December 05, 2016

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बड़े नोट बंद करने के फैसले को कुछ ने सराहा तो कुछ ने की निंदा

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला ‘नैतिक, राजनीतिक और वित्तीय’ रूप से साहसिक है।

Author नई दिल्ली | November 10, 2016 04:55 am
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी 2000 का नया नोट। (फोटो- ट्विटर)

केंद्र सरकार के 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों का चलन बंद करने के निर्णय को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। कई मुख्यमंत्रियों व नेताओं ने स्वागत करते हुए इसे साहसिक कदम करार दिया है। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एआइएमआइएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र के निर्णय की निंदा करते हुए कहा कि हड़बड़ी में लिए इस निर्णय को वापस लिया जाए।  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत व समर्थन करते हुए बुधवार को कहा कि शुरुआती दौर में लोगों को थोड़ी परेशानी होगी लेकिन कुल मिलाकर इसका लाभ ही होगा।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला ‘नैतिक, राजनीतिक और वित्तीय’ रूप से साहसिक है। यह भ्रष्ट और खतरनाक लोगों, संगठनों और माफिया के खिलाफ निर्णायक कदम है जिन्होंने भ्रष्टाचार और कालेधन के माध्यम से देश और जनता को नुकसान पहुंचाया है।’ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, ‘यह काले धन पर हमला करने के लिए देश के हित में प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया साहसिक कदम है।’ ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, ‘काले धन पर लगाम लगाने के लिए बड़े मूल्य वाले नोटों को अमान्य करार देने का मुद्दा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को दिए गए सुझावों में काफी लंबे समय से शामिल था। मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने इसे लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई है।

500 और 1000 रुपए के नोट बंद- मोदी सरकार के फैसले पर क्‍या सोचती है जनता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने ट्वीट कर कहा, ‘हम 500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य करने के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे काले धन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगेगी।’ आध्यात्मिक गुरु व आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि इससे भ्रष्टाचार और कालाधन पर रोक लगेगी और केवल उन लोगों पर असर पड़ेगा जिन्होंने अवैध तरीके से पैसा जमा किया है। उधर मोदी सरकार के निर्णय की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आलोचना की। ममता ने बुधवार को बयान में कहा, ‘कृपया लोगों को इस आपदा से बचाइए। सड़कें बंद हैं, बाजार बंद हैं, निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। हर जगह अफरातफरी है। निर्धन से निर्धन और मध्य वर्ग में चीख पुकार मच गई है।

यह अखिल भारतीय अघोषित हड़ताल है। बड़े पैमाने पर जिन लोगों ने काले धन की रकम जमा कर रखी है, उन्हें संरक्षण मिलेगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैं एक बार फिर सरकार से हड़बड़ी में लिए गए इस फैसले को वापस लेने की अपील करती हूं।  मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने इस कदम को ‘असंवेदनशील’ करार दिया है। मुकुल ने कहा, ‘हम क्या करते हैं और कैसे करते हैं, यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। हो सकता है कि यह वृहद स्तर परहित में हो लेकिन जिस तरह से इसे लागू किया जा रहा है, उससे इनके विचारों का दिवालियापन ही दिखता है।’ उन्होंने कहा, ‘125 करोड़ वाले इस देश में कितने लोग टेलिविजन से चिपके रहते हैंऔर सोशल मीडिया या इंटरनेट का उपयोग करते हैं। वो कैसे जानेंगे कि 500 और 1000 के नोट अब अमान्य हैं?उन छात्रों के साथ क्या होगा जो अभी यात्रा कर रहे होंगे? सभी लोग प्लास्टिक रुपए का उपयोग नहीं करते हैं।’

 

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First Published on November 10, 2016 4:55 am

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