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सब कुछ तय लेकिन जनता परिवार के अध्यक्ष ही बने विलय में बाधा

जनता परिवार के विलय में सबसे बड़े बाधक मुलायम सिंह यादव साबित हो रहे हैं जो कि भावी पार्टी समाजवादी जनता दल के नए अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। उनके रवैये के कारण ही बार बार नए दल के गठन का औपचारिक एलान टाला जा रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही तो इसका […]
Author April 12, 2015 09:31 am
मुलायम सिंह यादव के परिवार वाले ही इस प्रस्तावित विलय के विरोध में खड़े हो गए हैं। उनकी दलील है कि राजनीति के इन पिटे हुए मोहरों को साथ लेने से क्या हासिल होगा?

जनता परिवार के विलय में सबसे बड़े बाधक मुलायम सिंह यादव साबित हो रहे हैं जो कि भावी पार्टी समाजवादी जनता दल के नए अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। उनके रवैये के कारण ही बार बार नए दल के गठन का औपचारिक एलान टाला जा रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को पहुंचेगा जो कि किसी भी कीमत पर यह विलय नहीं होने देना चाहती।

पिछले साल चार दिसंबर को नीतीश कुमार के जनता परिवार के छह दलों के साथ आने व मुलायम सिंह यादव को नए दल का अध्यक्ष घोषित कर दिए जाने के बाद भी इसका औपचारिक एलान नहीं हो सका है। इससे ज्यादा हास्यास्पद स्थिति और क्या होगी कि नए दल का नाम, अध्यक्ष, चुनाव चिह्न सब कुछ घोषित हो जाने के बाद भी वह अस्तित्व में नहीं आ पा रहा है। पिछले रविवार पांच अप्रैल को इसका एलान किया जाना तय था। सुबह जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव के घर पर मुलायम सिंह यादव व जनता दल (सेकु) के नेता एचडी देवगौड़ा की बैठक भी हुई पर कोई एलान नहीं हुआ।

मालूम हो कि लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हारने के बाद जनता परिवार के छह दलों राजद, जद (एकी), जनता दल (सेकु), इनेलो, सपा व समाजवादी जनता पार्टी ने एक होने का फैसला किया था। उन्होंने नए दल का नाम समाजवादी जनता दल रखा व मुलायम सिंह यादव को नया अध्यक्ष चुनने के साथ ही उन्हें विलय की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पर अब मुलायम सिंह यादव इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।

उनके करीबी इसके कई कारण बता रहे हैं। बताते हैं कि सबसे बड़ा दबाव उन पर परिवार की ओर से आ रहा है। हाल के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में उनके परिवार के ही पांचों सदस्य जीते थे। वैसे भी सपा में अधिकांश पद परिवार के ही पास हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति बेटे अखिलेश यादव व छोटे भाई शिवपाल के हवाले है तो केंद्र की राजनीति चचेरे भाई रामगोपाल यादव देखते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को जबरदस्त सफलता मिली थी। वहां 2017 में चुनाव होने हैं। बताते हैं कि उनके परिवार की दलील है कि राजनीति के इन लुटे पिटे नेताओं को साथ लेने से क्या हासिल होगा? हमारा हरियाणा में क्या है? कर्नाटक में हम कहां खड़े हैं?

बदले में उन्हें विधानसभा चुनाव में सीटें देनी पड़ सकती हैं। इससे पहले होने वाले राज्यसभा चुनाव में भी ये नेता इन पर नजरें गड़ाए रहेंगे। इनका उत्तर प्रदेश में कोई आधार ही नहीं है और हमारा उसके बाहर नहीं है। वे पूछते हैं कि क्या यह लोग मुलायम सिंह यादव को नए दल का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानने को तैयार होंगे? इसलिए विलय के मसले को वे लगातार यह कह कर टालते आ रहे हैं कि जल्दी क्या है।

वहीं दूसरे दलों के नेता मानते हैं कि वास्तव में जल्दी है। नवंबर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। कुल छह महीने ही बचे हैं। अगर विलय नहीं हुआ तो उसका सीधा फायदा भाजपा को होगा जो कि यह समझ चुकी है कि उसके लिए यह एका कितना खतरनाक साबित हो सकता है। जहां एक ओर संघ चाहता है कि किसी तरह से नीतीश कुमार के साथ नाता जोड़ा जाए वहीं पार्टी जीतनराम मांझी को भी हवा दे रही है। इसकी उचित वजह भी है।

लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 में से 31 सीटें के बावजूद भाजपा को मिले वोट लालू व नीतीश को मिले साझा वोटों से कहीं कम थे। इसके बावजूद इन दोनों दलों को कुल मिलाकर छह सीटें ही मिल पाईं। कांग्रेस 8.4 फीसद वोट व दो सीटोें जीतने में सफल रही थी। लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद होने वाले विधानसभा उपचुनावों में जहां जनता परिवार व कांग्रेस मिल कर लड़े तो सभी 10 सीटों पर भाजपा का सफाया हो गया।

इसलिए आगामी बिहार विधानसभा चुनावों तक मोदी का जादू भी बहुत कुछ उतर चुका होगा। उस हालत में अगर यह एका हो जाता है तो भाजपा के लिए मुश्किल तय है। जनता पविार के एक प्रमुख घटक के अनुसार लालू यादव के राजद में भी सब कुछ ठीक नहीं है। परिवारवाद को लेकर लालू हाल ही में पप्पू यादव से यह कह चुके हैं कि उनका उत्तराधिकारी तो उनका बेटा ही होगा। उनके दल के जगदानंद सिंह, रघुवंश प्रसाद सिंह और पप्पू यादव सरीखे नेता नीतीश कुमार के साथ जातीय समीकरणों के चलते नहीं जाना चाहते हैं।

 

विवेक सक्सेना

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  1. प्रसाद पाण्डेय
    May 2, 2015 at 1:59 pm
    क्या है १० में से ४ जीती थी भाजपा उपचुनावों में तथ्यों के साथ लिखिए
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग