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मोदी vs मनमोहन: आमने सामने कल और आज

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और सांप्रदायिक विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार अतीत को नए सिरे से लिखा जा रहा है और असहमतियों को दबाया जा रहा है। उन्होंने यहां एक अधिवेशन में अपने स्वभाव के विपरीत तीखे स्वर में दिए गए भाषण में कहा कि लोकतंत्र की संस्थाएं खतरे में हैं और कल्याणकारी राष्ट्र के तानेबाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
जुबानी जंग के बाद दोस्ती का हाथ : बुधवार को एक-दूसरे की तीखी आलोचना करने के कुछ ही घंटों बाद मनमोहन सिंह, नरेंद्र मोदी से मिलने उनके आवास पर पहुंचे और मोदी ने बड़ी अपनाइयत से उनका स्वागत किया। मोदी ने ट्वीट किया-डाक्टर मनमोहन सिंह जी से मिल कर और 7-आरसीआर में उनका स्वागत करके बहुत प्रसन्नता हुई। हमारे बीच बहुत अच्छी बैठक हुई। (फोटो: जनसत्ता)

खतरे में लोकतांत्रिक संस्थाएं : मनमोहन

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और सांप्रदायिक विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार अतीत को नए सिरे से लिखा जा रहा है और असहमतियों को दबाया जा रहा है। उन्होंने यहां एक अधिवेशन में अपने स्वभाव के विपरीत तीखे स्वर में दिए गए भाषण में कहा कि लोकतंत्र की संस्थाएं खतरे में हैं और कल्याणकारी राष्ट्र के तानेबाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने आर्थिक विकास के संबंध में भाजपा नीत सरकार के दावों पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ग्रामीण भारत गहरे संकट में है और अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की गति कमजोर है। मनमोहन ने कहा-लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में हैं। तेज आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के नाम पर कल्याणकारी राष्ट्र का पूरा तानाबाना बिगाड़ा जा रहा है, जबकि ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआइ के आयोजित अधिवेशन में अपने भाषण में कहा कि अत्यधिक पक्षपातपूर्ण और सांप्रदायिक विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अतीत को नए सिरे से लिखा जा रहा है। असहमतियों को दबाया जा रहा है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने यह तय करने का भरपूर प्रयास किया कि भारत एक खुले बहुलवादी, उदार और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के तौर पर समृद्ध हो जिसे अपनी समग्र विरासत पर गर्व है। भारत का यह पूरा विचार ही अब सुनियोजित हमलों का शिकार है। हमें समझना चाहिए कि ये हमले कैसे किए जा रहे हैं और हमें अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। जानेमाने अर्थशास्त्री मनमोहन ने अर्थव्यवस्था पर सरकार के कामकाज के मुद्दे को उठाया और कहा कि सरकार के अपने लोग भी महसूस करते हैं कि अर्थव्यवस्था की हालत कमजोर है।

मनमोहन ने कहा कि पिछले एक साल में भाजपा सरकार को यह दिखाने के लिए कुछ आंकड़े तैयार करने पड़े और बदलने पड़े कि यह पिछला एक साल अर्थव्यवस्था के लिए इतना बुरा नहीं रहा। लेकिन उनके लोगों की ही राय है कि पिछले एक साल की स्थिति बहुत कमजोर है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार और रिजर्व बैंक के गवर्नर दोनों की ही राय है कि अर्थव्यवस्था में सुधार की स्थिति लचर है।

उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार की नीतियों से अत्यधिक सामाजिक बदलाव और अभूतपूर्व आर्थिक विकास हुआ था। उसके शासनकाल में भारत चीन के बाद दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ा था। मनमोहन ने कहा-हमारे अनेक कार्यक्रमों को भाजपा सरकार की पहल के तौर पर नए पैकेज में प्रचारित किया जा रहा है। हमारे सत्ता में रहते हुए भाजपा ने जिन चीजों का विरोध किया था, उन्हीं को अब उसके योगदान के तौर पर बेचा जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम का जिक्र किया और कहा कि यह यूपीए सरकार की नव निर्माण नीति की कार्बन कॉपी है।

मनमोहन ने कहा-इससे हमें हैरानी नहीं होती। अगर भाजपा यूपीए के रचनात्मक कार्यों को अपने हाथ में लेती है तो यह तारीफ की बात है। पर भाजपा नेतृत्व ने लगातार यूपीए को भ्रष्ट कहने और कमजोर नीतियों के आरोप लगाने पर ध्यान केंद्रित रखा जो दोनों ही हकीकत से दूर हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के छात्र कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा-हमें अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी युवा पीढ़ी से संपर्क साधकर रखे और सोशल मीडिया जैसे संचार के नए माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रतिद्वंद्वी आगे दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी भारत को आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के युग में लाए। लेकिन एक पार्टी के रूप में हम नए अवसरों का पूरा लाभ नहीं ले सके। इस मामले में हमारे राजनीतिक विरोधी हमें पीछे छोड़ते हुए दिखाई देते हैं। हमें इस अंतर को भरना होगा। मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसकी नेता सोनिया गांधी व राहुल गांधी गरीबी उन्मूलन और नए भारत के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने एनएसयूआइ कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों को इस बारे में बताएं कि भाजपा सरकार में क्या कमियां हैं और वे यूपीए सरकार के बारे में क्या झूठ बोल रहे हैं।

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संविधान से ऊपर थीं सोनिया : मोदी

