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40 मिनट में 70 कमांडो ने पूरा किया म्यांमा अभियान

Myanmar strike: भारतीय सेना के 70 कमांडो के एक दल ने म्यांमा सीमा के भीतर मंगलवार रात के अंधियारे में लक्ष्य पर किए गए सटीक हमले में महज 40 मिनट में अपने काम को अंजाम दे दिया।
Author June 11, 2015 10:17 am
सूत्रों ने बताया कि चार जून को मणिपुर के चंदेल इलाके में नगा उग्रवादियों के घात लगाकर किए गए हमले में 18 सैनिकों के शहीद होने के कुछ ही घंटे बाद तुरंत पीछा कर कार्रवाई करने का फैसला किया गया।

भारतीय सेना के 70 कमांडो के एक दल ने म्यांमा सीमा के भीतर मंगलवार रात के अंधियारे में लक्ष्य पर किए गए सटीक हमले में महज 40 मिनट में अपने काम को अंजाम दे दिया। इसमें 38 नगा विद्रोही मारे गए और सात घायल हो गए।
सूत्रों ने बताया कि चार जून को मणिपुर के चंदेल इलाके में नगा उग्रवादियों के घात लगाकर किए गए हमले में 18 सैनिकों के शहीद होने के कुछ ही घंटे बाद तुरंत पीछा कर कार्रवाई करने का फैसला किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश से लौटकर आने के कुछ ही समय बाद सात जून की रात को उनसे इजाजत ली गई।

सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि 21 पारा के इन कमांडो को म्यांमा सीमा से लगने वाले भारतीय क्षेत्र में धुव्र हेलिकॉप्टरों से रात करीब तीन बजे उतारा गया। कमांडो असाल्ट राइफल्स, राकेट लांचर, गे्रनेड और रात में देख सकने में सक्षम उपकरणों से लैस थे। सेना के विशेष बल के कमांडो विभाजित होने के बाद एनएसीएन (के) व केवाईकेएल के संचालित दो शिविरों की ओर बढ़े। माना जाता है कि ये दोनों समूह ही चार जून को घात लगाकर किए गए भीषण हमले के लिए जिम्मेदार हैं जिनमें 18 सैनिक मारे गए और 11 अन्य घायल हो गए।

शिविर तक पहुंचने से पहले इन कमांडो को जंगलों में करीब पांच किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ी। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों में से प्रत्येक को दो उप समूहों में विभाजित किया गया था। इनमें से एक समूह को सीधे हमले की जिम्मेदारी दी गई थी जबकि दूसरे ने बाहरी घेरा बनाया ताकि किसी भी विद्रोही को बचकर भाग निकलने से रोका जा सके।
वास्तविक अभियान (शिविर पर हमला करना और नष्ट करना) 40 मिनट चला। कमांडो ने मुठभेड़ में न केवल शिविर में मौजूद लोगों को मार गिराया बल्कि राकेट लांचर का इस्तेमाल भी किया गया और एक शिविर में आग लगा दी गई। सूत्रों ने ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए कहा कि हमले में 38 उग्रवादी मारे गए जबकि सात अन्य घायल हो गए।

सूत्रों ने बताया कि अभियान पर नजर रखने के लिए थर्मल इमेजरी का भी इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि म्यांमा के अधिकारियों से भी तालमेल रखा गया था। भारतीय वायु सेना के एमआइ 17 हेलिकॉप्टरों को तैयार रखा गया था ताकि कुछ भी गड़बड़ होने की स्थिति में वे कमांडो को वहां से निकाल सकें।

सूत्रों ने बताया कि यह अभियान विशिष्ट व बेहद सटीक खुफिया सूचनाओं के आधार पर अंजाम दिया गया। इस अभियान का अधीक्षण दीमापुर स्थित 3 कोर के कमांडर लेफ्टीनेंट जनरल विपिन रावत कर रहे थे। अभियान के लिए अपने ब्रिटेन दौरे को टाल देने वाले सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग सेना मुख्यालय से समन्वय कर रहे थे।

उग्रवादियों का सफाया करने का यह फैसला चार जून को हुए हमले के कुछ ही घंटों बाद एक बैठक में किया गया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक की अध्यक्षता की और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जनरल सुभाग और अन्य उसमें मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभियान के लिए अंतिम मंजूरी दी थी और अभियान का तालमेल डोभाल कर रहे थे।

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सूत्रों ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो सेना क्षेत्र में इस तरह के और अभियान को अंजाम देगी। उन्होंने कहा कि चार जून को हुई बैठक में यह शुरुआती सुझाव आया कि उग्रवादी शिविरों पर अगले ही दिन हमला किया जाए। लेकिन सेना प्रमुख ने इतने कम समय में हमला करने में अपनी असमर्थता दिखाई।

बहरहाल यह तय किया गया कि हमले को यथाशीघ्र अंजाम दिया जाए क्योंकि आमतौर पर फौरन पीछा कर कार्रवाई करने को उग्रवादियों की घटना के 72 घंटे के भीतर अंजाम दिया जाता है। इसके बाद शीर्ष सुरक्षा प्रतिष्ठान ने तय किया कि हमला सोमवार को होगा और जनरल सुहाग से कहा गया कि वे सभी तैयारियां करें। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री को फैसले के बारे में अवगत कराया गया।

बैठक में सुखोई व एमआइजी 29 लड़ाकू विमानों के साथ सेना के विशेष बल के जरिए जमीनी हमले के विकल्पों पर भी विचार किया गया। बहरहाल, इस विकल्प को छोड़ दिया गया क्योंकि वायु हमले में जानमाल के नुकसान की आशंका बहुत अधिक रहती है। अभियान की बारीकियों पर काम करने के लिए डोभाल छह और सात जून को प्रधानमंत्री के दो दिवसीय बांग्लादेश दौरे में उनके साथ नहीं गए।

सूत्रों ने बताया कि जब हमले के बारे में अंतिम रूपरेखा बनाई जा रही थी तो उस समय प्रधानमंत्री बांग्लादेश में थे। उन्हें सभी पहलुओं के बारे में अवगत कराए जाने की जरूरत थी। लिहाजा हमले को एक दिन और टालना पड़ा और मंगलवार तड़के इसका समय तय किया गया। इस बीच, सेना प्रमुख ने मणिपुर का दौरा किया। प्रधानमंत्री को बांग्लादेश से लौटने के बाद अभियान के बारे में रविवार रात को अवगत कराया गया और उनकी अंतिम मंजूरी ली गई।

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