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‘अजगर’ से नरेंद्र मोदी ने साधी हरियाणा की राजनीति

अनूप चौधरी फरीदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मत्रिमंडल के विस्तार के जरिए हरियाणा में एक बार फिर अजगर (अहीर, जाट, गुर्जर, राजपूत) में नए प्राण फूंक दिए है। इससे पहले किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने अजगर के जरिए किसानों को एक झंडे के नीचे खड़ा किया था। अजगर की एकजुटता से […]
Author November 14, 2014 09:31 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मत्रिमंडल के विस्तार के जरिए हरियाणा में एक बार फिर अजगर (अहीर, जाट, गुर्जर, राजपूत) में नए प्राण फूंक दिए है।

अनूप चौधरी

फरीदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मत्रिमंडल के विस्तार के जरिए हरियाणा में एक बार फिर अजगर (अहीर, जाट, गुर्जर, राजपूत) में नए प्राण फूंक दिए है। इससे पहले किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने अजगर के जरिए किसानों को एक झंडे के नीचे खड़ा किया था। अजगर की एकजुटता से ही वीपी सिंह प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे और बिखराव के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल में प्रदेश के कद्दावर जाट नेता और किसान नेता दीनबंधु चौधरी छोटू राम के नाती बीरेंद्र सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाकर अजगर को नया जीवनदान दिया है। हरियाणा में बीरेंद्र से पहले राव इंद्रजीत सिंह अहीर, केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री है, फरीदाबाद के सांसद कृष्ण पाल गुर्जर केंद्र में राज्यमंत्री है। राजपूत वीके सिंह हालांकि गाजियाबाद से सांसद बने हैं और केंद्र में राज्यमंत्री हंै पर वे हरियाणा के भिवानी जिले से हंै और सेवानिवृत्त होने के बाद इसी प्रदेश से राजनीति की शुरुआत की थी। 15 सितंबर 2013 को सिंह ने रेवाड़ी में भूतपूर्व सैनिकों की सफल रैली का आयोजन किया था। नरेंद्र मोदी इसमें मुख्य अतिथि थे। वीके सिंह सांसद कहीं से भी हों पर उनकी मंशा का राजनीतिक केंद्र हरियाणा ही है।

भाजपा ने भले ही गैर जाट के मुद्दे पर हरियाणा में चुनाव जीता हो पर इस प्रदेश में किसान एक बड़ा वोट बैंक है। भाजपा को व्यापारियों और संपन्न लोगों की पार्टी माना जाता है। ऐसे में किसानों को अपने पक्ष में एकजुट करने के लिए मोदी ने अजगर को जीवित कर नया दाव खेला है। उन्होंने फसलों की कम कीमत और धान की ओने-पौने दामों में खरीद से किसानों में बढ़ती नराजगी को रोकने के लिए अजगर को सबल करने का प्रयास किया है। अ से अहीर राव इंद्रजीत सिंह, ज से जाट चौधरी बीरेंद्र सिंह, ग से गुर्जर-कृष्णपाल और र से राजपूत-वीके सिंह अब हरियाणा के किसानों को भाजपा से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

अजगर को एक जुट करने का यह पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले चौधरी चरण सिंह ने अजगर के बूते प्रधानमंत्री बने। इसके बाद ताऊ देवी लाल ने स्थिल पड़े अजगर को 1986 में एक बार फिर से जनता दल के बैनर तले खड़ा किया। जनता दल में तब देवीलाल ने अजित सिंह, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, वीपी सिंह और गुजरों के नाम अवतार सिंह को आगे किया। देवीलाल का यह सूत्र कारगर रहा और अजगर ने 1989 में केंद्र में जनता दल की सरकार बनाई। इसी के जरिए वीपी सिंह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। संगठित अजगर की वजह से ही उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव, बिहार में लालू प्रसाद यादव और ओड़िशा में बीजू पटनायक मुख्यमंत्री बने और देवी लाल उप प्रधानमंत्री के पद आसीन हुए।

देवी लाल के मरने के बाद हरियाणा में अजगर बिखर गया और चौटाला फिर कभी सत्ता के करीब नहीं पहुंच पाए। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री और अहीरवाल के कद्दावर नेता राव बीरेंद्र सिंह की देवी लाल से अच्छी नजदीकी रही है पर राव साहब की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी राव इंद्रजीत सिंह और चौटाला परिवार में दूरियां बन गईं।

हरियाणा में पहली बार जाट गैर जाट का नारा देकर भाजपा सत्ता में आई है। हालांकि चुनावों में जाटों के एक बड़े भाग ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया पर भाजपा के गैर जाट नेता इसे स्वीकार करने से कतराते हैं। इसी के चलते मोदी ने हरियाणा की कमान एक नए चहेरे मनोहर लाल खट्टर को सौंपी है। खट्टर के मुख्यमंत्री बनने के बाद अहीरवाल और जाट लैंड में नाकारा संदेश गया इसी के चलते मोदी ने अब प्रदेश की सभी किसान जातियों को संतुलन बनाकर अपने मंत्रिमंडल में जगह दी है। 33 फीसद वोट लेकर रियायती पास हुई भाजपा सत्ता का सुख भोग रही है। और 67 फीसद वोटों के बंटवारे के चलते इनेलो और कांग्रेस विपक्षी बेचों पर बैठी हैं। हरियाणा में जातीय आधार पर देखें तो सभी दलों के विधायकों में सबसे ज्यादा करीब 33 जाट विधायक हैं किसी भी पार्टी के किसी भी जाति के छह से ज्यादा विधायक नहीं हैं। पर इनेलो कांग्रेस और भाजपा में सबसे ज्यादा जाट विधायक बने है।

 

 

 

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