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नेपाल भूकंप: मृतकों की संख्या 5000 के पार, संरा ने जारी किए 1.5 करोड़ डॉलर

नेपाल में विनाशकारी भूकम्प से मरने वालों की संख्या दस हजार तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर भूकम्प से प्रभावित दूरदराज के इलाकों तक पहुुंचने के लिए बचावकर्मियों और अंतरराष्ट्रीय सहायताकर्मियों को...
Author April 29, 2015 14:56 pm
भारत ने राहत का दायरा बढ़ाया, संयुक्त राष्ट्र ने 1.5 करोड़ डॉलर जारी किए (फ़ोटो-रॉयटर्स)

नेपाल में विनाशकारी भूकम्प से मरने वालों की संख्या दस हजार तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर भूकम्प से प्रभावित दूरदराज के इलाकों तक पहुुंचने के लिए बचावकर्मियों और अंतरराष्ट्रीय सहायताकर्मियों को मंगलवार को खासी जद्दोजहद करनी पड़ी। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने भूकम्प प्रभावित नेपाल में राहत एवं बचाव अभियानों को तेज करने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की आपात सहायता राशि जारी की है।

भारत ने नेपाल में अपने राहत और बचाव अभियान का दायरा उन इलाकों तक बढ़ा दिया है जहां भूकम्प का केंद्र था और जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। भारत ने सड़क मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम भी शुरू किया। नेपाल के भूकम्प प्रभावित इलाकों में गोरखा सैनिकों को दूरदराज के इलाकों में भेजा गया है ताकि वे पता लगा सकें कि वहां किस तरह की जरूरत है। नेपाल में आए भूकम्प के बाद भारत में मरने वालों की संख्या 75 हो गई है। इनमें 58 बिहार के लोग हैं।

नेपाल में 7.9 तीव्रता का भूकम्प आने के तीन दिन बाद स्थिति और विकट हो गई है। नेपाल में भोजन, पानी, बिजली और दवाओं की भारी कमी के कारण संकट गहराता जा रहा है और दोबारा भूकम्प आने की आशंका के कारण हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं।

नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जरूरतमंदों तक तंबू, पानी और भोजन की आपूर्ति कर रही है। उन्होंने माना कि प्रशासन के पास दूरदराज के गांवों से मदद की बहुत अधिक अपील आ रही है लेकिन प्रशासन कई इलाकों में उपकरणों और बचाव विशेषज्ञों की कमी के कारण राहत अभियान शुरू करने में असमर्थ रहा है।

कोइराला ने रॉयटर्स से कहा कि मरने वालों की संख्या दस हजार हो सकती है क्योंकि दूरदराज के गावों से सूचना मिलनी अभी बाकी है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि नेपाल में भूकम्प से 80 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 14 लाख से अधिक लोगों को भोजन की जरूरत है और पानी और आश्रय स्थलों की भी कमी है।

राजधानी काठमांडो और दूरदराज के पर्वतीय इलाकों में मलबों के नीचे सैकड़ों लोग अब भी फंसे हुए हैं। प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने स्वीकार किया है कि बचाव, राहत और खोजबीन अभियान प्रभावी नहीं रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से इस राष्ट्रीय आपदा के दौरान मिल कर काम करने का आह्वान किया है।

नेपाल के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शनिवार को आए जबर्दस्त भूकम्प के बाद अभी तक कम से कम 5,057 शवों को बरामद कर लिया गया है। भूकम्प के कारण दस हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।

भारतीय राजदूत रंजीत राय ने मंगलवार को कोइराला से मुलाकात की और ‘आपरेशन मैत्री’ के तहत भारत की ओर से चलाए जा रहे राहत व बचाव अभियान को लेकर जानकारी दी। कोइराला ने भारत की ओर से त्वरित राहत प्रदान किए जाने को लेकर राजदूत से आभार जताया। भारतीय दूतावास के सूत्रों ने कहा, ‘हमारी ओर से अब तक दी गई सहायता में अस्थायी अस्पताल, भोजन, पानी, दवाएं, तलाशी और बचाव दल, बिजली की आपूर्ति बहाल करने वाले दल और इंजीनियरों की दो टीमें शामिल हैं। राशन और जरूरी दवाएं जल्द पहुंचने की उम्मीद है।’

