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‘जेएनयू विवाद ने भारत को मिस्र-रूस जैसे देशों के समूह में ला दिया है’

स्टग्लिट्स ने कहा, ‘भारत में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों की मुश्किल एक बड़ी चिंता का विषय है।'
Author बेंगलुरु | July 7, 2016 09:10 am
जेएनयू कैंपस के गेट पर तैनात पुलिसकर्मी। (फाइल फोटो)

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्स ने बुधवार (6 जुलाई) को कहा कि भारत में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सामने आ रही मुश्किलें और जेएनयू विवाद ने भारत को मिस्र और रूस जैसे देशों के समूह में लाकर खड़ा कर दिया है और विदेशी निवेशकों पर इसका नकारात्मक असर हो सकता है।

यहां अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत में स्टग्लिट्स ने कहा, ‘भारत में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों की मुश्किल एक बड़ी चिंता का विषय है। यह भारत को मिस्र और रूस जैसे देशों के समूह में लाकर खड़ा कर देता है।’

उन्होंने कहा, ‘दूसरी चीज जेएनयू विवाद से जुड़ी है, जबकि मैं इसका पूरा ब्योरा नहीं जानता, किसी यूनिवर्सिटी में गतिविधियां बंद कराने की कार्रवाई आपको ऐसे ही देशों के एक छोटे से समूह में लाकर खड़ा कर देती है। तुर्की ऐसा ही एक अन्य देश है। इनमें से ज्यादातर देश सत्तावादी प्रकृति के हैं, ऐसी चीजों का विदेशी निवेशकों पर काफी नकारात्मक असर हो सकता है।’

स्टिग्लिट्स ने कहा कि फोर्ड फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने दशकों तक भारत के विकास में अहम भूमिका निभाई है और यह चिंता का विषय होना चाहिए कि ऐसे गैर-सरकारी संगठनों के सामने ऐसी-ऐसी शर्तें रखी जा रही हैं कि उनका काम करना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों के कामकाज में सिविल समाज की अहमियत को लेकर व्यापक स्वीकार्यता और समझ है।’ स्टिग्लिट्स ने कहा कि यदि वैश्विक समुदाय के हिस्से भारत को एक खुली अर्थव्यवस्था के तौर पर आगे बढ़ना है तो इसे इन मसलों को सुलझाना चाहिए।

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