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भारत पहुंचने से पहले जापानी पीएम ने जमकर की पीएम मोदी की तारीफ, कहा- उनमें गजब की क्षमता

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने कहा कि प्रति वर्ष करीब 100 जापानी कंपनियां कारोबार के लिए भारत आ रही हैं।
Author नई दिल्‍ली | September 13, 2017 15:17 pm
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे (File Photo)

भारत यात्रा की शुरूआत करते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारत के साथ अपने देश के संबंधों को ‘‘बेहद महत्वपूर्ण और विशेष’’ बताया, साथ ही कहा कि जापान, भारत के तीव्र आर्थिक विकास में सहयोग के तौर पर अपना प्रौद्योगिकी समर्थन जारी रखेगा। जापान के प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जापान के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण एवं विशेष है। मैं जापान के प्रधानमंत्री के रूप में भारत की चौथी यात्रा की शुरूआत कर रहा हूं। इस दौरान मैं प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात जा रहा हूं। वहां मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ 10वें जापान-भारत शिखर सम्मेलन की बैठक में हिस्सा लूंगा। भारत और जापान के संबंधों के नए युग के सूत्रपात तथा इसे और गहरा बनाने को आशान्वित हूं।

शिंजो आबे ने कहा कि भारत और जापान सार्वभौम मूल्यों और सामरिक हितों को काफी महत्व देते हैं और हम इसे साझा करते हैं। दोनों देश एशिया के प्रमुख लोकतंत्र और वैश्विक शिक्तियां हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रभावशाली नेता हैं, जिनमें चीजों को आगे बढ़ाने की अभूतपूर्व क्षमता है। मैं मानता हूं कि भारत और जापान के संबंध दुनिया में सर्वाधिक क्षमताओं से भरे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात के लिए प्रतिबद्ध हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हम हिन्द.. प्रशांत क्षेत्र और पूरी दुनिया में शांति एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करें।’’

आबे ने कहा कि भारत और जापान के संबंधों में आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण आयाम है। पिछले वर्ष नवंबर में मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ जापान के शिंकान्सेन रांलिग फैक्टरी गया था और भारत के प्रधानमंत्री को जापान की स्वदेशी प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी दी थी। मुझे यह जानकर बेहद खुशी महसूस हुई कि शिंकान्सेन की ट्रेनें मुम्बई अहमदाबाद हाई स्पीड कारिडोर के तहत भारतीय भूमि पर दौड़ेंगी। जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रति वर्ष करीब 100 जापानी कंपनियां कारोबार के लिए भारत आ रही हैं। अक्तूबर 2016 में 1305 जापानी कंपनियां काम कर रही थीं। भारत और जापान के तकनीशियन विनिर्माण इकाइयों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं और इस तरह से भारत..जापान आर्थिक संबंधों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में योगदान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जापान की प्रौद्योगिकी और भारत का समृद्ध मानव संसाधन साथ मिलकर विनिर्माण क्षेत्रों में क्षमताओं का पूरा सदुपयोग कर रहे हैं और यह क्षमता आसियान, अफ्रीका और शेष दुनिया में  फैल रही है। भारत लम्बे समय से जापान के लोगों से परिचित है। योग, सिनेमा, खानपान के साथ ही भारतीय संस्कृति जापान में काफी लोकप्रिय है। जापान विभिन्न क्षेत्रों में भारत के योगदान को सम्मान देता है जो सभ्यता एवं मानवता के इतिहास से जुड़ा है। दोनों देशों के लोगों में गहरा, भावनात्मक अपनापन है और इसलिए दोनों देशों के संबंध गहरे आपसी विश्वास पर आधारित हैं।

आबे ने कहा,‘‘दिसंबर 2015 में मैंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ गंगा नदी के तट पर स्थित वाराणसी की यात्रा की थी। मुझे वहां अद्भुत और सुन्दर अनुष्ठान देखने को मिला। गंगा नदी के प्रवाह की तरह ही जापान और भारत के संबंध इतिहास के साथ निर्बाध रूप से आगे बढ़ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि मेरी भारत यात्रा से हमारे द्विपक्षीय संबंध अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित होंगे।’’

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 13 और 14 सितंबर, 2017 को भारत की राजकीय यात्रा शुरू कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री आबे 14 सितंबर को गांधी नगर, गुजरात में महात्मा मंदिर में 12वीं भारत-जापान वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। दोनों नेता मीडिया के समक्ष अपना वक्­तव्­य भी देंगे। भारत-जापान व्­यावसायिक शिष्­टमंडल इसी दिन भारत पहुंचेगा।

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  1. M
    manish agrawal
    Sep 13, 2017 at 3:30 pm
    जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पहली हिंदुस्तान यात्रा के दौरान उनसे गंगा मैया का पूजन करवाया गया और अब उनसे गुजरात में भूमि पूजन करवाया जाएगा ! चलो मोदीजी , और कुछ नहीं तो , विदेशी नेताओं का हिन्दुकरण करने में तो कामयाब होते दिख ही रहे हैं ! लेकिन शिंजो आबे साहब ! सावधान ! ज्यादा मत उलझ जाना बीजेपी की ideology में , अन्यथा आपके जापान की जनता भी कर्तव्यपरायणता और उद्यमशीलता छोड़कर , गौमूत्र और गोबर के फायदे गिनवाने लग जायेगी !
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    1. M
      manish agrawal
      Sep 13, 2017 at 3:29 pm
      शिंजो आबेजी ! मोदीजी की नगरी है काशी (पहले बाबा विश्वनाथ की हुआ करती थी, लेकिन अब लोग हर हर महादेव की वजाय हर हर मोदी , बोलने लगे हैं) ! आप वहां के संस्कृत विद्यापीठ में दाखिल होकर, वेदमंत्रों.का ज्ञान प्राप्त करें ! जापान पर नार्थ कोरिया के आक्रमण से वेदमंत्र मुकाबला करेंगे !
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