June 23, 2017

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सरकार ने रोकी 6 पूर्व जजों की नियुक्ति, कहा- आईबी ने दी है खराब रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज को आईबी की "प्रतिकूल रिपोर्ट" के बावजूद एक ट्राइब्यूनल का सदस्य नियुक्त किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (File Photo)

जजों की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच रस्साकशी खत्म नहीं हुई है। ताजा मामला रिटायर हो चुके जजों की विभिन्न कमीशनों और ट्राइब्यूनलों में नियुक्ति का है। केंद्र सरकार ने इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की “गुप्त रिपोर्ट” का हवाला देकर पूर्व जजों की नियुक्ति रोक दी है। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने पिछले कुछ महीनों में छह पूर्व जजों की विभिन्न ट्राइब्यूनलों और कमीशनों के चेयरपर्सन के रूप में नियुक्ति को “आईबी की प्रतिकूल रिपोर्ट” के आधार पर खारिज कर चुकी है।

इन छह जजों में दो हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जज हैं और दो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं और दो जज हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन जजों के नाम की अनुशंसा टेलीकॉम डिस्प्यूट सेटलमेंट एंड अपीलैट ट्राइब्यूनल, नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन, नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल और आर्म्ड फोर्सेज ट्राइब्यूनल इत्यादि पैनलों में नियुक्ति के लिए की गयी थी।

इन जजों का नाम संबंधित मंत्रालयों द्वारा विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए अप्वाइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट (एसीसी) के पास भेजा गया था। चार जजों के नाम को एसीसी ने “प्रतिकूल आईबी रिपोर्ट” के आधार पर अस्वीकार कर दिया। वहीं दो जजों के नाम अस्वीकार करने के लिए कोई कारण नहीं दिया गया।

दो अन्य नामित जजों जो हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं के बारे में आईबी ने वास्तव में “प्रतिकूल रिपोर्ट” दी थी जो कैबिनेट सचिवालय में मौजूद है जिसकी वजह से रिटायरमेंट के बाद उन्हें कहीं नियुक्ति नहीं किया जा सकता। रिटायर हो चुके जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार न्यायपालिका की अनुशंसा मानने को बाध्य नहीं है लेकिन उसे किसी जज का नाम अस्वीकार करने का कारण बताना होता है। हैरत की बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज को आईबी की “प्रतिकूल रिपोर्ट” के बावजूद एक ट्राइब्यूनल का सदस्य नियुक्त किया गया है।

 

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First Published on April 21, 2017 8:56 am

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