सोनिया गांधी की तरफ से किए तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संकेत दिया कि यूपीए शासन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष वे संविधानेत्तर शक्ति थीं जो प्रधानमंत्री कार्यालय पर वास्तविक शक्तियों का इस्तेमाल कर रहीं थीं। अब संवैधानिक तरीकों से शासन चलाया जा रहा है।

राजग सरकार पर संसद में खुला अहंकार प्रदर्शित करने और उसे ‘एक व्यक्ति की सरकार’ बताने के कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मोदी ने कहा-संभवत: वे इस तथ्य का जिक्र कर रही थीं कि पूर्व में संविधानेत्तर शक्तियां वास्तव में सत्ता का संचालन कर रही थीं। अब सत्ता का संचालन केवल संवैधानिक माध्यमों से हो रहा है। अगर आरोप यह है कि हम संवैधानिक माध्यमों से काम कर रहे हैं और किसी संविधानेत्तर शक्तियों की बात नहीं सुन रहे हैं, तो मंै खुद को इस आरोप का दोषी मानता हूं।

समाचार एजंसी को दिए साक्षात्कार में सोनिया और राहुल गांधी दोनों पर अब तक का सबसे करारा हमला करते हुए मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शक्ति केंद्रीयकृत होने, अल्पसंख्यकों, गैर सरकारी संगठनों, भूमि अधिग्रहण और जीएसटी विधेयकों, आर्थिक सुधारों और कई अन्य विषयों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए। राहुल गांधी के ‘सूटबूट की सरकार’ के व्यंग्य पर मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार को एक साल बाद भी पचा नहीं पा रही है। जनता ने उन्हें उनकी भूल-चूक के पापों के लिए दंडित किया है। हमने सोचा था कि वे इससे सबक सीखेंगे लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है’।

प्रधानमंत्री कार्यालय में शक्तियों के केंद्रीयकृत हो जाने के आरोपों पर मोदी ने कहा, ‘मंत्रियों को बढ़ी हुई शक्तियां दी गई हैं जिसके नतीजतन पहले जिन फैसलों को लेने के लिए प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास आने की जरूरत पड़ती थी, अब मंत्री खुद वे फैसले कर सकते हैं। मंत्रालयों की वित्तीय शक्तियों को तिगुना कर दिया गया है और राज्यों की शक्तियों को बढ़ाया गया है। हमने सरकार के कामकाज के नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया है और फैसले वही करते हैं, जो इसके लिए अधिकृत हैं’।
विपक्ष के कारपोरेट समर्थक बताए जा रहे भूमि अधिग्रहण विधेयक पर मोदी ने कहा-120 साल पुराने भूमि अधिग्रहण कानून को संशोधित करने से पहले पिछली सरकार ने संसद में उसपर 120 मिनट भी चर्चा नहीं की। यह मानकर कि विधेयक किसानों के लिए अच्छा है, हमने भी उस समय उसका समर्थन किया। बाद में कई राज्यों से शिकायतें मिलीं। इसलिए हम गलतियों को ठीक करने के लिए विधेयक लाए, वह भी राज्यों की मांग के कारण।

कृषि संकट और किसानों की आत्महत्याओं के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि ये आत्महत्याएं कई सालों से चिंता का विषय बनी हुई हैं और राजनीतिक ‘अंक बटोरने’ का इरादा समस्या का समाधान नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा-मैं अपने किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह सरकार उनके कल्याण के लिए जो भी जरूरी है, उसे करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
अल्पसंख्यक समुदाय और उनके संस्थानों पर हमलों के सवाल के जवाब में मोदी ने कहा-हमलावरों को कानून के तहत कड़ा दंड मिलना चाहिए। मैंने ऐसा पहले भी कहा है और पुन: दोहराता हूं कि किसी भी समुदाय के खिलाफ किसी तरह का भेदभाव या हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गैरसरकारी संगठनों के खिलाफ केंद्र की कार्रवाई, जिसकी व्यापक आलोचना हुई है, के बारे में पूछे जाने पर मोदी ने कहा-ऐसे कदम केवल पूर्ववर्ती सरकार के पारित कानून को अमल में लाने के मकसद से उठाए गए हैं। कानून के विपरीत कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। कोई देशभक्त नागरिक इस पर आपत्ति नहीं कर सकता है।

अक्सर विदेश यात्राओं पर जाने को लेकर विपक्षी की ओर से की जा रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए मोदी ने कहा-17 साल तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नेपाल नहीं जाना कोई अच्छी स्थिति नहीं थी। सिर्फ इसलिए कि हम एक बड़ा देश हैं, हम अहंकारी नहीं हो सकते। हम एक अलग युग में रह रहे हैं। आतंकवाद वैश्विक हो गया है और कई दूरदराज के देशों से आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों और डब्लूटीओ जैसे संगठनों के फैसले हम पर बाध्यकारी होते हैं। अगर हम ऐसे सम्मेलनों में उपस्थित नहीं हों, हमें वहां किए जाने वाले फैसलों से नुकसान पहुंच सकता है। विपक्ष के मेरे मित्र मेरी विदेश यात्राओं के बारे में बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। लेकिन हाल के सभी सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि हमारी विदेशी नीति को काफी ऊंचा आंका गया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अब ‘दिल्ली को समझ’ लिया, मोदी ने कहा-जब मैंने पदभार संभाला था, पाया कि दिल्ली में सत्ता के गलियारे विभिन्न प्रकार के दलालों से भरे पड़े हैं। इसे साफ करना महत्वपूर्ण था, ताकि खुद सरकारी मशीनरी में सुधार आ जाए।

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