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भारत को परमाणु बिजली तकनीक देगा जापान

भारत और जापान ने एशिया-अफ्रीका विकास गलियारे के निर्माण पर मंथन शुरू किया है। आबे के इस दौरे में इस पर औपचारिक कवायद शुरू की जाएगी।
Author नई दिल्ली | September 14, 2017 03:48 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे। (फाइल फोटो)

दीपक रस्तोगी

अंतरराष्ट्रीय बंदिशों और शर्तों की अनदेखी कर जापान की सरकार भारत को परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की तकनीक मुहैया कराएगी। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों में प्रगाढ़ता बढ़ी है। पांच ठोस मुद्दों पर बातचीत होनी है। आबे के दौरे का असर प्रशांत-एशियाई महासागरीय पांच देशों के बीच नए राजनयिक संबंधों पर दिखेगा। इन देशों के साथ भारत और जापान-दोनों ही देश अलग-अलग स्तर पर ठोस बातचीत शुरू करने वाले हैं। अहम प्रस्ताव एशिया-अफ्रीका विकास गलियारे का है, जिस पर बातचीत की शुरुआत भारत और जापान ने मिलकर की है। इसे चीन के वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) प्रस्ताव का जवाब माना जा रहा है।  भारतीय और जापानी विदेश मंत्रालयों के उच्चाधिकारियों की टीमों ने हाल में इन पांचों मुद्दों को अंतिम रूप दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजय कुमार वर्मा ने और जापानी राजनयिक मसातो ओताका की अगुवाई में दोनों देशों की टीमों ने कई दौर की बातचीत की। दोनों देशों के इन राजनयिकों की टीमों की ओर से तैयार की गई प्रस्तावना पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्च स्तर से मुहर लगने के बाद बातचीत का औपचारिक मसौदा तैयार किया गया। फोकस परमाणु बिजली तकनीक, एशिया-अफ्रीका विकास गलियारे और रक्षा उपकरण उत्पादन को लेकर करार पर है।

भारत, जापान, आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका और दक्षिण कोरिया – इन एशियाई प्रशांत महासागरीय देशों के बीच एका की कवायद डोकलाम गतिरोध के दौरान शुरू हुई थी। अब परमाणु ऊर्जा करार पर राजनयिक संबंधों को मजबूती देने के लिए नए आधार तैयार किए जा रहे हैं। भारत यात्रा पर आए आबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शिखर वार्ता के लिए विदेश मंत्रालय ने पांच अहम मुद्दे तैयार किए हैं। डोकलाम गतिरोध के दौरान जापान ने भारत का साथ दिया था और पांचों देशों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी। अब भारत सरकार उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर जापान का साथ देगा। भारत ने उत्तर कोरिया की आलोचना कर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में जापान के साथ खुद को खड़ा बताया है। अहम मसला एटमी करार का है। भारत और जापान- दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु करार लागू हो चुका है। लेकिन परस्पर सहयोग में परमाणु अप्रसार संधि पर भारत का दस्तखत न करना आड़े आ रहा है। आबे के मौजूदा दौरे में अंतरराष्ट्रीय शर्त को किनारे करते हुए जापान परमाणु बिजली बनाने की तकनीक मुहैया कराएगा। मेक इन इंडिया के तहत परमाणु बिजली उत्पादन के लिए जरूरी उपकरण भारत में तैयार किए जाएंगे और जापान इसमें भागीदारी निभाएगा।

भारत और जापान ने एशिया-अफ्रीका विकास गलियारे के निर्माण पर मंथन शुरू किया है। आबे के इस दौरे में इस पर औपचारिक कवायद शुरू की जाएगी। इसे चीन के वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) परियोजना का जवाब माना जा रहा है। संबंधित परियोजना से जुड़े विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इसके लिए कवायद जारी है। एशिया-अफ्रीका गलियारे में कई और देशों को शामिल कराने के लिए बातचीत होगी। भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है। इसी महीने पूर्व रक्षा मंत्री अरुण जेटली जापान गए थे। भारत सरकार नौसेना के लिए 12 समुद्री निगरानी विमान जापान से खरीदेगी। कीमतों पर बातचीत अंतिम दौर में है। ऊंची कीमतों के कारण यह सौदा सात साल से अटका है। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के साझा हित जुड़े हुए हैं। हिंद महासागर और साउथ चाइना सी में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच दोनों देशों में सहयोग जरूरी माना जा रहा है। भारत और जापान ने अमेरिका के साथ मिलकर हाल में ही मालाबार सैन्य अभ्यास किया था और आगे इस अभ्यास के विस्तार की बात है। इस कवायद में आॅस्ट्रेलिया को भी साथ लिया जाएगा।

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  1. M
    manish agrawal
    Sep 14, 2017 at 6:40 am
    जापान यदि हिन्दोस्तान को परमाणु बिजली की तकनीक दे रहा है ,तो हिन्दोस्तान का भी फ़र्ज़ बनता है की जापान को बदले में कुछ बराबरी का दे ! जापान के पास एटमी हथियार नहीं हैं , इसीलिए नार्थ कोरिया और चीन से उसको भारी खतरा है ! हिन्दोस्तान ने एटमी हथियार 1974 में ही बना लिए थे ! इसलिए हिन्दोस्तान को चाहिए की जापान को एटमी हथियार की तकनीक मुहैया कराये !
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