December 05, 2016

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रद्दी न बन जाएं थानों में रखे अरबों के नोट

ऐसे मामले में आरोपी को सजा होने के बाद यह धनराशि सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती है।

Author नई दिल्ली | November 13, 2016 04:35 am
फोटो का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर किया गया है।

500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य करने के सरकार के फैसले के बाद चिंता यह है कि देश भर के थानों में जब्त किए हुए नोट कहीं रद्दी न बन जाएं। यह राशि अरबों में हो सकती है। यदि जल्द इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पीड़ितों को रुपए की जगह रद्दी के टुकड़े ही मिलेंगे। फिलहाल, अधिकारी इस समस्या से निबटने के लिए गंभीरता से विचार कर रहे हैं।  हजार और पांच सौ रुपए के नोटों का चलन बाजार में बंद होने के बाद सरकारी विभागों के कब्जे में मौजूद बरामद धनराशि का क्या होगा? इसे लेकर सवाल खड़ा हो गया है।

माना जा रहा है कि इसमें भारी संख्या में हजार और पांच सौ के नोट भी हैं। इस बारे में बात करने पर दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा- ऐसे मामले में अदालत तय करती है कि इस धनराशि का क्या होगा। ऐसे मामले में आरोपी को सजा होने के बाद यह धनराशि सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती है। एक अन्य अधिकारी ने कहा- यह नोट भी सरकारी खजाने का हिस्सा बन सकते हैं। हजार और पांच सौ रुपए के नोटों का चलन बाजार में बंद होने के बाद सरकार के पास आए बाकी नोटों का जो होगा वहीं इस नोट का भी हो सकता है। सरकार इतने मूल्य के नए नोट खुद बदल भी सकती है या इसे रद्द भी कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा उन्होंने कहा-नई व्यवस्था में चलन से बाहर हुए वो नोट जो मालखाने में मौजूद नोटों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश देने की जरूरत होगी।

जानकारी के मुताबिक, अकेले आगरा के हरीपर्वत थाने के मालखाने में ही कम से कम 25 लाख रुपए रखे हैं, जो बदमाशों से बरामद किए गए हैं। इसी तरह खंदौली और एत्मादपुर थानों के मालखानों में 20-20 लाख से ज्यादा की रकम पड़ी है। इसमें ज्यादातर 500 और एक हजार के नोट हैं। अकेले आगरा जिले में कुल 42 थाने हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इनमें दस करोड़ से ज्यादा की रकम जमा है।  यही हाल पूरे देश का है। आंकड़ों के मुताबिक देश में 2009 में 12806 थाने थे। अब इनकी संख्या और भी हो सकती है और इस हिसाब से इनके पास मौजूद राशि अरबों में हो सकती है। 2012 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 1504 थाने थे जबकि दिल्ली में 184 थाने हैं।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक किसी मुकदमे से संबंधित रकम आरोपी से बरामद होने पर उसे सील लगाकर जब्त किया जाता है। इसे थाने के मालखाने में रखा किया जाता है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मालखाना प्रभारी पर होती है। इस रकम को केस प्रापर्टी के रूप में रखा जाता है और इसे सबूत के तौर पर अदालत में रखा जाता है। अदालत के आदेश पर ही इसे पीड़ित के सुपुर्द किया जाता है। कई मामले में इस पर निर्णय केस के निस्तारण के समय होता है। अब सबसे ज्यादा मुश्किल उन लोगों को होने वाली है जिनकी रकम थानों के मालखाने में है। बड़ी मुश्किल से तो बदमाशों से पुलिस ने बरामद की थी। उम्मीद थी कि कभी न कभी मिल ही जाएगी लेकिन अब तो हालात ऐसे हैं कि नोट नहीं, रद्दी मिलेगी।इस समस्या पर आगरा परिक्षेत्र के आइजी सुजीत पांडे का कहना है कि इस पर विचार चल रहा है। जल्द ही कोई समाधान निकाल लिया जाएगा। मालखानों में जमा रकम केस प्रापर्टी है। इस पर शासन से भी निर्देश लिया जा रहा है।

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First Published on November 13, 2016 4:30 am

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