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ओवैसी ने लालू की तरफ बढ़ाया ‘दोस्ती’ का हाथ, बोले- सांप्रदायिक ताकतों से आप अकेले नहीं लड़ सकते

ओवैसी ने कहा, "लालू यादव साहब आप सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अकेले नहीं लड़ सकते, अगर आपको उनसे लड़ना है तो मजबूती से लड़ें।
Author नई दिल्ली। | August 9, 2017 13:42 pm
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की ओर दोस्ती’ का हाथ आगे बढ़ाया है। ओवैसी ने बीजेपी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मिलकर मजबूती से लड़ना होगा। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक ओवैसी ने कहा, “लालू यादव साहब आप सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अकेले नहीं लड़ सकते, अगर आपको उनसे लड़ना है तो दृढ़ता से लड़ना होगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर सीमांचल को उसका अधिकार दिया जाएगा, बिहार के मुस्लिमों के जीवन में बदलाव लाया जाएगा तो उनकी एआईएमआईएम तैयार है।

इससे पहले मंगलवार को भी असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता इंद्रेश कुमार द्वारा चीन में बनी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान को आरएसएस का पाखंड बताया था। ओवैसी ने कहा कि आरएसएस इस तरह के शब्दाडंबर का इस्तेमाल लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस को अपनी ही कही बात पर यकीन है तो उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बंद करने के लिए कहना चाहिए। आरएसएस के नेताओं का मकसद एक झूठ को गढ़ना है, ताकि लोग राष्ट्रवाद में बह जाएं और उनका ध्यान वास्तविक मुद्दों से हट जाए। उन्होंने कहा, “इंद्रेश कुमार और अन्य आरएसएस नेताओं को प्रधानमंत्री, जोकि खुद भी स्वयंसेवक हैं, के पास जाना चाहिए और कहना चाहिए कि चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार को अविलंब बंद कर दिया जाए।”

बता दें कि लालू यादव 2019 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के जीत के रथ को रोकने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के एक साथ आने की बात कह चुके हैं। लालू, ममता बनर्जी और कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां बीजेपी को हराने के लिए एक साथ आने की बात कह चुकी है। हालांकि गठबंधन कितना कारगर साबित होगा यह कहना जल्दबाजी होगा। इसको लेकर कुछ समय पहले विपक्षी दलों की बैठक भी हुई थी। लालू यादव बिहार के महागठबंधन को सफल करार देते हुए बीजेपी को लोकसभा चुनाव में हराने के लिए इसी तरह के गठबंधन पर जोर दे रहे हैं। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने महागठबंधन को तोड़ने के साथ भविष्य में गठबंधन के स्थायित्व पर भी सवालिया निशाना खड़ा किया है।

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