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जजों की जवाबदेही तय करना चाहती है सरकार, विधेयक लाने की तैयारी

उच्च न्यायपालिका में ‘कामकाज के सूचकांक’ के मुद्दे पर चर्चा के अलावा थिंकटैंक की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 14:39 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo Source: Reuters)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार न्यायाधीशों की जवाबदेही से जुड़े विधेयक में कामकाज के आकलन संबंधी प्रावधान जोड़ने के बाद अब इसे फिर से लाने की तैयारी कर रही है। संप्रग सरकार के समय के इस विधेयक में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक व्यवस्था बनाने की पैरवी की गई थी ।
नए विधेयक की रूपरेखा इसी साल फरवरी में न्याय प्रदान करने और विधि सुधार करने के राष्ट्रीय मिशन की सलाहकार परिषद की बैठक में चर्चा के लिए लाई गई थी ।

अधिकारियों ने इस बैठक में कहा कि यह महसूस किया गया है कि देश में न्यायिक जवाबदेही की जरूरत को न्यायिक आचार और न्यायिका कदाचार से संबंधित मुद्दों तक सीमित किया जा रहा है। अगर भारत अदालती उत्कृष्टता की रूपरेखा का पालन करता है तो इसका दायरा और बढ़ सकता है तथा देश की कानूनी प्रक्रियाओं में ‘प्रभावशीलता और पारदर्शिता’ के मुद्दों को लाया जा सकता है।

सरकार के सूत्रों ने कहा कि जब विधेयक को व्यापक चर्चा के लिए लाया जाएगा तो उच्च न्यायपालिका में ‘कामकाज के सूचकांक’ के मुद्दे पर चर्चा के अलावा थिंकटैंक की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इस बैठक के लिए तैयार विधि मंत्रालय के एक नोट में कहा गया, ‘‘न्यायाधीशों के बीच स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही को समाहित करने के लिए एक व्यवस्था पर बिना विलंब के विचार होना चाहिए। इसे न्यायिक मानदंड एवं जवाबदेही विधेयक के संशोधित रूप को फिर से लाकर किया जा सकता है।’’

इस विधेयक को मार्च, 2012 में लोकसभा ने पारित कर दिया था, लेकिन न्यायपालिका और न्यायविदों की ओर से विरोध जताए जाने के बाद राज्यसभा में इसमें बदलाव किये गये। न्यायपालिका और न्यायाविदों ने इसके कुछ प्रावधानों का विरोध किया था।

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