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शत्रु संपत्ति कानून: जानिए क्यों इस कानून की जद में नहीं आएगा मशहूर जिन्ना हाउस

शत्रु संपत्ति बिल पास होने के बाद कई नवाबों और राजघरानों पर इसका असर पड़ेगा लेकिन जिन्ना हाउस इसकी जद में आने से बच सकता है।
मुंबई के मालाबार हिल्स स्थित जिन्ना हाउस (Source: Express Archive)

संसद में शत्रु संपत्ति बिल पास होने के बाद कई नवाबों और राजघरानों पर इसका असर पड़ेगा। वहीं कयास लगाए जा रहे थे कि पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना का मुंबई स्थित मशहूर जिन्ना हाउस भी इस बिल की जद में आएगा लेकिन ऐसा जरूरी भी नहीं। इसकी वजह यह है कि जिन्ना का घर शत्रु संपत्ति नहीं बल्कि एक निष्क्रांत या evacuee (विभाजन के समय जो लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे, उनकी जो भूमि यहां थी, उसे निष्क्रांत श्रेणी में रखा गया था) संपत्ति की श्रेणी में आती है। वहीं इस संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर भी कोर्ट में लड़ाई जारी है। 2010 में बॉम्बे हाई कोर्ट में जिन्ना की बेटी डीना वाडिया ने बंगले के मालिकाना हक के लिए अपील की थी। डीना का दावा है कि उनकी(जिन्ना) एक लौटी संतान होने के नाते वह इस संपत्ति की मालिक हैं। उन्होंने जिन्ना के घर को निष्क्रांत संपत्ति घोषित किए जाने को चैलेंज किया है।

डीना वाडिया की उम्र लगभग 90 साल से ज्यादा की है और वह अभी अमेरिका में रह रही हैं। वहीं इस मामले में एक और पक्ष भी है। भारत सरकार का दावा है कि जिन्ना ने अपनी संपत्ति को 30 मई 1939 को अपनी बहन फातिमा के नाम कर दिया था। 2008 में हाई कोर्ट में मोहम्मद इबराहिम और उनके बेटे ने दावा किया कि वह ही इस संपत्ति के असली मालिक है। मोहम्मद इबराहिम जिन्ना के पड़ भतीजे हैं। इबराहिम के काउंसल के मुताबिक, मुस्लिम कानून के तहत, वह कानूनी तौर फातिमा जिन्ना के वारिस है और संपत्ति पर हक उनका बनता है। वहीं विदेश मंत्रालय का भी इस संपत्ति को लेकर दावा है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक सरकार ने बंगले को बतौर निष्क्रांत संपत्ति हासिल किया था। विस्थापित लोगों के लिए (मुआवजा एंव पुनर्वास ऐक्ट, 1954) के सेक्शन 12 के तहत संपत्ति हासिल करने के बाद, निष्क्रांत करने वाले का संपत्ति पर कोई हक नहीं रहता और वह सिर्फ मुआवजे का हकदार ही होता है। मंत्रालय ने कहा था कि वारिसों के पास संपत्ति का कोई मालिकाना हक नहीं है।

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