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राजस्थान-2015 : सुर्खियों में रहा ललितगेट और महाघूस मामला

राजस्थान में इस साल आइपीएल के पूर्व आयुक्त व राजस्थान क्रिकेट संघ के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह पर लगे कथित आरोप और खान रिश्वत महाघूस कांड को लेकर राजनीति पूरी तरह उबाल पर रही..
Author जयपुर | December 21, 2015 04:36 am
वसुंधरा राजे (बाएं) और ललित मोदी (दाएं)।

राजस्थान में इस साल आइपीएल के पूर्व आयुक्त व राजस्थान क्रिकेट संघ के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह पर लगे कथित आरोप और खान रिश्वत महाघूस कांड को लेकर राजनीति पूरी तरह उबाल पर रही। दूसरी तरफ प्रदेश का आर्थिक ढांचा मजबूत करने के वास्ते निवेश के लिए ख्यातनाम उद्योगपतियों को मुख्यमंत्री का राजस्थान बुलाना सुर्खियों में रहा।

इस साल राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर एंबुलेंस सेवा 108 में कथित धांधली के आरोपों को लेकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। वहीं राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों ने एकल पट्टा मामले में राज्य के पूर्व नगरीय विकास, स्वायत्त शासन और आवास मंत्री शांति धारीवाल से पूछताछ की। इसी मामले में पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारी जीएस संधू अदालत के अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद से भूमिगत हैं।

राजे सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और 15 लाख युवाओं को रोजगार देने के लिए पूरी तैयारी के बाद नवंबर में निवेश सम्मेलन आयोजित किया। जयपुर में हुए इस सम्मेलन में धीरूभाई अंबानी समूह के उद्योगपति अनिल अंबानी, वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल, टाटा समूह के साइरस पी मिस्त्री, अडाणी समूह के गौतम अडाणी समेत अन्य कई उद्योगपतियों ने शिरकत कर प्रदेश में निवेश का ताना-बाना बुना।

राजस्थान सरकार ने निवेश सम्मेलन में 3.30 लाख करोड़ रुपए निवेश के 295 एमओयू होने का दावा किया। लेकिन राज्य के उद्योग मंत्री गजेंद्र सिंह खिंवसर ने सम्मेलन के अंतिम दिन यह कह कर विपक्ष को नया मुद्दा दे दिया कि एमओयू में से 50 फीसद के ही पूरे होने की उम्मीद है।

विपक्ष की नेता रहने के दौरान मुख्यमंत्री के राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी को एक कथित शपथ पत्र देने और सांसद दुष्यंत सिंह के कथित व्यापारिक गठजोड़ का मुद्दा इस साल खूब उछला। कांगे्रस ने इसे लेकर मुख्यमंत्री और उनके बेटे दुष्यंत पर लगातार हमले किए। सरकार और भाजपा हमलों का जवाब देते रहे। लेकिन राजे और दुष्यंत ने इस पर चुप्पी साधे रखी।

सांसद दुष्यंत ने एक खबरिया चैनल के एक पत्रकार पर गलत तथ्य पेश कर मानहानि करने का आरोप लगाते हुए धौलपुर की एक अदालत में परिवाद पेश किया जो विचाराधीन है। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल की दूसरी सालगिरह पर प्रदेश के करीब 67 फीसद लोगों (एक करोड़ लोग) को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने का एलान किया। इस योजना के तहत लाभान्वित परिवार को तीस हजार रुपए से लेकर तीन लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देना तय किया गया है।

प्रदेशवासियों की समस्यायों का तुरंत निस्तारण के लिए राजे के संभाग व जिला स्तरीय दौरे जारी हैं। सरकार ने विचाराधीन राजस्व संबधी मामलों का निस्तारण के लिए भी अभियान चलाकर कर लाखों मामले निबटाए। युवाओं को रोजगार मुहैया करवाने के लिए कौशल योजना के तहत बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजनाओं को बंद कर रही है और कांग्रेस नेताओं के नाम पर संचालित योजनाओं का नाम बदल रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया है। राजस्थान में इस साल खान विभाग में खान आबंटन, निरस्तीकरण को लेकर चल रहे गोरखधंधे का राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पर्दाफाश कर निरस्त खान को बहाल करने के लिए लाखों रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में वरिष्ठ आइएएस अधिकारी और राजस्थान के प्रमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी, खान विभाग के दो अधिकारियों सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया। राज्य सरकार ने सिंघवी सहित इस घूसकांड में गिरफ्तार अधिकारियों को निलंबित कर दिया। सिंघवी अभी जेल में हैं।

खनन विभाग के महाघूस कांड ने सरकार को रक्षात्मक रुख अपनाने को मजबूर कर दिया। विपक्ष के आरोपों के कारण, राजे सरकार के कुछ समय पहले ही आबंटित 653 खानों के आबंटन आदेश को रद्द करना पड़ा। सरकार ने आदेश निरस्त करने का मकसद पारदर्शी ढंग से खान आबंटन करना बताया। लेकिन कांंगे्रस ने इसे अपने डाले गए दबाव का नतीजा बताया।

राजस्थान में पूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर अनशन कर रहे पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा का निधन, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसल बर्बाद होना, महंगाई, पेट्रोल डीजल की दरों में कमी के बावजूद राज्य सरकार द्वारा कर वृद्धि करना भी साल की सुर्खियां रहीं।

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