्दी फिल्म “मुझसे शादी करोगी” और पंजाबी फिल्म मेरा पिंड में अभिनय में भी हाथ आजमा चुके हैं।

साल 2004 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी शुरू करते हुए भाजपा के टिकट पर पंजाब के अमृतसर से लोक सभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की। हत्या के एक मामले में अभियुक्त सिद्धू को बीच में ही पद छोड़ना पड़ा लेकिन अदालत से बरी होने के बाद वो दोबारा सांसद चुन लिए गए। सिद्धू ने 2009 में इसी सीट से दोबार लोक सभा चुनाव जीता। 2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट से पार्टी नेता अरुण जेटली को उम्मीदवार बनाया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पार्टी का यह फैसला सिद्धू को नागवार गुजरा। वहीं जेटली कांग्रेस के अमरिंदर सिंह से संसदीय चुनाव हार गए जबकि भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला था।

सिद्धू की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा ने अप्रैल 2016 में उन्हें राज्य सभा सांसद बनाया लेकिन चंद महीने बाद जुलाई 2016 में सिद्धू ने इससे इस्तीफा दे दिया। तमाम उतार-चढ़ावों के बाद सिद्धू 2017 विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की नाव पर सवार होकर अमृतसर (पूर्व) से विधायक बन गए। पुरानी कहावत है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। जिस कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अरुण जेटली को हराया था उन्हीं के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बन गए। कह सकते हैं कि अरुण जेटली को उनकी सीट देने से शुरू हुई इस रंजिश का काव्यात्मक अंत हुआ।

अमरिंदर सिंह मंत्रिमंडल में कैबिनेट मिनिस्टर के रूप में शपथ लेते नवजोत सिंह सिद्धू-

देखिए जब सिद्धू कांग्रेस में शामिल नहीं हुए थे तब अमरिंदर सिंह ने उन पर क्या कहा था?

 

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