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जम्मू कश्मीर में बनी दो ध्रुवों की सरकार

पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद को रविवार को जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। वे भाजपा के साथ मिलकर बनाई गई गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उधर, सरकार में शामिल हुई भाजपा ने अपने पुराने रुख से हटते हुए अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति बनाए रखने का वादा किया है। […]
Author March 2, 2015 09:28 am
Jammu Kashmir मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि विस्थापित समुदाय के लिए अलग से बस्तियां नहीं बसाई जाएंगी (फाइल फ़ोटो-पीटीआई)

पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद को रविवार को जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। वे भाजपा के साथ मिलकर बनाई गई गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उधर, सरकार में शामिल हुई भाजपा ने अपने पुराने रुख से हटते हुए अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति बनाए रखने का वादा किया है।

राज्य में नई सरकार बनने के साथ 49 दिन के राज्यपाल शासन का समापन हुआ। रविवार को राज्यपाल एनएन वोहरा ने सईद के साथ उनकी सरकार के 24 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। अलगाववादी से सक्रिय राजनीति में आए सज्जाद लोन ने भाजपा कोटे से कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। सईद के बाद भाजपा के निर्मल सिंह ने शपथ ली। वे राज्य के उपमुख्यमंत्री होंगे। यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर में भाजपा किसी सरकार का हिस्सा बनी है।

समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, पार्टी महासचिव राम माधव और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भाग लिया। भाजपा के निर्मल सिंह राज्य के नए उपमुख्यमंत्री होंगे। सईद के बाद दूसरे नंबर पर उन्होंने शपथ ली। कुल मिलाकर पीडीपी से सईद समेत 13 और भाजपा और पीपुल्स कांफ्रेंस गठजोड़ के 12 विधायकों को मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण समारोह जम्मू विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह आॅडिटोरियम में हुआ।

सिंह के साथ पत्रकार सम्मेलन में सईद ने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को उद्धृत करते हुए कहा, ‘जब विरोधाभास हों तो भी असंभव को संभव बनाने की कला राजनीति है’। इससे पहले दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना पर सईद ने ‘उत्तरी धु्रव और दक्षिण धु्रव’ का मिलना करार दिया था।

शपथ लेने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने रविवार को यह कहकर विवाद पैदा कर दिया कि हुर्रियत, आतंकवादी संगठनों और ‘सीमा पार के लोगों’ ने विधानसभा चुनावों के लिए बेहतर माहौल बनाया । उनका परोक्ष इशारा पाकिस्तान की तरफ था जिसकी नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा से रुख स्पष्ट करने को कहा। सईद ने जम्मू में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पत्रकार सम्मेलन में कहा कि मैं ऑन रिकॉर्ड कहना चाहता हूं और मैंने प्रधानमंत्री से कहा है कि राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए हमें हुर्रियत, आतंकवादी संगठनों को श्रेय देना चाहिए।

भाजपा की तरफ से उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह और नए कैबिनेट मंत्री हसीब द्राबू के साथ पत्रकार सम्मेलन में सईद ने कहा कि अगर उन्होंने (आतंकवादियों ने) कुछ किया है तो भगवान माफ करे । ठीक तरीके से चुनाव कराना संभव नहीं हो पाता।

शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शरीक हुए। उन्होंने सईद और उनकी नई टीम को बधाई देते हुए कहा कि पीडीपी-भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर की जनता को आकांक्षाएं पूरी करने और राज्य को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का ऐतिहासिक अवसर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस के साथ कांग्रेस के अनेक नेताओं और विधायकों ने शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार किया। हालांकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज ने जम्मू विश्वविद्यालय के जोरावर सभागार में आयोजित समारोह में भाग लिया।

सईद और सिंह ने समारोह के बाद साझा पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने वहां 16 पन्नों का ‘एजंडा ऑफ द अलायंस’ जारी किया जिसमें दोनों दलों ने अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति बनाये रखने की सहमति जताई है। इसमें कहा गया है कि विशेष दर्जा समेत सभी संवैधानिक प्रावधानों पर यथास्थिति रखी जाएगी। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय एजंडे में इस अनुच्छेद को खत्म करने की बात है।

गठबंधन सरकार के एजंडा दस्तावेज के अनुसार, ‘पीडीपी और भाजपा ने सहमति और एजंडे के आधार पर गठबंधन में सरकार बनाई है। यह एजंडा जम्मू कश्मीर पर राष्ट्रीय सुलह बनाने की दिशा में प्रयास है। इसमें कहा गया कि अलग-अलग रुखों को स्वीकार करने और धारणाओं को सराहने के साथ भाजपा व पीडीपी ने राजनीतिक व विधायी हकीकतों को देखते हुए सहमति जताई है कि जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जे सहित सभी संवैधानिक प्रावधानों पर मौजूदा स्थिति बरकरार रखी जाएगी।