भारतीय राजदूत राय ने नेपाल के सेना प्रमुख जनरल गौरव राणा से भी मुलाकात की और दूरस्थ पर्वतीय इलाकों से भारतीयों को बाहर निकालने में मदद की मांग की।

इस बीच, नेपाल सरकार ने नौ जिलों को भूकम्प से अत्यधिक प्रभावित इलाके घोषित किया है। हताहत हुए लोगों की संख्या के आधार पर सिंधुपल चौक, काठमांडो, नुवाकोट, धदिंग, भक्तपुर, गोरखा, कावरे, ललितपुर और रासुवा सर्वाधिक प्रभावित जिले घोषित किए गए हैं। सरकार ने कहा है कि कुल मिला कर 60 जिले भूकम्प से प्रभावित हुए हैं।

संविधान सभा के अध्यक्ष सुभाष नेमबांग की अध्यक्षता में कल बुलाई गई सभी पार्टियों की बैठक में कोइराला ने कहा कि भूकम्प के बाद के हालात से निपटना चुनौतीपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार राहत वितरण और प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर गंभीर और संवदेनशील है।

सरकार प्रभावित इलाकों में तंबू, पानी, दवाएं, स्वास्थ्य कर्मियों और स्वयंसेवकों को भेजने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री ने लोगों से रक्तदान की भी अपील की। भूकम्प में घरों और भवनों के जमींदोज हो जाने और इसके बाद लगातार आने वाले तेज झटकों के कारण लोग प्लास्टिक से बने तंबुओं में रहने को मजबूर हैं। ये तंबू उन्हें शहर में हुई बारिश और ठंड से बमुश्किल बचा पा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की बड़ी मदद: संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल में राहत व बचाव अभियानों को तेज करने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की आपात सहायता राशि जारी की है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों की अवर महासचिव वेलेरी आमोस ने कहा, ‘मैंने नेपाल के लिए 1.5 करोड़ डॉलर जारी किए हैं ताकि सहायता एजंसियां लोगों की जिंदगी बचाने के अभियान में तेजी ला सकें।’ नेपाल में चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियानों में संयुक्त राष्ट्र की एजंसियां सहयोग कर रही हैं।

मानवीय सहायता मामलों के समन्वय कार्यालय के प्रवक्ता जींस लार्क ने कहा, ‘‘यह समय के साथ स्पर्धा है। हमें इसको देखते हुए भी आगे बढ़ना है कि अभी काठमांडो के दूर ग्रामीण इलाकों में जरूरतों का आकलन करना बाकी है।’

दिल्ली में ‘ऑपरेशन मैत्री’ के बारे में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए रक्षा सचिव आर के माथुर ने कहा, ‘हमारे हेलिकॉप्टरों की कई संक्षिप्त उड़ानों के बाद हमें इलाके का बेहतर अंदाजा हो गया है। आज हमने काठमांडो के बाहर प्रभावित इलाकों में हेलिकॉप्टरों से उड़ान भरी। एक एएन-32 विमान भी आज पोखरा में उतरा।’

संवाददाता सम्मेलन के दौरान विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि सड़कों से बड़े पैमाने पर लोगों को लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है और पहले चरण में 80 बसों में करीब चार हजार भारतीय भारत पहुंचेंगे। भारत-नेपाल सीमा को पार करने के बाद बसें गोरखपुर आएंगी।

जयशंकर ने कहा, ‘घर वापसी के लिए संभवत: बस से आना बेहतरीन रास्ता है। हमने भारतीय सीमा के पास इसकी व्यवस्था की है।’ गृह सचिव एलसी गोयल के साथ दोनों सचिवों ने कहा, ‘राहत और बचाव के लिए आज कुछ और उड़ानें भरी गई हैं। राहत सामग्री लेकर कई बसें और ट्रक भी काठमांडो पहुंचे हैं और उन्हें सामान वहां मुहैया कराने के बाद वे लौटते वक्त अपने साथ यात्रियों को लेकर आएंगे।’

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  1. V
    VIJAY LODHA
    Apr 29, 2015 at 12:01 pm
    विडम्बनापूर्ण और हैरानगी भरा सवाल यह है कि संजीदा और ह्रदय विदारक हादसों की भी ख़बरों के प्रसारण के बीच में न्यूज़ चैनल्स पान मसाले, टॉयलेट क्लीनर, साबुन और ब्यूटी क्रीम्स जैसे अनेक विज्ञापनों के प्रसारण से क्यों बाज नहीं आते.....!
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