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कश्मीर की ‘आवाज’ दबाने की कोशिश ! एडिटर्स हुए एक, बोले- अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएंगे

न्यूजपेपर्स के संपादकों ने श्रीनगर में शनिवार शाम को एक मीटिंग की। इसमें सबने माना कि यह प्रेस पर सीधा-सीधा हमला है और वे लोग किसी भी कीमत पर इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।
Author July 17, 2016 07:48 am
Rising Kashmir के एडिटर ने अखबार की यह फोटो ट्विटर पर शेयर की थी। 16 जुलाई के इस एडिशन को जब्त कर लिया गया था।

कश्मीर घाटी में पहली बार प्रिंटिंग प्रेस पर रेड डाली गई। शुक्रवार (15 जुलाई) को देर रात पड़ी इस रेड में मशीनों को बंद करवा दिया गया। कुछ अखबार मालिकों का दावा है कि पुलिसवालों ने उनके कर्मचारियों को भी उठा लिया था। घाटी में मोबाइल और इंटरनेट सेवा पहले से ही बंद है। इस तरीके से वहां खबरों और सूचनाओं का पहुंचना नामुमकिन सा हो गया है। हालांकि, श्रीनगर के बाहर कुछ इलाकों में टीवी प्रसारण फिर से शुरू कर दिया है। 1990 के बाद कश्मीर में ऐसा पहली बार किया गया है।

बैन के बारे में सवाल पूछे जाने पर जम्मू कश्मीर सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा कि यह कुछ वक्त के लिए ही है। उनके मुताबिक, यह स्थिति को कंट्रोल में करने के लिए है।

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कश्मीर में अंग्रेजी के जाने माने अखबार Greater Kashmir के सीनियर एडिटर अरशद कालो ने कहा, ‘पुलिसवाले रात 1 बजे हमारी प्रिटिंग प्रेस में आए। उस वक्त हमारे लोग अखबार छाप ही रहे थे। उन्होंने सबको रोक दिया और छपे हुए पेपर जब्त कर लिए। उन्होंने चार लोगों को पकड़ लिया और फिर सुबह छोड़ा।’

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अरशद के अलावा उर्दू अखबारों के लोगों का भी पुलिस पर यही आरोप है कि उनके अखबारों को जब्त किया गया और लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। ज्यादातर न्यूजपेपर्स के संपादकों ने श्रीनगर में शनिवार शाम को एक मीटिंग की। इसमें सबने माना कि यह प्रेस पर सीधा-सीधा हमला है और वे लोग किसी भी कीमत पर इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।

कश्मीर में यह हालात हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद बिगड़े हैं। कश्मीर के लोग उसकी मौत से खफा है और पुलिसवालों पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। जवाब में पुलिस भी कार्रवाई कर रही है।

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  1. D
    D.K. Brahmarshi
    Jul 18, 2016 at 1:21 am
    सरकार को स्थिति संभालने के लिए कठोर निर्णय तो लेने ही होगें ।
    (2)(0)
    Reply
    1. Y
      yogpaul
      Jul 18, 2016 at 1:49 pm
      What is your opinion?Media has no authority to dictate terms to Administration. Govt.'s first priority is to bring peace in the valley. Let the Govt. do its job.
      (0)(0)
      Reply
      सबरंग