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अखिलेश यादव देखिए, ये हैं देश के लिए शहीद होने वाले गुजरात के जवान

आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ते हुए गुजरात से ताल्लुक रखने वाले 20 जवानों ने कुर्बानी दी है। जबकि 24 जवान भारत की सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। (Photo Source-PTI)

गुजरात से शहीद जवानों की संख्या पूछने वाले अखिलेश यादव को गुजरात के शहीद जवानों के परिवार वालों ने जवाब दिया है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के बयान ले वो काफी आहत हैं। 1999 में करगिल युद्ध में शहीद होने वाले मुकेश राठौड की पत्नी राजश्री का कहना है कि एसपी नेता अखिलेश का बयान दिल दुखाने वाला है। राजश्री ने कहा कि शहीद किसी एक राज्य के नहीं होते हैं उनकी कुर्बानी पूरे देश की कुर्बानी होती है। मुकेश राठौड की मां का कहना है कि देश के लिए बेटे को खोने का दर्द क्या होता है ये अखिलेश नहीं समझ पाएंगे।

बता दें कि आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ते हुए गुजरात से ताल्लुक रखने वाले 20 जवानों ने कुर्बानी दी है। जबकि 24 जवान भारत की सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं। 1987 में सियाचीन ग्लेशियर में पाकिस्तानी जवानों से जंग में शहीद हुए कैप्टन नीलेश सोनी के परिवार वाले भी अखिलेश यादव के इन आरोपों से खफा हैं। नीलेश सोनी के भाई जगदीश सोनी का कहना है कि शायद अखिलेश गुजरात के बारे में नहीं जानते हैं फिर भी उन्हें ऐसी ओछी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। इसी तरह शहीद मेजर रुषीकेश रमानी ने कुपवाड़ा आतंकियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी थी। इसी साल गुजरात के ही लॉन्स नायक गोपाल सिंह भरदोरिया ने आतंकियों के साथ भीषण जंग में शहीद हुए थे। गोपाल के पिता मुनीम सिंह कहते हैं कि अखिलेश जी को यूपी की जनता से सत्ता से बाहर कर दिया है, लेकिन वे मर्यादा भूल गये हैं, वे देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2017 को गुजरात में 26, 656 एक्स आर्मी थे। गुजरात के 39 जवानों को देश ने बहादुरी के लिए सम्मानित किया है। इन जवानों ने देश की रक्षा के लिए मुश्किल हालात में अदम्य साहस का परिचय दिया था। 2007 में सेना से रिटायर होने वाले कैप्टन आलाप देसाई कहते हैं कि गुजरात के लोगों का सेना में प्रतिनिधित्व कम है इस बात से वे भी वाकिफ हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने इस बात को बेहद गलत तरीके से दुनिया के सामने पेश किया। सेना में गुजरात के कम प्रतिनिधित्व की वजह माइंडसेट और स्थानीय संस्कृति है।

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  1. S
    Sujit Singh
    May 11, 2017 at 3:28 pm
    mai won netawo se puchhna chahta hu jo apne aap ko bahut bada samaj aur desh sewak batate hai, lekin jab border pr watan ke liye kurban hone ki naoubat aati hai to to ek garib ghar ka beta hota hai, kisi neta ka beta nhi, kyo............................? Kyouki neta aur neta ka beta border pr desh ke liye ladne jaye ga to waha malai nhi dusman ka milega khane ke liye, esi liye ek neta ka beta anpad hote huwe bhi neta banta hai & apne baap ki jagir ko aage badhata hai aur padhe-likhe log woske aage pichhe ghumte rahte hai, yahi aaj desh ki sachchai hai, swarthi kism ke neta ko desh se nhi apne pariwar se matlab hota hai, woska pura pariwar kaise mala-mal ho eske liye liye wo apne jamir tak ko bech dete hai........JAI HIND
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