December 03, 2016

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मदिरा के ‘कद्रदानों’ ने कहा, इसे दवा श्रेणी में रखना चाहिए था…

ठेका इंचार्च ने कहा- यहां के ज्यादातर खरीदार लड़ने को उतारू थे। वे समझने को तैयार नहीं थे कि कोई दुकानदार अपना माल क्यों नहीं बेचना चाहेगा।

Author नई दिल्ली | November 10, 2016 03:08 am
शराब।

हजार और पांच सौ रुपए के नोटों का चलन बंद होना बुधवार को दिन भर चर्चा का केंद्र बना रहा। बुधवार को दिल्ली के ज्यादातर बाजार बे-रौनक रहे। चांदनी चौक, नई सड़क, कूचा महाजनी, सदर बाजार, लाजपतनगर, सरोजनीनगर जैसे बाजारों में छुट्टी का सा माहौल था। प्रधानमंत्री के घोषणा को लेकर दिल्लीवाले इस भ्रम के शिकार भी हुए कि बैंकों व डाकघरों में बुधवार को 4000 तक वाली ‘अदल-बदल ’ होगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके अलावा मेट्रो और अस्पतालों के बाबत रिजर्व बैंक व प्रधानमंत्री के बड़े नोट स्वीकारने के दावे खोखले साबित हुए। यह अलग बात रही कि दिल्ली मेट्रो ने इस पर दोपहर बाद यू टर्न लिया और अपने यहां 500 या 1000 वाले नोट स्वीकारने लगा। सरकारी शराब की दुकानों में बड़े नोट के कारण मदिरा न खरीद सके लोगों ने कहा, ‘इसे दवाई वाली श्रेणी में रखना चाहिए था’।

बावजूद इसके दिल्ली वालों ने इस फैसले को ‘साहसिक’ बताया, लेकिन कई सवाल भी खड़े किए। बसों और मेट्रो में तर्क-वितर्क के दौर चलते रहे। मसलन दो दिन में अगर बड़े आयोजन हैं, जैसे शादी-ब्याह तो पैसे खर्च कैसे होंगे? आखिर 2000 रुपए के नोट लाने से काले धन पर लगाम कैसे लगेगी? और 1000 की तरह 2000 के जाली नोट क्या नहीं बन सकेंगे? 2000 के नोट को बाजार में लाने के फैसले पर ज्यदातर लोग खफा हैं। उनका कहना है कि इससे फिर वही स्थित आएगी। सरकार के इस फैसले को कठघरे में खड़ा करने वालों का तर्क था कि चीन, ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर जैसे 25 से ज्यादा बड़े देशों में बड़े नोटों पर पूरी तरह से पाबंदी है। चीन में 100 युआन, अमेरिका में 100 डॉलर और ब्रिटेन में 50 पाउंड से बड़ा नोट चलन में नहीं रहता। अगर भारत में भी ऐसा हो तो क्या हर्ज है? कई गैर सरकारी संगठनों व बुद्धिजीवियों ने बड़े नोटों को भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह बताया था।

500 और 1000 रुपए के नोट बंद- मोदी सरकार के फैसले पर क्‍या सोचती है जनता

संसद मार्ग स्थित स्टेट बैंक आॅफ इंडिया के कार्यालय में ग्राहक सेवा केंद्र पर बैठे हर्ष ने कहा, ‘आज तो बैंक ही बंद हैं। लिहाजा बुधवार को 4000 तक वाला अदल-बदल गुरुवार के लिए ही है। कुछ लोगों ने इसे बुधवार से ही समझ लिया था। लेकिन वे समझे और वापस गए। दरियागंज के गोलचा सिनेमा स्थित सरकारी शराब की दुकान और चांदनी चौक स्थित ठेके की स्थिति एक जैसी थी। ठेका इंचार्च ने कहा- यहां के ज्यादातर खरीदार लड़ने को उतारू थे। वे समझने को तैयार नहीं थे कि कोई दुकानदार अपना माल क्यों नहीं बेचना चाहेगा। फिर लिखकर चिपकाया गया कि 500, 1000 के नोट से दारू नहीं मिलेगी। शराब की कुछ दुकानें ऐसी हैं जहां के ज्यादतर ग्राहक दिहाड़ी मजदूर और रेहड़ी पटरी के अलावा मेहनतकश तबके के लोग हैं। इनमें साथ बैठकर पीने का चलन है। मसलन पुरानी दिल्ली के परंपरागत बाजारों के पोलदार। ये लोग आम तौर पर खुले पैसे दिया करते हैं लेकिन वे भी आज पहले 500 के नोट चलाने की जुगत में दिखे।

दिल्ली मेट्रो के यात्रियों को 100 रुपए के नोटों की कमी के कारण बड़ी मुश्किलें आर्इं। वैसे डीएमआरसी ने यात्रा कार्ड रिचार्ज के एकमुश्त शुल्क के रूप में 500 और 1000 रुपए के नोट स्वीकार किए। काम के लिए उत्तम नगर से नेहरू प्लेस की यात्रा करने वाले 40 साल के अतुल ने कहा-मेरे पास में महज 400 रुपए बचे हैं। अब हमारे घर में कोई पैसा भी नहीं है। मेट्रो में, मैं अपना कार्ड सबसे कम धनराशि का रिचार्ज ही करवा सका। सवाल के जवाब में डीएमआरसी के एक कर्मचारी ने कहा-हमारा न्यूनतम कार्ड रिचार्ज 200 रुपए का है, लेकिन 100 रुपए के नोटों की कमी के कारण हम एकमुश्त 500 रुपए का रिचार्ज स्वीकार कर रहे हैं जो नोट के माध्यम से भुगतान किया जाए।

 

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First Published on November 10, 2016 3:05 am

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