December 06, 2016

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नया बोर्ड बनाने से नाराज नालंदा यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉर्ज यिओ का इस्‍तीफा, बोले- हमसे पूछा तक नहीं

नालंदा यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉर्ज यिओ ने इस्‍तीफा दे दिया है। यिओ ने शुक्रवार (25 नवंबर) को अपने इस्‍तीफे की जानकारी दी।

नालंदा यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉर्ज यिओ ने इस्‍तीफा दे दिया है।

नालंदा यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉर्ज यिओ ने इस्‍तीफा दे दिया है। यिओ ने शुक्रवार (25 नवंबर) को अपने इस्‍तीफे की जानकारी दी। उन्‍होंने नई गवर्निंग बोर्ड के गठन और इस बारे में उनसे ना तो उनसे सलाह ली गई और ना उन्‍हें इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने को इस्‍तीफे का कारण बताया। यिओ के बयान के अनुसार, ”जब मुझे जुलाई 2015 में चांसलर नियुक्‍त किया गया था तब मुझे कहा गया था कि एक संशोधित एक्‍ट के तहत गवर्निंग बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस पर विदेश मंत्रालय की ओर से मुझ से राय भी मांगी गई थी। संशोधित एक्‍ट आने पर वर्तमान प्रक्रिया की कई कमियों को दूर किया जा सकता था।” उन्‍होंने नए गवर्निंग बोर्ड को उनके व बाकी सदस्‍यों के लिए एक ‘सरप्राइज’ के रूप में बताया।”

यिओ ने आगे कहा, ”नालंदा मेंटर ग्रुप ने इस नियम की कभी सिफारिश ही नहीं की और यह गवर्निंग बोर्ड के गठन का सही तरीका नहीं है। इसी के चलते भारत सरकार ने नालंदा मेंटर ग्रुप से अनुरोध किया था कि जब तक कि एक्‍ट में संशोधन नहीं किया जाता तब तक वह गवर्निंग बोर्ड के रूप में काम करता रहे। अब सरकार ने बिना एक्‍ट में संशोधन किए तुरंत प्रभाव से नए गवर्निंग बोर्ड के गठन का फैसला कर लिया। इसका कारण मुझे समझ नहीं आया। निसंदेह यह भारत सरकार का विशेषाधिकार है। लेकिन नालंदा यूनिवर्सिटी में जिस तरह से अचानक से नेतृत्‍व को बदला गया है वह परेशान करने वाला है और विश्‍वविद्यालय के विकास के लिए नुकसान कर सकता है। यह बात मुझे परेशान कर रही है कि एक चांसलर के रूप में मुझे इस का नोटिस भी क्‍यों नहीं दिया गया। पिछले साल जब मुझे अमर्त्‍य सेन से जिम्‍मेदारी लेने को बुलाया गया था तो मुझे बार-बार भरोसा दिलाया गया था कि यूनिवर्सिटी की स्‍वायतत्‍ता रहेगी। लेकिन अब ऐसा नहीं लगता है।”

इससे पहले नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को नालंदा यूनिवर्सिटी के बोर्ड में जगह नहीं दी गई थी। वह यूनिवर्सिटी के चांसलर, गवर्निंग बोर्ड के मेंबर रह चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में सेन ने मोदी सरकार के खिलाफ काफी कुछ कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के बाद फरवरी 2015 में चांसलर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद वह गवर्निंग बॉडी के सदस्य रहे। उन्हें 2007 में मनमोहन सरकार द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी का पुनः प्रवर्तन करने के बाद नालंदा मेंटर ग्रुप (NMG) का सदस्य बनाया गया था। सेन के अलावा हॉवर्ड के पूर्व प्रोफेसर और टीएमसी सांसद सुगता बोस और यूके के अर्थशास्त्री मेघनाथ देसाई को भी नए बोर्ड में जगह नहीं मिली है।

 

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First Published on November 25, 2016 1:08 pm

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