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Maggi Noodles मुश्किल में: जांच का खेल- ‘कहीं पास कहीं फेल’

मैगी के अस्वास्थ्यकर होने का बवाल एक बड़े बवंडर की शक्ल ले चुका है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक खाई जाने वाली मैगी पर देशव्यापी कार्रवाई जारी है। दिल्ली सरकार ने बुधवार को मैगी नूडल्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हुए नेस्ले इंडिया से 15 दिनों के भीतर स्टॉक वापस लेने को कहा।
यों तो देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट बारहमासी मुद्दा है, लेकिन इसका हो-हल्ला प्राय: तीज-त्योहारों पर दूध और दूध से बनी मिठाइयों को लेकर अधिक होता आया है। (फोटो: जनसत्ता)

मैगी के अस्वास्थ्यकर होने का बवाल एक बड़े बवंडर की शक्ल ले चुका है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक खाई जाने वाली मैगी पर देशव्यापी कार्रवाई जारी है। दिल्ली सरकार ने बुधवार को मैगी नूडल्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हुए नेस्ले इंडिया से 15 दिनों के भीतर स्टॉक वापस लेने को कहा।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि सरकारी प्रयोगशालाओं में मैगी के नए स्टाक की पुन: जांच के बाद 15 दिनों के बाद एक नया फैसला किया जाएगा। उत्तराखंड सरकार ने भी मैगी को प्रतिबंधित कर दिया। केंद्र सरकार ने सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन को लेकर स्विस बहुराष्ट्रीय कंपनी की भारतीय शाखा नेस्ले इंडिया के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में लिखित शिकायत की है।

बुधवार को नेस्ले इंडिया के लिए एक अच्छी खबर यह रही कि महाराष्ट्र, केरल और गोवा में इसके नमूनों की जांच में कुछ भी नकारात्मक नहीं पाया गया। गोवा खाद्य व दवा प्रशासन की उपनिदेशक ज्योति सरदेसाई ने कहा, ‘राज्य के बाजारों से लिए गए मैगी के नमूनों में ऐसा कोई तत्त्व नहीं पाया गया जो नुकसानदेह हो।

नमूने बाजार से और उत्तर गोवा में स्थित नेस्ले की फैक्टरी से लिए गए थे’। नमूनों को परीक्षण के लिए गोवा और पंजाब की प्रयोगशालाओं में भेजा गया था। महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि जांचे गए नमूनों के बारे में अभी तक कोई नकारात्मक रिपोर्ट नहीं है। केरल सरकार के अपने खुदरा आउटलेट पर मैगी की बिक्री पर अस्थायी रोक लगाए जाने के एक दिन बाद कोच्चि की एक प्रयोगशाला में मैगी के नमूनों की जांच में सीसे की मात्रा तय मात्रा से नीचे पाई गई। तिरुवनंतपुरम में एक शीर्ष खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मैगी विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से हुई। बाराबंकी में मैगी के अलग-अलग नमूने लेकर कोलकाता स्थित केंद्र सरकार की प्रयोगशाला से जांच कराई गई। नमूनों में लेड (सीसा) की मात्रा तय अनुपात से सात गुणा ज्यादा पाई गई। मोनोसोडियम ग्लूटामेट की मात्रा भी खतरनाक स्तर पर पाई गई।

उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने बुधवार को कहा कि अब राज्य में मैगी नहीं बिकेगी और न ही दुकानों में दिखाई देगी। तमिलनाडु सरकार ने भी मैगी की प्रयोगशाला में जांच कराने का फैसला किया है। तमिलनाडु के खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में कदम उठाते हुए नमूने एकत्र करने और इसे राज्य की प्रयोगशालाओं में भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने इस मामले को लेकर अधिकारियों की बैठक बुलाई है। बंगाल सरकार ने लोकप्रिय स्नैक्स ‘कुरकुरे’ और ‘लेज’ के नमूनों को भी जांच के लिए भेज दिया है। ओडीशा सरकार ने कहा कि उसने इस खाद्य उत्पाद के नमूनों को जांच के लिए पुणे की एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में भेज दिया है। मंडी से मिली खबर के मुताबिक हिमाचल का स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है।

अनौपचारिक बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि विभाग के अधिकारियों को मैगी नूडल्स के सैंपल भरने व उनकी तत्काल प्रयोगशाला में जांच करवाने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।

अगर किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश के सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को मैगी के अलावा अन्य खाद्य पदार्थो के सैंपल भरने के निर्देश दिए गए हैं। असम सरकार ने कहा है कि उसने मैगी के 34 नमूनों को सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा है। जम्मू कश्मीर सरकार ने भी लोगों से मैगी नूडल्स खाने से बचने की सलाह दी और इसके नमूनों की जांच के आदेश दिए ।

विवाद के कारण नेस्ले इंडिया के शेयर में बुधवार को 10 फीसद से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। वहीं नेस्ले इंडिया ने कहा कि उसे अभी तक किसी भी राज्य या केंद्रीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों से उसके मैगी नूडल्स को बाजार से वापस लेने का कोई आदेश नहीं मिला है।

कंपनी ने बंबई शेयर बाजार को बताया-अब तक हमें किसी भी राज्य या केंद्रीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण से मैगी नूडल्स उत्पादों को बाजार से वापस लेने का कोई आदेश नहीं मिला है। केवल उत्तर प्रदेश खाद्य व दवा प्राधिकरण ने 30 अप्रैल 2015 को कंपनी से फरवरी 2014 में विनिर्मित मैगी नूडल्स के बैच को वापस लेने का निर्देश दिया था। यह बैच इस्तेमाल की तारीख नवंबर 2014 को पार कर गया था। नेस्ले ने दावा कि उसने कंपनी और बाहर की प्रयोशालाओं में नमूनों का परीक्षण कराया और पाया कि यह खाने के लिए सुरक्षित है।

इस बीच फ्यूचर समूह (बिग बाजार) ने अपनी खुदरा दुकानों में मैगी बेचना बंद कर दिया। फ्यूचर समूह के प्रवक्ता ने कहा, ‘फिलहाल मैगी नूडल्स को अपनी दुकानों से हटा लिया है। हम अगली कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों से चीजें साफ होने का इंतजार करेंगे।

ईजी डे ने भी कहा है कि कंपनी अगली कार्रवाई तक मैगी नहीं बेचेगी। उपभोक्ता सहकारी सोसाइटी- केंद्रीय भंडार के प्रबंध निदेशक जगदीश भाटिया ने कहा कि हमने सभी स्टोर्स प्रबंधकों को सर्कुलर जारी कर उन्हें आलमारियों से मैगी हटाने को कहा है। अकेले दिल्ली में केंद्रीय भंडार के करीब 100 स्टोर्स हैं।

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