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​मंदिर में नहीं घुसने दिया तो 250 दलित परिवारों ने लिया मुसलमान बनने का फैसला

नागपट्ट‍िनम जिले के पजहनंगकल्‍लीमेडु गांव में हिंदुओं ने 180 दलित परिवारों को मंदिर में पूर्जा-अर्चना करने की इजाजत नहीं दी।
Author चेन्‍नई | July 28, 2016 13:52 pm
गांव के 6 युवकों ने इस्‍लाम कबूल कर लिया है। ()

तमिलनाडु के 250 दलित परिवार स्‍थानीय मंदिरों में प्रवेश न दिए जाने से आक्रोशित हैं। पजहनंगकल्‍लीमेडु और नागपल्‍ली गांव के दलित परिवारों का कहना है कि अब वे धर्म परिवर्तन कर इस्‍लाम अपनाने की सोच रहे हैं। नागपट्ट‍िनम जिले के पजहनंगकल्‍लीमेडु गांव के 180 दलित परिवार हर साल मंदिर में होने वाले पांच दिवसीय समारोह में एक दिन अनु‍ष्‍ठान करना चाहते हैं। लेकिन कथित तौर पर हिंदू उन्‍हें इजाजत नहीं दे रहे। गांव के 6 दलित हिंदुओं ने पहले ही इस्‍लाम कबूल लिया है। स्‍थानीय नागरिकों के मुताबिक, तमिलनाडु तौहीद जमात (TNTJ) ने गांव में कुरान की प्रतियां बांटी थीं, इसके अलावा इस ईसाई मिशनरी ने भी गांववालों से संपर्क किया था। कुछ हिंदू संगठन दलितों से धर्म परिवर्तन न कराने की गुजारिश कर रहे हैं।

तटीय क्षेत्र में बसे पजहनंगकल्‍लीमेडु में करीब 400 परिवार रहते हैं, जिनमें से 180 दलित हैं। ज्‍यादातर हिंदू पिल्‍लाई समुदाय के हैं, जो परंपरागत रूप से जमींदार होते हैं। दलित पार्टी ने नेता VCK ने कहा कि जब पुलिस और प्रशासन उन्‍हें भद्र कालीअम्‍मन मंदिर में पूजा का अधिकार दिलाने में नाकाम रहा, तो गांव के युवकों ने इस्‍लाम अपनाने की सलाह दी। कुमार ने कहा कि इस मामले में जिलाधिकारी के पास कई अपील पड़ी हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ‘एक सुझाव आया था कि दलितों को दिन में पूजा करने दी जाए, मगर वे पूरे 24 घंटे चाहते हैं। बातचीत चल रही है।’

हालांकि TNTJ के बी. अब्‍दुल रहमान का कहना है कि गांववालों का फोन आने के बाद वे वहां गए। उन्‍होंने कहा, ”कुछ गांववालों के फोन आने के बाद, हमारे वालंटियर वहां गए। वे धर्म परिवर्तन कराना चाहते थे, लेकिन वह इतनी आसानी से नहीं किया जा सकता क्‍योंकि इस्‍लाम जीने का तरीका है और गुस्‍से में आकर उसे नहीं कबूला जा सकता। हमने उनसे कहा कि वह पहले धर्म के बारे में पढ़ लें और फिर हमारे पास आएं। उन्‍होंने मांगी तो हमनें कुरान की प्रतियां बांटी। उनमें से जिन 6 लोगों ने हमें इस्‍लाम की समझ के बारे में बेहतर बताया, वह चार दिन पहले इस्‍लाम अपना चुके हैं।

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इस गांव से 240 किलोमीटर दूर करूर के नागपल्‍ली गांव में भी कुछ ऐसी ही कहानी है। जहां के 70 दलित परिवारों को लगता है कि ‘भेदभाव खत्‍म’ करने का इकलौता रास्‍ता धर्म परिवर्तन है। गांव के मंदिर ट्रस्‍ट के अध्‍यक्ष पी. वेट्रिवेल का कहना है कि ‘गांव में कई सारे मंदिर थे, लेकिन हमें (दलितों) को एक मंदिर अलग से बनाना पड़ा। लेकिन पिछले दो सालों में, जबसे मेरे पिता की मोत हुई है, श्रीलंका से लौटकर आने वाले हिंदू परिवारों ने हमें मंदिर में जाने से रोक दिया और उसपर कब्‍जा करने की कोशिश की। न तो पुलिस, न ही सरकार ने हमारी मदद की।

