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कुलभूषण जाधव केस: अंतरराष्ट्रीय अदालत में पाकिस्तान को ‘बेनकाब’ करने के लिए भारत ने दी ये दलीलें

Kulbhushan Jadhav Case: हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया कि जाधव को ईरान से किडनैप किया गया था और सैन्य हिरासत में उससे जबरदस्ती दबाव डालकर बयान दर्ज कराए गए। उससे जबरन जासूसी की बात कबूल करवाई गई है।
Author नई दिल्ली। | May 15, 2017 16:35 pm
जाधव मामले में पाकिस्तान का पक्ष रखते हरीश साल्वे। (Photo Source: ANI)

जासूसी के आरोप में पाकिस्तान द्वारा भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी को लेकर सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में सुनवाई चल रही है। भारत ने जाधव की फांसी के फैसले को लेकर कड़ी ऐतराज जताते हुए कोर्ट के सामने इसे रद्द करने की मांग की है। भारत ने कहा कि कुलभूषण जाधव को फांसी देना मानवाधिकार का उल्लंघन है। साथ ही वियना समझौते का उल्लंघन है। भारत का पक्ष रखते हुए हरीश साल्वे ने इंटरनेशनल कोर्ट के सामने कहा कि मानवाधिकार और अतंराष्ट्रीय कानून के आर्टिकल 36 में कांसुलर एक्सेस (राजनयिक मुलाकात) का अधिकार है, लेकिन कुलभूषण के मामले में इन नियमों का पालन नहीं किया गया। हमारे (भारत) काफी अनुरोध के बाद भी पाकिस्तान की ओर से जाधव से मिलने की इजाजत नहीं दी गई।

हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया कि जाधव को ईरान से किडनैप किया गया था और सैन्य हिरासत में उससे जबरदस्ती दबाव डालकर बयान दर्ज कराए गए। उससे जबरन जासूसी की बात कबूल करवाई गई है। पाकिस्तान में मानवाधिकार के मूल तत्वों का ध्यान नहीं रखा गया और उनको हवा में उड़ा दिया गया है। भारत की ओर से कहा गया कि उसे डर है कि पाकिस्तान यूएन कोर्ट का फैसला आने से पहले जाधव को फांसी पर चढ़ा देगा। इसलिए भारत चाहता है कि जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा दिए गए फैसलों को रद्द किया जाए।

भारत ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि कुलभूषण जाधव को 14 मार्च को गिरफ्तार किया गया। भारत ने कुल 16 बार इस मामले को लेकर पाकिस्तान के सामने सुनवाई लगाई, लेकिन पाकिस्तान ने भारत की बात नहीं सुनी। यही नहीं पाकिस्तान की ओर से इस बात की जानकारी भी नहीं दी गई कि जाधव के खिलाफ क्या आरोप लगाए गए हैं और उन्हें साबित करने के लिए उनके पास कौन-से सबूत है। हरीश साल्वे ने कहा कि भारत के पास जानकारी थी कि जाधव को ईरान से गिरफ्तार किया गया। भारत को इस मामले की जानकारी एक प्रेस रिलीज के तौर पर दी गई थी, वह भी उस समय जब जाधव को फांसी की सजा सुना दी थी। भारत को बिना बताये उसके नागरिक को गिरफ्तार करना, फिर उसे फांसी की सज़ा सुनाना पाकिस्तान की ओर से कोई किया गया नियमों का उल्लंघन है। इस मामले में अभी पाकिस्तान का पक्ष रखा जाना बाकी है।

 

 

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