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जानिए, आरबीआई से आप तक कैसे पहुंचता है रुपया, क्या है करेंसी मैनेजमेंट का तरीका

आरबीआई के पास 19 वितरण कार्यालय, 4,075 करेंसी चेस्ट और 3746 छोटे सिक्कों के डीपो हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत में नोटों के मुद्रण और वितरण के लिए जिम्मेदार है।

बैंक नोट ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल हम रोज ही करते हैं लेकिन उस पर चर्चा शायद ही कभी करते हों। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इन नोटों की अहम भूमिका होती है लेकिन ज्यादातर लोगों को ये नहीं पता होता है कि ये नोट आते कहां से हैं। लेकिन आठ नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की उसके बाद से देश में सिर्फ और सिर्फ नोटों की ही चर्चा हो रही है। नोट पाने के लिए लोग बैंकों और एटीएम के बाहर घंटों कतार में इंतजार कर रहे हैं। कुछ जगहों पर नोटों की कमी की वजह से मौत जैसे दुखद हादसे हुए भी हुए। पुराने नोटों के बंद होने और नए नोटों के जारी होने की चर्चाओं के बीच आज हम आपको बताएंगे कि नोट आते कहां से हैं और हम तक कैसे पहुंचते हैं।

कौन छापता है नोट- हम जिन नोटों का प्रयोग करते हैं उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) छापता है। बीआरबीएनएमपीएल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक इकाई है। बीआरबीएनएमपीएल मैसूर और शालबनी स्थित दो छापेखानों में ये नोट छापता है। इसके अलावा सरकारी दस्तावेज छापने वाला भारत सरकार का सिक्योरिटी प्रिटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया भी करेंसी नोट छापता है। छापेखाने से नोट आरबीआई नोट और सिक्कों को बैंक शाखाओं के माध्यम से वितरित करता है। आरबीआई की इन बैंक शाखाओं को करेंसी चेस्ट कहते हैं।

नोट कैसे पहुंचता है आम आदमी तक- नए नोट छापेखाने से आरबीआई के दफ्तर, आरबीआई के दफ्तर से करेंसी चेस्ट और फिर वहां से बैंकों की शाखाओं में पहुंचते हैं। बैंकों से यही नोट आम आदमी को मिलते हैं। आरबीआई के पास 19 वितरण कार्यालय, 4,075 करेंसी चेस्ट और 3746 छोटे सिक्कों के डीपो हैं। करेंसी चेस्ट और सिक्के के डीपो का प्रबंधन वाणिज्यिक, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक करते हैं। सबसे अधिक 1965 करेंसी चेस्ट भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पास हैं।

कितने नोट किसको मिलेंगे- करेंसी को विशेष रूप से निर्मित ट्रकों में आरबीआई अधिकारियों की निगरानी में पहुंचाया जाता है। करेंसी चेस्ट से बैंक की शाखाओं तक नोट ले जाने की जिम्मेदारी बैंक की होती है। करेंसी चेस्ट से मांग के आधार पर बैंकों को नोट दिए जाते हैं। बैंक कारोबार के आधार पर करेंसी चेस्ट से नोटों की मांग करते हैं।

कैसे तय होती है नोटों की संख्या- आरबीआई वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर, मुद्रास्फीति और अलग-अलग नोटों के वितरण अनुपात के आधार पर नोट जारी करता है। भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता द्वारा तैयार मांग का अनुमान लगाने वाले मॉडल द्वारा आरबीआई नोटों की मांग का अनुमान लगाता है। आरबीआई मांग में बढ़त, नोटों को बदले जाने की जरूरत और आवश्यक जमा राशि का अनुमान करता है।

एटीएम में कैसे डाले जाते हैं नोट- बैंक प्रतिदिन निकासी क्षमता के आधार पर ऑटोमैटिक ट्रेलर मशीन (एटीएम) में पैसे डालते हैं। कई बैंक सुदूर इलाकों में स्थित एटीएम में पैसे डालने का काम किसी बाहरी एजेंसी को सौंप देते हैं। पिछल दो साल में आरबीआई के छापेखाने से मांग से कम नोट छापे गए। साल 2015-16 में 21.2 अरब करेंसी नोट छापे गए जबकि मांग 23.9 अरब नोटों की थी। साल 2014-15 में 23.6 अरब नोट छापे गए थे जबकि मांग 24.2 अरब नोटों की थी। सुरक्षित रूप से नोट छापने में साल 2015-16 (जुलाई-जून) पर 34.2 अरब रुपये खर्च हुए। साल 2014-15 में इस मद में 37.6 रुपये खर्च हुए।

आगे की योजना- आरबीआई एक नोट हब बनाने और एक मेगा करेंसी चेस्ट बनाने पर विचार कर रहा है ताकि नोटों का वितरण सुगम बनाया जा सके। आरबीआई ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत एक स्याही उत्पादन इकाई बनाने का भी प्रस्ताव दिया है।

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