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एचआरए, एलटीए/एलटीसी और होम लोन पर टैक्स छूट के लिए सरकार ने जारी किया नया फॉर्म

कंपनियां कर्मचारियों से पहले भी आम तौर ये जानकारी लेती थीं लेकिन इसके लिए कोई मानक फॉर्म नहीं था।
प्रतीकात्मक तस्वीर

केंद्र सरकार के ताजा फैसले के बाद सभी नौकरीपेशा लोगों को आयकर नियमों के तरह टैक्स छूट लेने के लिए एक नया फॉर्म भरना होगा। आयकर विभाग ने इस साल फॉर्म 12-BB को नोटीफाई किया है। अब सभी नौकरीपेशा लोगों को अपने नियोक्ता को टैक्स छूट का दावे के साथ उसके प्रमाण पत्र देने होंगे। हालांकि कर्मचारी पहले भी नियोक्ता कंपनी को ये जानकारी देते रहे हैं लेकिन अभी तक इसके लिए कोई मानक फॉर्मेट नहीं उपलब्ध था।

विशेषज्ञों के अनुसार मानक फॉर्मेट के लागू होने के बाद सरकार के लिए नियोक्ता और कर्मचारियों से जुड़े डाटा को रखना आसाना हो जाएगा। आयकर विभाग की अधिसूचना के अनुसार अब सभी नियोक्ता फॉर्म 12BB के तहत ही कर्मचारियों का टीडीएस (स्रोत से टैक्स कटौती) काटा जाएगा और उसके आधार पर उन्हें तनख्वाह दी जाएगी।

अब सभी कंपनियों को कर्मचारियों का टीडीएस काटने के लिए  फॉर्म 12BB में दी गई जानकारी का ही इस्तेमाल करना होगा। इस फैसले के पहले सभी कंपनियां अपने-अपने फॉर्मेट का प्रयोग करती थीं और टैक्स छूट के लिए जरूरी सभी सूचनाएं दे दी गई हैं इसकी जिम्मेदारी नियोक्ता और कर्मचारी पर होता था। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार नए फॉर्म के बाद नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को सहूलियत हो जाएगा क्योंकि ये फॉर्म बहुत ही समेकित है।

नए फॉर्म में सभी कर्मचारियों को एलटीए/एलटीसी (लीव ट्रैवेल अलावेंस/छूट) पर कर छूट पाने के लिए यात्रा का प्रमाणपत्र अवश्य देना होगा। नए फॉर्म में प्रत्येक वित्त वर्ष एक लाख रुपये से अधिक किराया देने वाले कर्मचारियों को एचआरए (हाउस रेंट अलावेंस) पर टैक्स छूट लेने के लिए कर्मचारियों को प्रमाणपत्र देना होगा। वित्त वर्ष में एक लाख रुपये से अधिक किराया देने वाले कर्मचारियों को इस फॉर्म में अपने मकान मालिक का नाम, पता और पैन (पर्मानेंट अकाउंट नंबर) देना होगा। मकान मालिक के पैन से आयकर विभाग के अधिकारी ये सुनिश्चित करेंगे को उसने अपने आयकर रिटर्न में किराए की जानकारी दी है या नहीं।

होम लोन लेने वालों को नए फॉर्म में उधार देने वाले की जानकारी देनी होगी। आयकर के सेक्शन 80-सी के तहत सभी करदाताओं को कर की सीमा में आने वाली आय में डेढ़ लाख रुपये तक की पीपीएफ, जीवन बीमा, बच्चों की ट्यूशन फीस, घर के लिए लोन, कर्मचारी द्वारा दिए जाने वाले पीएफ इत्यादि के तहत की गई बचत पर टैक्स छूट मिलती है।

सेक्शन 80-ई के तहत उच्च शिक्षा के लिए गए लोन पर ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। अगर घर की कीमत 50 लाख रुपये से कम और होम लोन 35 लाख रुपये से कम हो साथ ही खरीदार अपना पहला घर खरीद रहा है तो उसे होम लोन पर मिलने वाली दो लाख रुपये तक की छूट के अतिरिक्त 50 हजार रुपये पर छूट सेक्शन 80-ईई के तहत मिलती है।

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