पीडीपी-भाजपा सरकार ने अफ्सपा के संदर्भ में अशांत इलाकों को गैर अधिसूचित करने की जरूरत पर विचार करने का वादा किया है। लेकिन एजंडे में इस विवादास्पद कानून को हटाने के संबंध में कोई समय-सीमा नहीं बताई गई है। दस्तावेज में कहा गया है-इस संदर्भ में गठबंधन सरकार राज्य में इसे लेकर गौर करने के विचार के साथ सुरक्षा हालात की गहन समीक्षा करेगी कि सुरक्षा हालात सुधरने के मद्देनजर राज्य में लागू सभी विशेष कानूनों की वांछनीयता की जरूरत है।

पीडीपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अशांत क्षेत्रों की अधिसूचना से जुड़े मुद्दों पर नए सिरे से अध्ययन की बात कही थी ताकि अफस्पा को वापस लेने का रास्ता साफ हो सके, हालांकि भाजपा इस तरह के कदम के खिलाफ रही है। राज्य के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर सईद के शपथग्रहण के साथ राज्य में उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफे के बाद लगे राज्यपाल शासन के 49 दिन का अंत हो गया।

मुफ्ती मोहम्मद सईद इससे पहले जनवरी 2002 से तीन साल तक पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री रहे थे। रविवार को मंत्री पद की शपथ लेने वालों में पीडीपी के अब्दुल रहमान वीरी, हसीब द्राबू, नईम अख्तर, बशरत बुखारी और भाजपा की ओर से लाल सिंह, चंद्र प्रकाश, सुखनंदन चौधरी और बली भगत शामिल हैं। मंत्रिपरिषद में दो महिला विधायक भी हैं। इनमें भाजपा की प्रिया सेठी और पीडीपी की आसिया नक्काश हैं।

विधानसभा चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस से भाजपा में आए लाल सिंह ने डोगरी भाषा में शपथ ली। अलगाववादी से सक्रिय राजनीति में आकर नेता बने सज्जाद गनी लोन ने भाजपा कोटे से कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। शपथग्रहण के बाद प्रधानमंत्री ने सज्जाद को गले लगाया। प्रधानमंत्री मोदी ने पीडीपी विधायक हसीब द्राबू का भी मुस्कुराकर अभिनंदन किया और उन्हें गले लगाया जिन्होंने गठबंधन बनाने में और न्यूनतम साझा कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में अपनी पार्टी की ओर से मुख्य भूमिका निभाई। इसके दस्तावेज में कहा गया है-पीडीपी और भाजपा उस समझौते और एजंडे पर आधारित गठबंधन में शामिल हुए हैं जो जम्मू-कश्मीर पर राष्ट्रीय सुलह की दिशा में एक प्रयास है। सरकार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से 1947, 1965 और 1971 के दौरान आए पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों की आजीविका व पुनर्वास के लिए कदम उठाएगी।

मुफ्ती मोहम्मद सईद से पत्रकार सम्मेलन में पूछा गया कि क्या वे अफस्पा हटाने पर किसी तरह की सहमति नहीं होने पर असंतुष्ट हैं तो उन्होंने कहा कि मैं निराश नहीं हूं। मुख्यमंत्री के रूप में मैं यूनाइटेड कमांड का अध्यक्ष हूं। मैं उन्हें जवाबदेह बनाऊंगा। मुझे मालूम है, कैसे माहौल को बनाना है।

विरोधाभासों की सरकार

मुफ्ती मोहम्मद सईद ने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को उद्धृत करते हुए कहा-जब विरोधाभास हों तो भी असंभव को संभव बनाने की कला राजनीति है’। इससे पहले दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना पर सईद ने ‘उत्तरी धु्रव और दक्षिण धु्रव’ का मिलना करार दिया था। अफस्पा मामले पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में मैं यूनाइटेड कमांड का अध्यक्ष हूं। मैं उन्हें जवाबदेह बनाऊंगा। मुझे मालूम है, कैसे माहौल बनाना है।
370 पर यथास्थिति की सहमति

सईद और सिंह ने समारोह के बाद साझा पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने 16 पन्नों का ‘एजंडा आॅफ द अलायंस’ जारी किया जिसमें दोनों दलों ने अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति बनाए रखने की सहमति जताई है। इसमें कहा गया है कि विशेष दर्जा समेत सभी संवैधानिक प्रावधानों पर यथास्थिति रखी जाएगी। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय एजंडे में इस अनुच्छेद को खत्म करने की बात है।

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