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नजीब जंग ने अरविंद केजरीवाल को फाइलों संबंधी आदेश वापस लेने को कहा

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच जारी शीतयुद्ध और गहरा हो गया जब रविवार को उपराज्यपाल सचिवालय को एक चिट्ठी भेजकर दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों को विभिन्न मुद्दों की फाइलें उनको रेफर करने के सख्त निर्देश जारी किए।
Author May 4, 2015 15:34 pm
सीएम के नए फरमान के बाद केजरीवाल- नजीब जंग से ठनी (फोटो: भाषा)

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच जारी शीतयुद्ध और गहरा हो गया जब रविवार को उपराज्यपाल सचिवालय को एक चिट्ठी भेजकर दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों को विभिन्न मुद्दों की फाइलें उनको रेफर करने के सख्त निर्देश जारी किए।

सचिवालय ने अफसरों और मंत्रियों को याद दिलाया कि संविधान, जीएनसीटीडी कानून और ट्रांजेक्शन आॅफ बिजनेस रूल्स के मुताबिक ऐसा करना जरूरी है। उपराज्यपाल की यह चिट्ठी 29 अप्रैल को केजरीवाल के उस कदम के जवाब में भेजी है जिसमें उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि अब वे उपराज्यपाल के कार्यालय के मार्फत फाइलें उनके पास भेजने के बजाय सीधे भेजें।

संविधान, गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली (जीएनसीटीडी) अधिनियम 1991 और ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स का हवाला देते हुए जंग ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट की भूमिका सिर्फ उनकी सहायता करने और उन्हें सलाह देने की है और उपराज्यपाल स्वविवेक से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। साथ ही जिन मामलों पर विधानसभा कानून बना सकती है, उससे संबंधित फाइलें भी अंतिम मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास आनी चाहिए।

उपराज्यपाल के दफ्तर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री को सूचित किया और उनका ध्यान जीएनसीटीडी अधिनियम 1991 और ट्रांजेक्शन आॅफ बिजनेस रूल्स 1993 की ओर आकर्षित किया जो उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच के रिश्तों को रेखांकित करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अधिकारियों को जारी किए गए आदेश को वापस लेने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे संविधान, जीएनसीटीडी अधिनियम 1991 और ट्रांजेक्शन आॅफ बिजनेस रूल्स 1993 का अक्षरश: पालन करें और कायदे का पालन करते हुए फाइलें पहले उन्हें भेजें।

उपराज्यपाल के इन ताजा निर्देशों पर फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार या उसके किसी नेता ने कोई टिप्पणी नहीं की। मनीष सिसोदिया ने अलबत्ता कहा कि केजरीवाल का आदेश (फाइल संबंधी) सिर्फ सरकार के कामकाज को तेज करने के मकसद से दिया गया था। अफसरों को अपना काम करने की जरूरत है। बस यहां से वहां फाइलें ढोते रहना उनका काम नहीं है। इस मामले को अधिकार क्षेत्र को लेकर लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसा कुछ नहीं है।

केजरीवाल और जंग में इससे पहले भी कई मुद्दों तकरार हो चुकी है। सबसे पहला विवाद विधायकों की पिटाई के मामले को लेकर हुआ। आम आदमी पार्टी के दो विधायकों की दिल्ली पुलिस की ओर से पिटाई किए जाने के मामले की मजिस्ट्रेट से जांच कराए जाने संबंधी मुख्यमंत्री केजरीवाल के आदेश को उपराज्यपाल जंग ने रद्द कर दिया था जिससे राजनिवास व दिल्ली सरकार के बीच रिश्तों में कड़वाहट के संकेत मिले थे। एक बार दोनों के बीच मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर तनातनी थी। केजरीवाल सरकार ने 28 फरवरी को उपराज्यपाल को बताए बिना एसएन सहाय को कार्यवाहक चीफ सेक्रेटरी नियुक्त कर दिया था। इसके बाद जंग ने सहाय को कारण बताओ नोटिस जारी करके उनसे सफाई मांगी थी।

आम आदमी पार्टी की सरकार का अपने पसंद के चीफ सेक्रेटरी को नियुक्त कराने को लेकर केंद्र सरकार से कई दिनों तक टकराव चला था। पर दोनों के बीच टकराव केजरीवाल की 25 फरवरी की उस चिट्ठी से और बढ़ गया जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लिखा था कि पुलिस, पब्लिक आॅर्डर और भूमि की फाइलें मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजी जाए।

जंग ने अप्रैल में दिए अपने जवाब में कहा कि ऐसा करने की उनकी कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। भाजपा को दोबारा सरकार बनाने के निमंत्रण पर भी केजरीवाल ने आपत्ति जताई थी। इसके पहले उपराज्यपाल के तमाम फैसलों को लेकर केजरीवाल ने उन पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।

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