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कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से कॉलोनियां बनाने की कोई योजना नहीं: मुफ्ती सईद

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने आज विधानसभा को बताया कि उनकी सरकार की घाटी में कश्मीरी पंडितों के रहने के लिए अलग से कॉलोनियां बनाने की कोई योजना नहीं है। सदन में विपक्षी दलों ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए ‘‘समग्र टाउनशिप’’ बनाने के राज्य सरकार के कदम का जम कर विरोध […]
Author April 9, 2015 15:15 pm
मुफ़्ती मोहम्‍मद सईद। (फाइल फोटो)

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने आज विधानसभा को बताया कि उनकी सरकार की घाटी में कश्मीरी पंडितों के रहने के लिए अलग से कॉलोनियां बनाने की कोई योजना नहीं है।

सदन में विपक्षी दलों ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए ‘‘समग्र टाउनशिप’’ बनाने के राज्य सरकार के कदम का जम कर विरोध किया। इस बीच सईद ने सदन से कहा, ‘‘मैं सदन को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से कॉलोनियां नहीं बनाएंगे।’’

सईद की मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक के बाद आधिकारिक रूप से यह कहा गया था कि मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया है कि राज्य सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से टाउनशिप बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करेगी और उन्हें जमीन मुहैया कराएगी।

जम्मू कश्मीर में मुख्य विपक्षी दलों और अलगाववादी समूहों ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि यह लोगों को बांट देगा और इससे सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा हो जाएंगे।

सईद ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘मैंने केंद्रीय गृह मंत्री को बताया है कि कश्मीरी पंडित अलग नहीं रह सकते और उन्हें साथ रहना होगा।’’ उन्होंने कहा कि ‘कश्मीर के भीतर एक और प्रदेश’ संभव नहीं है और राज्य के भीतर विवाद पैदा करने के लिए अफवाहें उड़ाई जा रही हैं।

सईद ने जोर देकर कहा कि सरकार कश्मीरी पंडितों को वापसी के लिए अनुकूल माहौल मुहैया कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की अफवाहें उड़ाई जाती हैं तो वे वापस कैसे आएंगे।

सईद ने कहा, ‘‘हम जल्दी में यह नहीं करना चाहते। हम कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों से बात करेंगे। हम कश्मीर में धर्मनिरपेक्षता को फलते फूलते देखना चाहते है ताकि कश्मीर अलग अलग किस्म के फूलों का बगीचा बन जाए।’’

मुख्यमंत्री ने अलगाववादियों से भी अपील की कि उन्हें इस मामले पर राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे कश्मीर की बदनामी होती है। उन्होंने कश्मीरी पंडितों से घाटी में लौटने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके लिए अनुकूल माहौल पैदा करेगी ताकि वे ‘‘सम्मान एवं गरिमा’’ के साथ अपने स्थानों पर बस सकें।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जो वापस आना चाहते हैं, उन्हें अलग नहीं रहना चाहिए। घाटी में इस्राइल की तरह कॉलोनियां नहीं होगी और हम वापस आकर अपने स्थानों पर बसने के लिए उनका स्वागत करते हैं।’’

सदन की कार्यवाही आज सुबह जैसे ही शुरू हुई, कांग्रेस विधायक दल के नेता नवांग रिगजिन जोरा ने कश्मीरी पंडितों के लिए टाउनशिप का मामला उठाया और पीडीपी-भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने इसके लिए घाटी में 500 कनाल जमीन देने का केंद्र से वादा किया है। उन्होंने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा।

कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस (एनसी), माकपा और निर्दलीय सदस्यों इंजीनियर अब्दुल राशिद और हकीम यासीन समेत सभी विपक्षी सदस्यों ने इस कदम का विरोध किया।

इस हंगामे के बीच माकपा सदस्य एम वाई तारिगामी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री यहां बैठे हैं। विवाद पैदा करने और कानून व्यवस्था को अव्यवस्थित करने के लिए कश्मीरी पंडितों के मामले पर अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। यह मानवीय मामला है। हम सभी को लगता है कि उन्हें पूरे सम्मान एवं गरिमा के साथ घाटी में वापस आना चाहिए लेकिन उनके लिए ऐेसे कदम कश्मीर में लोगों के बीच अविश्वास पैदा कर देंगे।’’

तारिगामी ने कहा कि सदन को विश्वास में लिया जाना चाहिए और मुख्यमंत्री को इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

इस बीच सईद ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इन रिपोर्टों को गलत तरीके से समझा गया है और ये सरासर गलत हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए अलग कॉलोनियां बनाने की कोई योजना नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सरकार को ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया है।

सदन में विपक्ष के सदस्यों और भाजपा एवं पीडीपी सदस्यों के बीच काफी बहस हुई। इस बीच कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री बशरत बुखारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और अब इसे मुद्दा बनाने की आवश्यकता नहीं है। कृपा करके सदन को आगे की कार्यवाही करने दें।

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