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डिफेंस सेक्टर में दिखेगा मेक इन इंडिया का दम, टाटा के साथ मिलकर F-16 फाइटर जेट बनाएगी अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार भारतीय वायु सेना को इस समय मझोले भार के 200 लड़ाकू विमानों की जरूर है।
पेरिस एयर शो में भारत की निजी कंपनी टाटा और अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के बीच F-16 फाइटर जेट बनाने के लिए समझौता हुआ (Photo source-Twitter/LockheedMartin)

टाटा समूह और अमेरिकी वैमानिकी कंपनी लाकहीड मार्टिन ने एफ-16 लड़ाकू विमान भारत में बनाने के लिए आज लंदन में (19 जून)एक ‘बड़े ‘ समझौते पर हस्ताक्षर किए। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स व लाकहीड के इस सौदे की घोषणा पेरिस एयरशो के अवसर पर की गई और कहा गया है कि यह सौदा भारतीय वायुसेना की एक इंजिन वाले लड़ाकू विमान की मांग को पूरा करने के अनुकूल है। टाटा व लाकहीड मार्टिन के इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के लिए बड़ा समर्थन बताया जा रहा है। इस समझौते की घोषणा ऐसे समय में की गई है जबकि प्रधानमंत्री मोदी थोड़े ही दिन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ बैठक के लिए अमेरिका जा रहे हैं। ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा होगी।

इस सौदे के तहत लाकहीड टेक्सास के अपने फोर्ट वर्थ कारखाने को भारत स्थानांतरित करेगी। हालांकि इससे अमेरिका में सीधे कोई नौकरी नहीं जाएगी। दोनों कंपनियों ने इस समझौते को अमेरिका-भारत उद्योग भागीदारी में ‘अप्रत्याशित ‘ बताते हुए कहा है कि इससे भारत में निजी एयरोस्पेस व रक्षा विनिर्माण क्षमता के विकास में सीधी मदद मिलेगी। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा, यह समझौता लाकहीड मार्टिन व टाटा के बीच पूर्व स्थापित संयुक्त उद्यम पर बना है। यह दोनों कंपनियों के आपसी रिश्तों व प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार भारतीय वायु सेना को इस समय मझोले भार के 200 लड़ाकू विमानों की जरूर है।

बता दें कि भारतीय वायुसेना के ज्यादातर विमान अब पुराने पड़ गये हैं, और इन्हें तुरंत बदलने की जरूरत है। सुखोई और मिग जैसे ये विमान 25 से 30 साल पुराने हो चुके हैं, इन विमानों को भारत-यूएसएसआर दोस्ती के स्वर्णिम दौर में  सोवियत रूस से मंगाया गया था। रक्षा मंत्रालय इन विमानों को बदलने के पक्ष में तो है लेकिन इन्हें दूसरे देशों से खरीदने के बजाय भारत में ही बनाने पर जोर दे रहा है, ताकि भारत के मेक इन इंडिया प्रोग्राम को रफ़्तार मिल सके।

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