December 05, 2016

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सौम्या दुष्कर्म फैसले पर टिप्पणी को लेकर जस्टिस काटजू ने दी सफाई, पूछा- पूर्व जज होने के कारण पेशी गलत तो नहीं

काटजू ने पहले फेसबुक पर एक पोस्ट में शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए इस पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी।

Author नई दिल्ली | October 19, 2016 19:51 pm
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ।

सौम्या दुष्कर्म मामले में फैसले पर टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलब किए गए न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने कहा कि वे ऐसा करने के लिए तैयार हैं लेकिन चाहते हैं कि शीर्ष अदालत इस बारे में विचार करे कि क्या संविधान का अनुच्छेद 124 (7) उन्हें शीर्ष अदालत के समक्ष पेश होने से रोकता तो नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले काटजू को उन बुनियादी खामियों को इंगित करने के लिए निजी तौर पर पेश होने को कहा था जिनके बारे में उन्होंने सौम्या बलात्कार मामले में दावा किया है।

काटजू ने फेसबुक पर एक टिप्पणी में लिखा था-मुझे खुली अदालत में मामले में पेश होने और विचार-विमर्श करने पर खुशी होगी, लेकिन केवल इतना चाहता हूं कि जज इस बारे में विचार कर लें कि क्या सुप्रीम कोर्ट का पूर्व न्यायाधीश होने के नाते संविधान के अनुच्छेद 124 (7) के तहत मेरा पेश होना निषिद्ध तो नहीं है। अगर जज कहते हैं कि यह अनुच्छेद मुझे नहीं रोकता तो मुझे पेश होने में और अपने विचार रखने में खुशी होगी।

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अनुच्छेद 124 सुप्रीम कोर्ट की स्थापना और गठन से संबंधित है और इसका खंड सात कहता है कि सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर रहा कोई व्यक्ति भारत के क्षेत्र में किसी अदालत या किसी प्राधिकरण के समक्ष दलील नहीं देगा या कार्रवाई नहीं करेगा। काटजू ने अपने ताजा पोस्ट में यह भी कहा कि वे अपना विस्तृत जवाब तैयार कर रहे हैं जिसे उनके फेसबुक पेज पर अपलोड किया जाएगा।उन्होंने कहा-मुझे सौम्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। हालांकि इस बारे में केरल सरकार के वकील ने मुझे अनौपचारिक रूप से सूचित किया है। त्रिशूर की एक अदालत ने एक फरवरी, 2011 को 23 वर्ष की सौम्या से बलात्कार के मामले में गोविंदाचामी को मौत की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने मौत की सजा पर मुहर लगा दी। शीर्ष अदालत ने मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया।

काटजू ने पहले फेसबुक पर एक पोस्ट में शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए इस पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति यूयू ललित की शीर्ष अदालत की पीठ ने 17 अक्तूबर को काटजू को इस मामले में नोटिस जारी कर अदालत में 11 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और कार्यवाही में भाग लेने को कहा।

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First Published on October 19, 2016 7:51 pm

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