December 08, 2016

ताज़ा खबर

 

PM मोदी के ‘नकदीरहित भारत’ के सपने पर कपिल सिब्बल ने ली चुटकी, कहा- देश तो पहले से ‘नकदीरहित’ है

सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्यों और विपक्ष को साथ लेने की जरूरत है।

Author नई दिल्ली | November 29, 2016 00:25 am
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेन्स करते हुए कपिल सिब्बल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नकदीरहित समाज की हिमायत करने के एक दिन बाद सोमवार (28 नवंबर) को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने उन्हें आड़े हाथ लेते हुए कहा कि नोटबंदी के चलते देश तो पहले ही नकदीरहित हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के नकदीरहित समाज बनने का सपना तभी साकार होगा जब इसके लिए संस्थागत ढांचा या व्यवस्था होगी।  सिब्बल ने हैरानगी जताई, ‘यदि कोई व्यवस्था नहीं की जाती है तो यह सपना कैसे साकार होगा?’ उन्होंने कहा, ‘पहले व्यवस्था करनी होगी, इस देश में, 70 करोड़ से अधिक लोग 10,000 रुपया प्रति महीना कमाते हैं (जो बैंकों में उन्हें जमा नहीं कर सकते), वे क्या करेंगे?’ उन्होंने कहा कि कई जगह एटीएम नहीं है , बैंक नहीं है , उसकी शाखाएं नहीं हैं, जिसके चलते लोगों को 20 किलोमीटर तक जाना पड़ता है…देश पहले ही कैशलेस समाज बन गया है क्योंकि लोगों के पास इस वक्त नकदी नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्यों और विपक्ष को साथ लेने की जरूरत है। लोगों को मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने की मोदी की सलाह पर उन्होंने पूछा कि ऐसे में जब ज्यादातर लोग निरक्षर हैं और उपकरणों का उपयोग नहीं कर सकते, तब लोग पैसों का लेन देन कैसे करेंगे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने रविवार (27 नवंबर) को रेडियो पर अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से लेन देन की नकदीरहित व्यवस्था की ओर रुख करने की अपील की थी। नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के चलते (सोमवार, 28 नवंबर) लगातार आठवें दिन भी राज्य सभा और लोक सभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
भाकपा नेता डी राजा ने संसद में व्यवधान के लिए सरकार और प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसके लिए सरकार को अवश्य जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए…प्रधानमंत्री को भी इस गतिरोध लिए समान रूप से अवश्य ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए। विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा के दौरान संसद में रहें। उन्होंने कहा कि मोदी ने इस मुद्दे पर संसद के बाहर घोषणा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संसद में बैठना और चर्चा सुनना तथा संसद के अंदर बोलना नहीं चाहते हैं।
राजा ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के कदम ने देश को अभूतपूर्व वित्तीय संकट में डाल दिया है। इस फैसले ने समूची अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर डाला है। उन्होंने कहा कि इसने विनिर्माण, सेवा, कृषि और सहकारी क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है जिससे समूची अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है। इसके चलते आम आदमी को काफी परेशानी और अपमान का सामना करना पड़ा है। राजा ने इस बात का जिक्र किया कि रोजगार में अनौपचारिक क्षेत्र का हिस्सा 80 फीसदी से अधिक है। इस क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों की बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम सरकार से अपने फैसले की समीक्षा करने और 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोटों को कम से कम 30 दिसंबर तक या, वैकल्पिक व्यवस्था होने तक चलने देने की इजाजत देने की मांग करते हैं।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 29, 2016 12:12 am

सबरंग