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अब रैगिंग माना जाएगा सरदारों पर जोक्स मारना, कमेटी ने किया फैसला

उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले सिख समुदाय के स्टूडेंट्स पर सरदारों पर बने जोक्स मारने को अब रैगिंग की कैटगरी में रखा जाएगा।
प्रतिकात्मक तस्वीर। (फोटो-सीएनएन)

उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले सिख समुदाय के स्टूडेंट्स पर सरदारों पर बने जोक्स मारने को अब रैगिंग की कैटगरी में रखा जाएगा। यह फैसला एक कमेटी ने लिया है। उसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एचएस बेदी कर रहे थे। उन्होंने इस बात की जानकारी देते हुए कहा, ‘सिख समुदाय से संबंध रखने वाले बच्चों पर सरदारों से जुड़ा मजाक करना रैगिंग माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर ऐसा करने वाले स्टूडेंट को संस्थान से निकाला भी जा सकता है।’ इतना ही नहीं कमेटी की तरफ से कई और सिफारिशें भी की गई हैं। इसमें सरदारों पर जोक्स बनाने वाली वेबसाइट्स को ब्लॉक करना, मीडिया हाउस का लाइसेंस कैंसल करना और फिल्म की रिलीज को टालने जैसी सिफारिशें हैं।

गौरतलब है कि सरदारों पर बनने वाले ज्यादातर जोक्स, संता-बंता के नाम से मशहूर हैं। इन जोक्स को बंद करने के लिए कई याचिकाएं भी डाली जा चुकी हैं। साल 2015 के अक्टूबर में भी ऐसी खबर आई थी कि इन जोक्स को बंद किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता हरविंदर चौधरी ने कहा था कि उन चुटकुलों की वजह से सिख समुदाय की छवि खराब होती है। हरविंदर चौधरी ने कहा था कि ज्यादातर जोक्स में सिख समुदाय के लोगों को कम बुद्धिमान वाला और बेवकूफ व्यक्ति की छवि दी जाती है। हालांकि तब कोर्ट ने कहा था कि सिख समुदाय हंसने-हंसाने वाले लोग होते है और कई ऐसे सिख समुदाय के लोग भी ही जो इन चुटकुलों में मजे लेते हैं।

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