December 03, 2016

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तीन तलाक के सपोर्ट में हस्ताक्षर अभियान मुस्लिम महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश: शाइस्ता अम्बर

आल इंडिय मुस्लिम वीमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्षा शाइस्ता अम्बर ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड का हस्ताक्षर अभियान मुस्लिम महिलाओं को गुमराह कर रहा है।

Author नई दिल्ली | November 6, 2016 17:04 pm
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

आल इंडिया मुस्लिम वीमेन पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश में शरई कानूनों की हिफाजत के लिये चलाये जा रहे हस्ताक्षर अभियान को महिलाओं को ‘गुमराह’ करने वाला करार देते हुए आज कहा कि बेहतर होता, अगर इस मुहिम में इस्तेमाल किये जा रहे दस्तावेज में तलाक के मामलों का हल सिर्फ कुरान शरीफ में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुरूप ही कराने का इरादा भी जाहिर किया जाता। आल इंडिया मुस्लिम वीमेन पर्सनल लॉ  बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने यहां ‘भाषा’ से बातचीत में कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा विधि आयोग की प्रश्नावली के जवाब में देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ  की सुरक्षा के लिये जो हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है वह महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिये नहीं बल्कि उन्हें ‘गुमराह’ करने के लिये है। उन्होंने कहा कि अगर बोर्ड इस बात के लिये हस्ताक्षर अभियान चलाता कि वह कुरान शरीफ में उल्लिखित व्यवस्था को उसकी आत्मा के साथ स्वीकार करता है और उसे एक ही सांस में तीन बार दी गयी तलाक मंजूर नहीं है, साथ ही ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी, तो बेहतर होता।
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शाइस्ता ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं उलमा द्वारा बनाये गये कानून के बजाय कुरान शरीफ में दिये गये प्रावधानों के आधार पर ही तलाक, खुला और हलाला के मसलों को निपटाने की व्यवस्था चाहती हैं। इससे मुस्लिम पर्सनल लॉ  की मूल भावना के साथ कोई छेड़छाड़ भी नहीं होगी। हालांकि उन्होंने तीन तलाक के मसले पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर हलफनामे को वोटों की राजनीति और समाज में बिखराव के मकसद से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि सरकार इसकी आड़ में देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश कर रही है। इसके विरोध में वह आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

मालूम हो कि तीन तलाक के मुद्दे पर केन््रद सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल किये जाने और विधि आयोग द्वारा समान नागरिक संहिता के बारे में राय जानने के लिये पिछले महीने एक प्रश्नावली जारी किये जाने के जवाब में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ  बोर्ड ने पूरे देश में एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इस अभियान में सभी मुस्लिम औरतों और मर्दों से देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ  में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत से इनकार तथा देश में समान नागरिक संहिता नामंजूर होने की घोषणा लिखे दस्तावेज पर दस्तखत कराये जा रहे हैं। विधि आयोग की प्रश्नावली के जवाब में बोर्ड द्वारा जारी किये गये वे दस्तावेज हस्ताक्षरित होने के बाद आयोग को सौंपे जाने हैं।

शाइस्ता ने कहा कि बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को दारूल की शरई अदालतों से इंसाफ नहीं मिल पाता है और अक्सर वे एकपक्षीय फैसलों की शिकार हो जाती हैं। ऐसे में उनके पास अन्य अदालतों में जाने का ही विकल्प बचता है, जब वे ऐसा करती हैं तो इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ  में दखलंदाजी करार दिया जाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ  बोर्ड उन महिलाओं की मजबूरी को समझे और शरई कानूनों को कुरान शरीफ की विभिन्न आयतों में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुरूप संशोधित करे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वीमेन पर्सनल ला बोर्ड यह चाहता है कि महिलाओं को तीन तलाक से आजादी मिले और बाकी पत्नियों से इजाजत लिये बगैर बहुविवाह करने वालों को सजा की व्यवस्था की जाए। महिलाओं को भी ‘खुला’ लेने की पूरी आजादी मिले और उसमें रोड़े ना अटकाए जाएं। शाइस्ता ने कहा कि बोर्ड को चाहिये कि वह तलाक के बाद दर-दर भटकने को मजबूर महिलाओं के लिये एक ‘बैतुल माल’ की व्यवस्था करे, जिससे उन औरतों का भरण-पोषण हो सके।

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First Published on November 6, 2016 5:04 pm

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