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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बोले- जयललिता और सलमान को जमानत देकर न्यायपालिका ने अपनी छवि बिगाड़ी

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एन संतोष हेगड़े ने जेल में सैंकड़ों लोग पड़े हैं जिन्हें जमानत नहीं मिली है और उनकी जमानत याचिका पर 4-5 साल बाद सुनवाई होती है।
Author हैदराबाद | June 13, 2016 21:56 pm
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और भारत के पूर्व सोलिसिटर जनरल एन संतोष हेगड़े। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एन संतोष हेगड़े ने कहा है कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता और बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से जुड़े घटनाक्रमों से न्यायपालिका की छवि खराब हुई जिनमें अदालतों ने उन्हें जमानत दे दी और उनके मामलों की ‘बिना बारी के’ सुनवाई की। भारत के पूर्व सोलिसिटर जनरल ने यहां कहा कि दो न्यायिक फैसलों से गलत संदेश गया कि ‘धनी और प्रभावशाली’ तुरंत जमानत हासिल कर सकते हैं। कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त ने कहा कि वह इस लोक धारणा से पूरी तरह से सहमत हैं कि कि धनी और प्रभावशाली कानून के चंगुल से बच जाते हैं।

हेगड़े ने कहा, ‘मैं विभिन्न मंचों से कहता रहा हूं कि दो उदाहरणों से न्यायपालिका की छवि खराब हुई, पहला जयललिता का (आय से अधिक संपत्ति) मामला है जिसमें 14 साल के बाद उनकी दोषसिद्धि हुई और कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार कर ली लेकिन जमानत नहीं दी। वे लोग उच्चतम न्यायालय गए। न सिर्फ (कुछ दिनों के अंदर ही) जमानत दे दी गई, मैं जमानत दिए जाने का विरोध नहीं कर रहा हूं बल्कि उच्च न्यायालय को निर्देश था कि तीन महीनों के अंदर मामले का निपटारा किया जाए।’

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत जेल में सैंकड़ों लोग पड़े हैं जिन्हें जमानत नहीं मिली है और उनकी जमानत याचिका पर 4-5 साल बाद सुनवाई होती है। उन्होंने कहा, ‘इसी प्रकार सलमान खान का मामला है जिनकी भी 14 साल बाद पहली अदालत में दोषसिद्धि हुई और उच्च न्यायालय ने एक घंटे के अंदर जमानत दे दी। ठीक है। जमानत देने में कोई गलती नहीं है और न्यायाधीश ने दो महीनों में सुनवाई की। दोनों (जयललिता और सलमान के मामलों में) अवकाशग्रहण करने वाले न्यायाधीश हैं।’’

हेगड़े ने कहा कि अदालत को ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई करने की जरूरत है जैसे अगर किसी व्यक्ति को कल फांसी की सजा दी जानी है या अगले दिन परीक्षा है और छात्र को प्रवेश पत्र नहीं दिया गया हो। उन्होंने कहा, ‘लेकिन इन मामलों में क्या अत्यावश्यकता थी, सिर्फ इसलिए कि धनी एवं प्रभावशाली होने के कारण उन्हें जमानत मिलती है और वे चाहते हैं कि उनके मामले की सुनवाई बिना बारी की हो। मैं इसका पूरी तरह से विरोध करता हूं और इन दोनों उदाहरणों की निंदा करता हूं।’

उन्होंने कहा, ‘लोगों ने सवाल करने शुरू कर दिए हैं…. हमें बताइए कि इन (दोनों) मामलों में क्या इतना महत्वपूर्ण था कि आपने बिना बारी के इसकी सुनवाई की। निश्चित रूप से इससे गलत संदेश जाएगा कि धनी और प्रभावशाली लोगों के लिए अलग रास्ता है।’

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  1. श्याम आर्य
    Jun 14, 2016 at 7:05 am
    प्रायः यह देखने में आया जज वह सब करता है जो हर जज करता है। 40 वर्षो की वकालत में यही देखा। जब वह अपने आसन पर विराजमान होता है तब वह सातवे आसमान पर होता है। सेवा निवर्त होने के बाद उसे सारी नैतिकता याद आ जाती है। जो नैतिकता से काम करते है उन्हें कभी इस प्रकार बोलने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उनका न्याय बोलता है। क्या हेगड़े जी जब उच्च न्यायालय में जज थे तो उनके एक भी निर्णय Reverse नहीं हुए ? अगर हुए तो यह सिद्ध होता है कि गलत निर्णय किसी से भी हो सकता है। Man is not Perfect.
    (1)(0)
    Reply
    1. R
      raj kumar
      Jun 14, 2016 at 5:43 am
      उड़ता पंजाब इसका ज्वलंत उदाहरण हे न्याय नामी और पैसे वालों को बिना बारी के और बिना दिन रात देखे होता हे इससे तो स्वर यही निकलता हे की आतंकी के लिए कोर्ट देर रात को भी सुनवाई करता हे और कितने लोग बरसो से इंतज्रार कर रहे हे तारीख पर तारिक ही उन्हें मिलती हे
      (1)(0)
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      1. A
        APUPADHYAY
        Jun 13, 2016 at 11:21 pm
        shame
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        Reply
        1. A
          APUPADHYAY
          Jun 14, 2016 at 1:03 pm
          Hegade ji ne bilkul theek bayan diya.
          (0)(0)
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          1. Subodh khanna
            Jun 14, 2016 at 6:45 am
            एक पूर्व जज तो सत्य बोला,यहाँ तो अमीर लोग कुछ भी करें ,मस्त हैं , गरीब सड़ता रहता है जेल मैं , काहे क्या न्याय ,
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            1. M
              mani verma
              Jun 14, 2016 at 12:26 am
              Court to Udata Punjab pe do din main hi verdict dene ko ready h.e kisi v gareeb ka koi fayada nahi h.Gareeb & aam adami k lye to judge log judge ki kami ka Rona Royal jata h.
              (0)(0)
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              सबरंग