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 नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया व राहुल गांधी के खिलाफ सम्मन पर रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और तीन अन्य को सम्मन करने के खिलाफ दायर याचिकाओं का निबटारा होने तक निचली अदालत के आदेश पर लगी अंतरिम रोक की अवधि आज बढा दी। न्यायमूर्ति वी पी वैश ने अंतरिम रोक लगाने के आदेश को तब […]
Author December 15, 2014 15:52 pm
मई में राहुल गांधी बन सकते हैं कांग्रेस अध्यक्ष? (फोटो: भाषा)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और तीन अन्य को सम्मन करने के खिलाफ दायर याचिकाओं का निबटारा होने तक निचली अदालत के आदेश पर लगी अंतरिम रोक की अवधि आज बढा दी।

न्यायमूर्ति वी पी वैश ने अंतरिम रोक लगाने के आदेश को तब बढ़ा दिया जब सोनिया, राहुल और अन्य के वकील ने इस मामले में रोक लगाने की मांग की।
यद्यपि अदालत ने मामले की सुनवायी 12 जनवरी 2015 तय की जिस दिन से वह उनकी याचिकाओं दिन पर प्रतिदिन आधार पर सुनवायी करेगी।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘छह अगस्त का आदेश :निचली अदालत के निर्देश पर अंतरिम रोक: तब तक जारी रहेगा जब तक याचिकाओं का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता। अदालत मामले पर 12 जनवरी से दिन प्रतिदिन आधार पर सुनवायी करेगी। अपीलों पर इस अदालत द्वारा नियमित आधार पर सुनवायी की जाएगी। इस मामले को विषय नम्बर एक के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा।’’

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने यद्यपि याचिकाकर्ताओं के कदम का यह कहते हुए विरोध किया कि ‘‘सुनवायी की अगली तिथि से उनके :सोनिया एवं अन्य: किसी अन्य बहाने को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’’

स्वामी ने निचली अदालत के समक्ष अपनी शिकायत में यंग इंडिया द्वारा दैनिक पत्र के अधिग्रहण में कांग्रेस नेताओं पर कथित धोखाधड़ी और धनराशि के दुरूपयोग का आरोप लगाया था।

सोनिया और राहुल के अलावा इस मामले में कांग्रेस कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा, महासचिव आस्कर फर्नांडिस और सुमन दुबे ने निचजी अदालत द्वारा उन्हें सम्मन करने के खिलाफ गत 30 जुलाई को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

निचली अदालत ने सोनिया, राहुल, वोरा, फर्नांडिस, दुबे और पित्रोदा को गत 26 जून को सम्मन करके सात अगस्त को पेश होने का आदेश दिया था।
निचली अदालत ने पित्रोदा के लिये नौ दिसंबर को फिर से सम्मन जारी किया था क्योंकि उन्होंने इस मामले में उच्च न्यायालय में कोई याचिका दायर नहीं की है।

 

 

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