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हार्ट ऑफ एशिया: नरेंद्र मोदी-अशरफ़ ग़नी के बीच द्विपक्षीय वार्ता, व्यापार और सुरक्षा साझेदारी पर चर्चा

माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच मालवाहक विमान सेवा के लिए समझौते की बात भी वार्ता के दौरान उठी है।
Author अमृतसर | December 4, 2016 13:50 pm
अमृतसर में आयोजित छठे ‘हार्ट ऑफ एशिया’ शिखर सम्मेलन में एक-दूसरे से हाथ मिलाते अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI Photo/4 Dec, 2016)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच रविवार (4 दिसंबर) को द्विपक्षीय वार्ता हुई जिसमें व्यापार और निवेश बढ़ाने, युद्ध से जर्जर देश में भारत की पुनर्निर्माण गतिविधियों और दोनों के बीच रक्षा तथा सुरक्षा साझेदारी मजबूत करने सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच मालवाहक विमान सेवा के लिए समझौते की बात भी वार्ता के दौरान उठी है। इससे भारत अफगानिस्तान में पाकिस्तान के मुकाबले कुछ लाभ की स्थिति में आ जाएगा क्योंकि इस्लामाबाद लगातार उसकी सीमा से ट्रांजिट संपर्क देने से इनकार कर रहा है। अमृतसर में शनिवार (3 दिसंबर) से शुरू हुए हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के लिए गनी शनिवार शाम यहां पहुंचे हैं। बैठक में मोदी ने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारत का समर्थन जारी रखने का आश्वासन गनी को दिया।

सूचनाओं के अनुसार, अफगानिस्तान ने सैन्य हार्डवेयर आपूर्ति बढ़ाने संबंधी मांग भी भारत से की है। करीब दो साल पहले शुरू हुई नाटो बलों की संख्या में कमी लाने की प्रक्रिया के बाद तालिबान के फिर से सिर उठाने के कारण, अफगानिस्तान उससे लड़ने के लिए अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने के प्रयासों में लगा हुआ है। सूत्रों ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान दोनों ही जितनी जल्दी संभव हो विमान मालवाहक सेवा समझौता शुरू करने तथा पहले से तय समझौते में विस्तार करने के इच्छुक हैं। भारत और अफगानिस्तान बेहतर द्विपक्षीय संपर्क परियोजनाओं के विकल्प तलाश रहे हैं। इस वर्ष मई में भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने ईरान के चाहबहार बंदरगाह को मुख्य बिन्दू बनाते हुए एक व्यापार और परिवहन कोरिडोर बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इस लक्ष्य एक ट्रांजिट कोरिडोर विकसित करना है।

चाबहार बंदरगाह का समुद्री-सड़क मार्ग पाकिस्तान को दरकिनार करने के लिहाज से विकसित किया गया है। चीन द्वारा पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह विकसित किए जाने पर भारत की प्रतिक्रिया के रूप में इस रास्ते को देखा जा रहा है। अफगानिस्तान भारत के साथ अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने को इच्छुक है और संकेत मिल रहे हैं कि गनी हथियारों और सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर भारत पर जोर दे रहे हैं। भारत-अफगानिस्तान क बीच किसी प्रकार के करीबी सैन्य संबंधों से पाकिस्तान बहुत नाखुश होगा।

भारत ने चार सैन्य हेलीकॉप्टरों में से चौथा और अंतिम हेलीकॉप्टर पिछले सप्ताह अफगानिस्तान भेजा है। भारत ने अफगानिस्तान के सैकड़ों सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षण दिया है लेकिन वह हथियारों की आपूर्ति को लेकर थोड़ा सतर्क रहता है। भारत इस मामले में पाकिस्तान को उकसाना नहीं चाहता। अफगानिस्तान सोवियत-काल के हेलीकॉप्टरों और मालवाहक विमानों को प्रयोग योग्य बनाने में भी भारत की सहायता चाहता है। फिलहाल ये सभी उड़ान भरने की स्थिति में नहीं हैं। भारत की अफगानिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी है और वह देश की अवसंचरना पुनर्निर्माण में मदद कर रहा है।

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