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एक जहाज उड़ने वाला था, वहीं जेट एयरवेज का पायलट उतारने लगा विमान, खतरे में पड़ी 322 यात्रियों की जान

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक जेट एयरवेज के पायलोटों ने विमान में सवार 174 यात्रियों की जान को खतरे में डाला।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (फाइल)

इस साल अप्रैल महीने में दिल्ली एयरपोर्ट पर एक बड़ी दुर्घटना होने से टल गई थी। जेट एयरवेज और विस्तार की फ्लाइट्स एक-दूसरी की जद में आने बाल-बाल बची थीं। इस चूक को लेकर सरकार द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट आ गई है। कमेटी में अपनी जांच में जेट एयरवेज के पायलेटों को दोषी पाया है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक जेट एयरवेज के पायलोटों ने विमान में सवार 174 यात्रियों की जान को खतरे में डाला। रिपोर्ट में कहा गया है, “घटना 21 अप्रैल को तब हुई, जब जेट एयरवेज की फ्लाइट 9W 597 ने दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट पर लैंडिंग की कोशिश की। बाद में लैंडिंग को रद्द कर दिया गया जिसके कारण जेट एयरवेज का विमान, विस्तारा की फ्लाइट UK 811 के काफी करीब आ गया। दोनों विमानों के बीच फासला 400 फिट से भी कम का रह गया था, जिसके कारण दोनों विमानों के कॉकपिट में उचित दूरी बनाए रखने की चेतावनी मिलने लगी।”

बता दें घटना के समय विस्तारा की फ्लाइट UK 811 को टेकऑफ करना था। इस फ्लाइट के एयरबस A320 विमान में 148 यात्री सवार थे। वहीं जेट एयरवेज का बोइंग 737 विमान, 174 यात्रियों को मस्कट से लेकर लौट रहा था। जांच कमेटी ने रिपोर्ट में जेट एयरवेज के पायलेटों की दोबारा ट्रेनिंग का सुझाव दिया है। इसके अलावा रिपोर्ट ने एक और अहम विषय को उठाते हुए कहा है कि पायलेटों ने विमान की रफ्तार को लेकर एयर ट्रैफिर कंट्रोल (एटीसी) की बातों पर भी ध्यान नहीं दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है, “एटीसी ने तीन बार पायलेटों से पूछा कि क्या वह तेज रफ्तार पर लैंडिंग कर पाएंगे। पायलेट ने इसके जवाब में हां का जवाब दिया लेकिन को-पायलेट की चेतावनी के बाद लैंडिंग रद्द की गई। को-पायलेट ने चेतावनी दी थी कि विमान के फ्लैप्स के न खुलने के कारण वह लैंडिंग नहीं कर पाएंगे।”

 

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