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रेस्टोरेंट एनकाउंटर: स्पेशल सेल ने ही मनोज वशिष्ठ को बताया था पाक-साफ

न्यू राजेंद्रनगर के एक रेस्टोरेंट में 16 मई की रात कथित मुठभेड़ में मारे जाने से दस दिन पहले मनोज वशिष्ठ ने शहर की एक अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। याचिका के जवाब में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने अदालत को बताया था कि याचिकाकर्ता या अरोपी के खिलाफ न तो कोई एफआइआर दर्ज की गई है और न ही उसके खिलाफ कोई शिकायत मिली है।
Author May 20, 2015 09:36 am
मनोज वशिष्ठ एनकाउंटर : दिल्ली पुलिस के दावे को झुठलाता बागपत का सच

न्यू राजेंद्रनगर के एक रेस्टोरेंट में 16 मई की रात कथित मुठभेड़ में मारे जाने से दस दिन पहले मनोज वशिष्ठ ने शहर की एक अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। याचिका के जवाब में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने अदालत को बताया था कि याचिकाकर्ता या अरोपी के खिलाफ न तो कोई एफआइआर दर्ज की गई है और न ही उसके खिलाफ कोई शिकायत मिली है। पुलिस के इस जवाब के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया था। यह स्पेशल सेल के उस दावे के बिल्कुल उलट है कि वशिष्ठ की धोखाधड़ी के कुछ मामलों में तलाश थी।

दरअसल गिरफ्तारी से बचने के लिए वशिष्ठ ने दो मई को अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। याचिका में वशिष्ठ ने कहा था, ‘मुझे आशंका है कि स्पेशल सेल के अधिकारी झूठे मामलों में उसे फंसा सकते हैं, जबकि याचिकाकर्ता ने कोई अपराध नहीं किया है। याचिकाकर्ता को इस बात की बहुत आशंका है कि उसे कुछ फर्जी मामलों में गिरफ्तार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता को पहले किसी मामले में सजा नहीं हुई है और उसका अतीत साफ-सुथरा रहा है।’

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रीतेश सिंह ने छह मई को उसकी याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा था,‘स्पेशल सेल पुलिस से मिली रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता या आरोपी के खिलाफ न तो कोई एफआइआर दर्ज की गई है और न ही उसके खिलाफ कोई शिकायत मिली है। इस रिपोर्ट को देखते हुए अग्रिम जमानत की याचिका पर कोई निर्देश देने की जरूरत नहीं है। इस आधार पर याचिका का निपटारा किया जाता है।’

वशिष्ठ के वकील संजय श्रीवास्तव ने कहा कि वशिष्ठ और उसके व्यापारिक सहयोगी ने उनसे दो मई को संपर्क कर सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका दायर करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, ‘वशिष्ठ ने मुझे बताया था कि 29 अप्रैल को जब वह अपने व्यापारिक सहयोगी पंकज अल्लाखा और एक महिला के साथ कार से जा रहा था तो धौलाकुंआ के पास मोटरसाइकिल सवार दो पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोका था।

पांच पुलिसकर्मी, जो कि सादे कपड़ों में थे, एक जिप्सी से उतरे।’ श्रीवास्तव के मुताबिक, स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने जांच में शामिल होने के लिए वशिष्ठ और अल्लाखा को अपने साथ लोदी कॉलोनी स्थित सेल के दफ्तर चलने को कहा। वशिष्ठ के वकील ने बताया कि अधिकारी की बात सुनकर दोनों डर गए और उनसे पूछा कि उन्हें हिरासत में क्यों लिया जा रहा है। इस पर उन्हें धमकी दी गई। आसपास से गुजर रहे लोगों के हस्तक्षेप के बाद वशिष्ठ और अल्लाखा उसे जगह से बच निकलने में सफल रहे।

वशिष्ठ के भाई अनिल ने दावा किया कि 29 अप्रैल को स्पेशल सेल के सदस्यों ने मनोज की कार का धौला कुंआ से लेकर ग्रेटर नोएडा के परी चौक तक पीछा किया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली की सीमा से निकलने के बाद मनोज अपनी कार रोककर बाहर निकला। उसके पीछे आ रही कार भी टीक उसकी कार के पीछे आकर रुकी।

स्पेशल सेल से होने का दावा करने वाले कुछ लोग कार से बाहर निकले। उन्होंने मनोज से कहा कि सेल में दर्ज एक मामले में उसकी तलाश है। अनिल ने आरोप लगाया कि उसके भाई ने उन लोगों को 60 हजार रुपए दिए, इसके बाद उसे वहां से जाने दिया गया।

इस बाबत प्रतिक्रिया लेने के लिए जब स्पेशल सेल के प्रमुख विशेष आयुक्त एसएन श्रीवास्तव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कुछ कहने से इनकार कर दिया।

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