December 08, 2016

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सिंधु बेसिन में सिंचाई प्रोजेक्ट को तेज़ करेगी मोदी सरकार, पाकिस्तान से चल रहा है तनाव

नरेन्द्र मोदी ने 56 वर्ष पुरानी सिंधु जल संधि की समीक्षा की थी और इस बात पर जोर दिया था कि पानी और खून साथ साथ नहीं बह सकते।

Author नई दिल्ली | October 23, 2016 21:25 pm
भारत से पाकिस्तान की ओर जाने वाली सिंधु नदी (फोटो-PTI)

भारत और पाकिस्तान के बीव बढ़ते तनाव के बीच सरकार सिंधु नदी बेसिन में चार परियोजनाओं के कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि जम्मू कश्मीर के इस क्षेत्र में करीब 2.05 लाख एकड़ भूमी की सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। कुछ सप्ताह पहले भारत ने सिंधु जल संधि के तहत झेलम समेत पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों के ‘अधिकतम जल का दोहन’ करने का निर्णय किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उरी आतंकी हमले के बाद पिछले महीने अपनी अध्यक्षता में 56 वर्ष पुरानी सिंधु जल संधि की समीक्षा की थी और इस बात पर जोर दिया था कि पानी और खून साथ साथ नहीं बह सकते।

इन चार परियोजनाओं में पुलवामा में त्राल सिंचाई परियोजना, कारगिल में पराकचिक खोउ बांध परियोजना, कठुआ और सांबा में रावी बांध को बहाल करने और इसके आधुनिकीकरण की परियोजना शामिल है। चौथी परियोजना राजपुरा में लिफ्ट सिंचाई संबंधी है जिसे दिसंबर 2019 तक पूरा किए जाने की योजना है। पहली तीन परियोजनाओं से करीब 1.45 लाख एकड़ भूमि को सिंचित करने में मदद मिलेगी। राजपुरा लिफ्ट सिंचाई परियोजना से 59,305 एकड़ भूमि की सिंचाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इन सभी कार्यो पर 117 करोड़ रूपये लागत आने की उम्मीद है जिसके लिए धन राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से प्राप्त की जाएगी।

सूत्रों ने बताया, ‘जम्मू कश्मीर के रिकार्ड के अनुसार अब तक सात लाख एकड़ भूमि सिंचित है। यह काफी कम मात्रा है। इसलिए सरकार इन परियोजनाओं के माध्यम राज्य में कुल सिंचित क्षेत्र का दायरा बढ़ाने का प्रयास कर रही है।’ सूत्रों ने बताया कि तकनीकी तौर पर भारत जम्मू कश्मीर में 13 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई कर सकता है। इस लक्ष्य को राज्य में कुल भंडारण क्षमता को अधिकतम रूप में हासिल करके पूरी की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि इन परियोनाओं को भारत के अधिकार के दायरे में आगे बढ़ाया जा रहा है और इसके कारण पाकिस्तान में जल का प्रवाह किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों द्वारा उरी हमले के बाद सख्त रूख अख्तियार करते हुए सरकार ने 27 सितंबर को पाकिस्तान की ओर बह रही नदियों सिंधु, चेनाब और झेलम के अधिकतम जल का दोहन करने का निर्णय किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सिंधु जल संधि की समीक्षा की गई थी।

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First Published on October 23, 2016 9:25 pm

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