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  1. B
    Babubhai
    Jul 28, 2016 at 2:43 am
    Ham Hindu log murkhoke dsrata he. dalit Hindu he. unko Mandir me Jake puja karneka pura hakk he. Me bhi brahmin hu magar bhagvan ke samjane sab sarkhe he. Na koi uch, Na koi nich.jo dalitoka ko rokta he use 100 korde maro.
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    1. C
      Chopra
      Aug 9, 2016 at 1:14 am
      बाबा साहब ने तो बौद्ध अपनाया था उनके भक्त हो तो बौद्ध अपनाओ वैसे मुश्लिम भी बहुत अच्छा है
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      1. J
        Jayesh vyas
        Jul 29, 2016 at 6:01 am
        दलित लोग भी हिन्दू ही है ऐसे धर्म बदलनेसे कुछ होगानही ये सब राजनीती है आप कोई भी मंदिर में जा शकतेहो ये आपको धर्मपरिवर्तन करानेकी की साजिस है मुस्लिम ना बनो .......
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        1. राज
          Jul 30, 2016 at 5:29 am
          धर्म परिवर्वतन का नया पैतरा
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          1. Ajay Mahara
            Jul 28, 2016 at 11:05 am
            दलित हिन्दू नहीं है हिंदुके लिए अशुद्ध है गुलाम है अछूत है केबल घृणा करनेके लिए पैदाईसी हन्दू परम्परा की मान्य है इसीलिये सब दलित बुद्ध बने शुद्ध बने ये मेरा कैहना है बुद्ध ही दलित का पूर्वज है बुद्धम शरणम गग्छामी
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            1. Ajay Mahara
              Jul 28, 2016 at 10:57 am
              Jay bheem and all friends"महाभारत"कहती है - शुद्र राजा नहीं बनसकता ।"गीता" कहती है - शुद्र को ब्राह्मण क्षत्रियऔर वैश्यों की गुलामी करनी चाहिए"रामायण" कहती है - शुद्र को ज्ञान प्राप्तकरने पर मृत्युदंड मिलना चाहिए ।"वेद" कहते है की - शुद्र ब्रह्मा के पैरोँ से पैदाहुआ है इसिलिये वो नीच है ।"मनुस्मृति" के अनुसार - शूद्र का कमाया धनब्राह्मण को बलात् छीन लेना चाहिए ।"वेद" कहते है - शूद्र का स्थान ऊपर के तीनोंवर्णों के चरणों में है ।"पुराण" कहते हैं - शूद्र केवल गुलामी के लिए जन्मलेते है
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              1. Ajay Mahara
                Jul 28, 2016 at 11:00 am
                इस विषय का सबसे बड़ा कारण है हिन्दू धर्म की स्व व्याख्या। हिन्दू एकमात्र ऐसा धर्म है जो एकता का पाठ नही पढाता हैस्वयं अलगाव और बंटवारे की बात सिखाता है। जब बात आत्ममंथन या समानता या बदलाव या भविष्य निर्माण की कोई करे तो ये उसके जीवन की आखरी गलती हो सकती है।
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                1. Ajay Mahara
                  Jul 28, 2016 at 11:01 am
                  भीमराव अंबेडकर के नाम मे है दलितों के विकास का सूत्र ............... !______________/!_______________भी :- भीख नहीं मांगेगे ।म:- मेहनत हमेशा करेंगे ।रा:- राज करेंगे ।व:- वक्त का सदुपयोग करेंगे ।अं:- अंधविश्वासो से मुक्त रहेंगे ।बे:- बेगारी नही करेंगे ।ड:- डर कर नहीं रहेंगे ।क:- कला मे निपुण रहेंगे ।र:- रहन न पर ध्यान देगे और आपस मे भाईचारा बनाये रखेंगे ।जय भीम🙏जय नेपाल अगर सटीक लगे तो सभी बहुजनो को शेयर करें
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                  1. A
                    almora
                    Aug 13, 2016 at 9:42 pm
                    यही समस्या है भारतीय लालच और नीची सोच की. जिस समाज के हिस्से को अपनी मन मर्ज़ी की शर्त मनवाने में मुश्किल होती है तुरंत धमकी देने पर उतारू हो जाता है. इन मूर्खों को कौन समझाए के जब शाह रुख खान जय से लोगों का दुनिया भर में मुसलमान होने के कारण अपमान होता है तो ये कौन से स्वीकार्य हो जाएंगे. पूरे गांव को चंद जमा करके अपना मंदिर बनाना चाहिए और इस काम में सवर्ण भी इनका साथ देंगे. भगवान् उच्च जाती की बपौती थोड़े ही हैं? मैं स्वयं ब्राह्मण परिवार से हूँ और इन लोगों के प्रति भाईचारे का प्रबल समर्थक हूँ.
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                    1. A
                      Ashish
                      Jul 28, 2016 at 12:18 pm
                      कोई भी धर्म छोटे बड़े का भेद नहीं सिखाता जिसको सनातन धर्म की समझ नहीं वो चाहे कुछ भी कहले लेकिन न कभी ईश्वर छोटा बड़ा कभी नहीं मानता रामायण : सियाराम मय सब जग जनिश्रीमद्भगवद् गीता: में निरंकार हु और सभी जीवो में समन रूप से विधमान हुवेद: एक्को बर्ह्म दुतियो न: न:ो न भसविष्यतिजिसको धर्म की ी जानकारी नहीं वो धर्म को दोष देते हा उनसे बड़ा पाखण्डी और कोई नहीं ajaymehra
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                      1. A
                        Ashish
