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कॉर्पोरेट स्‍टाइल में काम करेगी मोदी सरकार, मंत्रालयों, सरकारी विभागों को चुकाना होगा इमारतों का किराया

इसके अलावा उन्हें पानी और बिजली का बिल भी देना होगा।
अधिकारियों ने बताया कि यह सब दुर्लभ संसाधनो की बर्बादी को रोकने के लिए किया जा रहा है। (PHOTO: Indian Express)

लोग घर का किराया देते हैं। ऑफिस का किराया देते हैं। क्या कभी आपने सुना है कि मंत्रालय भी किराया देते हैं। जी हां अब मोदी सरकार एक नया नियम लाने वाली है। इसमें सभी केंद्रीय मंत्रालय और विभागों को अपने ऑफिस का किराया देना होगा। अर्बन डिवेलपमेंट मिनिस्ट्री ने जिस मंत्रालय और विभाग को जितना एरिया आवंटित किया है उसे उसका किराया देना होगा। इसके अलावा उन्हें पानी और बिजली का बिल भी देना होगा। यह सब खर्चे अभी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) वहन करता है। इन बिल्डिंगों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सीपीडब्ल्यूडी की ही है। शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह सब दुर्लभ संसाधनो की बर्बादी को रोकने के लिए किया जा रहा है। यह काम करने की नई कॉर्पोरेट शैली एक अप्रैल से लागू हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए जल्द ही सर्कुलर जारी कर दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि यह सरकार के कामकाज करने के तरीके में बड़ा परिवर्तन है जिस पर पीएम मोदी जोर दे रहे हैं।

मंत्रालय और विभाग शहरी विकास मंत्रालय को को हर महीने 24 से लेकर 36 रुपये प्रति स्क्वॉयर फीट के हिसाब से किराया देंगे। इसमें एसी और सामान्य दोनों तरह के एरिया शामिल हैं। मंत्रालय और विभाग को जितना एरिया आवंटित होगा उसे उतने एरिया का किराया देना होगा। इस नियम के अंतर्गत निर्माण भवन, उद्योग भवन, साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक, कृषि भवन, रेल भवन और परिवहन भवन सहित कई भवनों को शामिल किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि किराया हालांकि सरकार में वापस आ जाएगा, इस पहल के पीछे का आइडिया यह सुनिश्चित करना है कि हर विभाग पूरी तरह से उसे मिली जगह का उपयोग करता है या नहीं करता है। वे जगह और बिजली दोनों का सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं। उन्हें अपने बजट में किराए और बिजली का बिल शामिल करना होगा और वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे। फिर वे बजट में किराए के लिए फंड की तलाश करेंगे। पिछले कई उदाहरण हैं कि कैसे अलग-अलग विभागों और मंत्रालय को नए ऑफिस बनाकर दे दिए गए हैं लेकिन वह अभी भी पुराने ऑफिसों को नहीं छोड़ रहे हैं। अनुमान के मुताबिक, शहरी विकास मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत अभी दिल्ली में करीब 72 लाख वर्ग फुट का एरिया है। अभी सरकारी कार्यालय के लिए और 28 लाख वर्ग फुट एरिया की मांग की जा रही है।

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