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मुस्लिमों की दशा सुधारने पर ध्यान देगी सरकार: नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलिम समाज के सभी तबकों की शिकायतों का निवारण करने में अपनी तरफ से पूरा समर्थन देने का वादा किया है। इसके तहत खासतौर पर उनकी सामाजिक दशाओं में सुधार और उनकी शिक्षा जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने अपनी राय तब जाहिर की जब मुसलिम […]
मोदी ने विशेषतौर पर इन नेताओं की मुसलिम धर्म स्थलों, मस्जिदों और मदरसों की संपत्तियों से जुड़ी शिकायतों पर गौर करने का आश्वासन दिया। (फ़ोटो-पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलिम समाज के सभी तबकों की शिकायतों का निवारण करने में अपनी तरफ से पूरा समर्थन देने का वादा किया है। इसके तहत खासतौर पर उनकी सामाजिक दशाओं में सुधार और उनकी शिक्षा जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अपनी राय तब जाहिर की जब मुसलिम नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उनसे मुलाकात कर समुदाय से जुड़े मुद्दों और अपनी चिंताओं पर उनसे चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने सामुदायिक सौहार्द और देश की एकता को मजबूत बनाने के लिए काम करने का वादा किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गौर से सुना और उन्हें मुसलिम समाज के सभी वर्गों की शिकायतों को दूर करने में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। बयान में कहा गया है कि उन्होंने मुसलिम युवाओं को अधिकार संपन्न बनाने पर जोर दिया ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकें। उन्होंने उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार लाने और उनकी शिक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी सहायता देने का वादा किया।

मोदी ने विशेषतौर पर इन नेताओं की मुसलिम धर्म स्थलों, मस्जिदों और मदरसों की संपत्तियों से जुड़ी शिकायतों पर गौर करने का आश्वासन दिया। यह आश्वासन तब दिया गया जब इन नेताओं ने मुसलिम धर्म स्थलों, मस्जिदों और मदरसों की संपत्तियों से जुड़े मुद्दों की तरफ मोदी का ध्यान आकर्षित किया। मुसलिम नेताओं ने मुसलिम युवाओं को खासतौर से शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार से सहायता देने को कहा।

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार लाने और उनकी शिक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी सहायता देने का वादा किया। मुसलिम नेताओं ने तेज आर्थिक विकास, सामुदायिक सौहार्द और शांति को प्रोत्साहन देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उनके उद्देश्यों को पूरा करने में अपने समुदाय का पूरा समर्थन देने का वादा किया। कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति और आतंकवाद के बढ़ते खतरे के बारे में आशंकाएं व्यक्त करते हुए इन नेताओं ने चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक एकजुटता दिखाने और सामूहिक प्रयास करने की जरूरत पर बल दिया।

प्रधानमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में सैयद सुल्तान उल हसन चिश्ती मिसबाही (सजदा नशीं, अजमेर शरीफ), हजरत गुलाम यासीन साहिब (शहर काजी, वाराणसी), शेख वसीम अशरफी (इमाम तंजीम, मुंबई), मोहम्मद हामिद (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इमाम तंजीम, नागपुर), अल्लामा तस्लीम राजा साहिब (दरगाह बरेलवी शरीफ, उत्तर प्रदेश), सैयद अब्दुल राशिद अली (सैयद शाहिद दरगाह, शहडौल, मध्य प्रदेश), मौलाना अबु बक्र बसानी (नागौरी शरीफ दरगाह, राजस्थान), सैयद अली अकबर (ताजपुरा शरीफ, चेन्नई), हाजी अब्दुल हफीज खान ( इमाम, तंजीम बालाघाट, मध्य प्रदेश) शामिल थे।

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