December 05, 2016

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देशभर में मिलेगा ₹ 2 किलो गेहूं और ₹ 3 किलो चावल, जानिए नरेंद्र मोदी सरकार के खाद्य सुरक्षा एक्ट के बारे में

केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के मुताबिक, सरकार हर साल 1.4 लाख करोड़ रुपए खाद्य सब्सिडी पर खर्च करेगी।

एक नवंबर से यह स्कीम पूरे देश में लागू हो गई है।

सरकार ने गुरुवार को कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे दो बाकी बचे दो बड़े राज्यों के शामिल होने के साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून इस महीने से पूरे देश में लागू हो गया है। देश की करीब तीन चौथाई आबादी को बहुत सस्ती दर पर हर माह निश्चित मात्रा में अनाज की कानूनी गारंटी वाले इस कार्यक्रम पर सरकार सालाना 1.4 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी दे रही है। अब देश के 36 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के कम से कम 80 करोड़ लोग इस कानून के दायरे में आ गए हैं। इस कानून के तहत 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो चावल दिए जाएंगे।

खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘जब हम सत्ता में आए तब खाद्य कानून केवल 11 राज्यों में लागू था। मुझे इस बात की खुशी है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि केवल दो राज्य, केरल और तमिलनाडु छूट गए थे और उन्होंने भी नवंबर से इसे लागू कर दिया है। इस कानून को वर्ष 2013 में पारित किया गया था। इसके तहत 50 फीसद शहरी और 75 फीसदी ग्रामीण इलाकों को कवर किया जाएगा। सब्सिडी खर्च के बारे में पासवान ने कहा, ‘यह करीब 11,726 करोड़ रुपए प्रति माह या करीब 1,40,700 करोड़ रुपए वार्षिक बैठेगा। इस कानून के तहत 80 करोड़ लोगों को इसके दायरे में लिया गया है। इस कानून के तहत अति सब्सिडी प्राप्त खाद्यान्नों को प्राप्त करने की कानूनी अर्हता का अब 80 करोड़ लोगों तक विस्तार हुआ है जबकि इस कानून के दायरे मे कुल 81.34 करोड़ लोगों को लाने का लक्ष्य रहा है।’

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कानून के दायरे में आने वाले मौजूदा संख्या को देखते हुए कानून के तहत राज्यों- केन्द्र शासित प्रदेशों को मासिक खाद्यान्न आवंटन करीब 45.5 लाख टन का है। पासवान ने कहा कि केंद्र सरकार ने जब केरल और तमिलनाडु को गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वाले (एपीएल) परिवारों को एमएसपी की दर पर खाद्यान्न आपूर्ति करने का कठोर फैसला किया तो इन राज्य की सरकारों ने इस कानून को लागू करने का फैसला किया। राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों को इस कानून को लागू करने के लिए जोर देते हुए पासवान ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के कामकाज में सुधार लाने और गड़बड़ियों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने अभी तक 71 प्रतिशत राशन कार्डो को आधार कार्ड से संबद्ध किया है और बाकी को भी जल्द से जल्द किया जायेगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों में 2.62 करोड़ राशन कार्ड निरस्त हुए हैं। उन्होंने कहा, अनाज डीलरों के दरवाजे पर भेजा जा रहा है। डीलरों के मार्जिन को बढ़ाया गया है। हम शुरू से अंत तक जोड़ने के लिए कंप्यूटरीकरण का काम कर रहे हैं। पीडीएस के सुचारू संचालन के लिए केंद्र राज्यों को किए जाने वाले परिवहन और अनाजों की देखरेख तथा डीलर के मार्जिन के खर्च को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। मंत्री ने कहा कि सरकार चंडीगढ़, पांडिचेरी और दादर एवं नागर हवेली के शहरी इलाकों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को लागू कर रही है।

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First Published on November 3, 2016 4:10 pm

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