December 09, 2016

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केरल का रहने वाला है भारत में आईएस का मुख्य रिक्रूटर, शिक्षित युवक बन रहे हैं शिकार

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जिन 67 भारतीयों पर आईएस के लिए काम करने की आशंका है उनके अलावा भी कई लोग इस आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर। (REUTERS/Stringer/File Photo)

इस साल अप्रैल की एक रात सजीर मंगलाचारी अब्दुल्लाह ने दुबई के लिए उड़ान भरी। उसके बाद वो बहुत कम मिलने वाली छुट्टी पर घर वापसी आया। केरल के कोझीकोड के रहने वाले अब्दुल्ला के पिता ट्रक ड्राइवर हैं। उसकी मेहनत की कमाई से उसका परिवार की आर्थिक हालात काफी सुधर गई थी। उसके दोस्त उसे परिश्रमी और ईमानदार शख्स के तौर पर जानते थे जिसकी राजनीति में कोई रुचि नहीं थी। केरल से खाड़ी देशों में काम करने के लिए जाने के लिए एयर इंडिया के विमान में सवार दूसरे कई कामगारों से वो जरा भी अलग नहीं था। इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच पार करने में उसे जरा भी दिक्कत नहीं हुई। वो चार घंटे की उड़ान के लिए अपनी इकोनॉमी क्लास सीट पर आराम से पहुंच चुका था। लेकिन उसके बाद वो आतकंवादी संगठन इस्लामिक स्टेट की आंत में गायब हो गया।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने इस महीने की शुरुआत में केरल से छह लोगों को भारत में आतंकवादी हमले की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया। और भारत, अफगानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात की खुफिया एजेंसियां अब्दुल्ला नाम के व्यक्ति की तलाश कर रही हैं। खुफिया एजेंसियों की माने तो अब्दुल्ला लोगों को बरगला कर इस्लामिक स्टेट से जोड़ने वाला मुख्य सूत्रधार है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अब्दुल्ला अब अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में रहता है और वो इस्लामिक स्टेट में अहम पद पर कार्यरत है।

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खुफिया एजेंसियों के अनुसार मोसूल और रक्का में इस्लामिक स्टेट का आधार कमजोर होता जा रहा है इसलिए आईएस ने भारतीय जिहादियों  को सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए अफगानिस्तान भेजने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार इन जिहादियों को भारत में हमले करने के लिए भी उकसाया जा रहा है। उन्हें खुद से बनाए हुए विस्फोटकों के प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। एक खुफिया अधिकारी ने कहा, “नंगरहार ब्लैक होल की तरह की अबूझ है। अगर आप गायब होना चाहते हैं तो ये बिल्कुल सटीक जगह है। अफगान खुफिया सर्विस भी इस इलाके में खुद को असहाय पाती है।”

अब्दुल्ला ने जिन लोगों को आईएस में शामिल कराया वो सभी शिक्षित हैं। एनआईए के अधिकारियों के अनुसार आईएस के इस सेल की सबसे अहम कड़ी दोहा में रहने वाला मनसीद बिन मोहम्मद है तो पांच साल पहले केरल के पनूर से पश्चिम एशिया चला गया था। वो पहले पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़ा था। केरल सरकार के अनुसार इस संगठन के संबंध आईएस से हैं। मोहम्मद ने एक बार संगठन के लिए हिंदुत्ववादी संगठनों की गतिविधियों पर रिसर्च किया था। एनआईए के अधिकारियों के अनुसार दोहा जाने के बाद वो इस्लामिक स्टेट से जुड़ गया और अबु बकर अल-बगदादी उसका नया नेता बन गया।

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एनआईए अधिकारियों के अनुसार मनसीद ने एनक्रिप्टेड सोशल मीडिया संदेशों के जरिए कई हमख्याल युवकों को आईएस से जोड़ा। उसके द्वारा आतकंवाद से जोड़े गए ज्यादातर नौजवान शिक्षित हैं। स्वालेह मोहम्मद चेन्नई स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी में रिसर्चर था। साफवान पूकतिल पीएफआई के दैनिक तेजस में ग्राफिक डिजाइनर था। रामशाद नीलांगन कांदियिल कोझीकोड में चार्टेड अकाउंटेंट का काम करता था। जसीम नीलांगन कांदियिल ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधूर छोड़ दी थी। राशिद अली का छोटा मोटा कारोबार था।

एनआईए के अनुसार अब्दुल्लाह ने ही कोदईकनाल में इसराइली पर्यटकों पर हमला करने की योजना बनाई थी। उसने ही बीजेपी नेताओं और “मुस्लिम विरोधी” फैसला देने वाले जोजों पर हमले की भी योजना बनाई थी। सुरक्षा एजेंसियों को यकीन है कि अब्दुल्ला ने 21 केरलवासियों को नंगरहार बुलाया है, जिनमें से आठ नाबालिग भी शामिल हैं। इस गुट का नेतृत्व कट्टरपंथी मौलाना अब्दुल राशिद ने किया था। इस गुट के नंगरहार पहुंचने पर अब्दुल राशिद ने अपने एक दोस्त को भेजे टेलीग्राम संदेश में कहा, “मुजाहिद की जिंदगी कुछ महीनों की होती है। इसका इनाम दूसरी जिंदगी में मिलेगा।”

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खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जिन 67 भारतीयों पर आईएस के लिए काम करने की आशंका है उनके अलावा भी कई लोग इस आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं। एनआईए के एक अधिकारी ने कहा, “सच बताएं तो हमें ठीक से नहीं पता कि कितने प्रवासी भारतीय इस्लामिक स्टेट से जुड़े हैं।” जिस तरह विभिन्न भारतीय शहरों से आईएस से जुड़े संदिग्ध पकड़े जा रहे हैं उसे देखते हुए ये बात सभी के लिए चिंताजनक है। और इससे भी ज्यादा चिंताजनक है शिक्षित युवकों का इनका शिकार बनना।

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First Published on October 20, 2016 8:59 am

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