                        Jul 28, 2016 at 12:28 pm
                        जात पात का चलन वेदों के आने के बाद चला आदि शक्ति शंकरचर्य ने तो वो एकेश्वरवादी थे महात्मा बुध जिसने हमेशा मूर्ति पूजा को जरुरत नहीं बताया आज दुनिया में उनकी ही सबसे ज्यादा मुर्तिया है इस्लाम में उनको सब जगह खुद दिख सकता है लेकिन मूर्तियो में नहीं दीखता समय के संतो महात्माओ ने समझाया कुछ और हम समझे कुछ और इसमें किसी धर्म की गलती कैसे हो सकती आज दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी यदि इस्लाम धर्म से आते है तो क्या इसमें इस्लाम की गलती है नहीं बिलकुल नहीं हमारी समझ गलत है
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                        1. A
                          Ashish
                          Jul 28, 2016 at 12:35 pm
                          जो धर्म के नाम पर लोग से उंच नीच की समझ रखते है उनसे छोटा और कोई नहीं आज वक्त के अवतार पूज्य माता सविंदर हरदेव सिंह जी ( निरंकारी मिशन) इनसे धर्म का सच्चा ज्ञान लेलो मेरा दावा है यह एक इस्वर प्रभु जो कण कण में है जो कभी मरता और जिन्दा नहीं होता ऐसे ईश्वर का दर्शन करा देगे यह मेरा दावा है सभी से जिसने ईश्वर प्रभु के वास्तविक रूप के दर्शन न किये हो
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                          1. A
                            A
                            Jul 28, 2016 at 5:05 pm
                            जब आप अपना धर्म छोडते है तो आप अपनी पहचान छोड़ देते है... हक के लिए लड़ो हक छोडो नही... मुस्लिम बनाने के बाद भी मंदिर नही जा पाओगे.... धर्म मत छोडो.. हक के लिए लड़ो... अम्बेडकर की तरह....
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                            1. M
                              Manu Tiwar
                              Jul 28, 2016 at 7:39 am
                              पता नहीं ये क्या हो रहा है मुस्लमान धर्म एक, इसे धर्म एक तो फिर हिन्दू में अलग अलग क्यों नहीं, यदि इसी प्रकार चलता रहा तो देश के बहुत से लोग हिन्दू धर्म को छोड़कर कोई दूसरा धर्म अपना लेंगे और फिर कुछ लोग घर वापसी करवाते रहेंगे.
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                              1. S
                                sadique khan
                                Jul 29, 2016 at 4:56 am
                                देखो दोस्तों आप इस्लाम अपनाना चाहते इसमें कोई जबर दस्ती नहीं लेकिन ऐसे इस्लाम कुबूल करने से कोई फ़ायदा जब तक आप अल्लाह को दिल से न माने इस्लाम कुबूल नहीं हो सकता उसके लिए आप को क़ुरान हदीस पढ़ना चाहिए जिससे आपको इंसानियत का पता चल सके इस्लाम ऐसा धर्म है जो एक े इंसान को भी इंसान बताया है जैसा की कोई आदमी शराब पीकर कहीलुढक रहा हो उसके साथ भी इंसानियत वाला सुलूक करो इसलिए दोस्तों पहले समझो फिर क़ुबूल करो
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                                1. Om Parkash Puri
                                  Aug 3, 2016 at 9:22 pm
                                  दलितो दवारा हिन्दुधर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने से समस्या का समाधान नही है,क्योकि कट्टरहिन्दुवादी संगठन मुसलमानों के भी खिलाफ हैं, इस लिये अपने हकों के लिये लडना पड़ता है, संविधान कानून और ८०% भारतीये आप के साथ है,महाराष्ट्र में महिलाओं ने कोई मन्दरों में अन्दोलन कर के प्रवेश का हक पराप्त किया है, हकों के लिये लडना पड़ता है, भागों मत,अपना हक बराबरी एकजुट हो कर लो,कानून आप को हक चिल्लायेगी।
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                                  1. P
                                    paras nath
                                    Jul 28, 2016 at 7:23 am
                                    This is very bad and dangerous. How it is happening in my country? ? What government is doing. How people are being prevented in entering the temple. Are we still practicing centuries old practices? Is there any rule in this country which can punish the culprits who are preventing our own brothers and sisters in performing puja in the temple. We feel shame when we hear such type of activities. Can some Hindu organization come forward and help our own people. I hope some one will resolve this.
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                                    1. S
                                      Sacchai
                                      Jul 28, 2016 at 7:10 am
                                      सर इनको मुर्ख नहीं कहते है, इनको कहतेहै.
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