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डोकलाम विवाद: नरेंद्र मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, चीन के खिलाफ मिला जापान का साथ

जापानी राजदूत हिरामात्सु ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "महत्वपूर्ण ये है कि कोई भी पक्ष यथास्थिति को एकतरफा तरीके से ताकत के बल पर बदलने की कोशिश न करे।"
Author August 19, 2017 08:28 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे। (फाइल फोटो)

दो महीने से जारी डोकलाम विवाद में जापान खुलकर चीन के खिलाफ भारत और भूटान के साथ आ गया है। इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारत में जापान के राजदूत केनजी हिरामात्सु ने भारतीय राजनयिकों को अपने देश का आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। इस विवाद में पहली बार किसी प्रमुख देश ने भारत का पक्ष लिया है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे 13 से 15 सितंबर तक भारत के दौरे पर आने वाले हैं। हिरामत्सु भारत के साथ ही भूटान के भी जापानी राजदूत हैं। वो भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से अगस्त के पहले हफ्ते में मिले थे और अपने देश के समर्थन के बारे में बताया था। जापानी राजनयिक जून आखिर से ही इस मसले पर भारतीय राजनयिकों से नियमित संपर्क में हैं। भारत और भूटान डोकलाम मसले पर जापान को अपना पक्ष बताते रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जापान उन गिने-चुने देशों में जिन्हें आधिकारिक स्तर पर डोकलाम की मौजूदा स्थिति से आधिकारिक तौर पर अवगत कराया गया है।

जापान मौजूदा विवाद पर “करीबी नजर” रखे हुए है। जापान का मानना है कि इस विवाद से पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। जापान का भी चीन के संग सीमा विवाद है। जापान का मानना है कि “विवाद में शामिल किसी भी पक्ष को ताकत के बल पर यथास्थिति बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।” चीन द्वारा “यथास्थिति में बदलाव” की कोशिशों पर जापान का पहले भी यही रुख रहा है। 30 जून को भारत ने चीन पर डोकलाम इलाके में यथास्थिति बदलने का आरोप लगाया था।

जापानी राजदूत हिरामात्सु ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमें समझते हैं कि डोकलाम विवाद दो महीने से जारी है…महत्वपूर्ण ये है कि विवाद में शामिल कोई भी पक्ष यथास्थिति को एकतरफा तरीके से ताकत के बल पर बदलने की कोशिश न करे और मामले का निपटारा शांतिपूर्ण तरीके से हो।” भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जापान “चीनी विस्तारवाद” का पीड़ित है इसलिए वो भारत की स्थिति को बखूबी समझता है। साल 2012 से 2014 के बीच चीन और जापान के बीच सेनकाकू/दियायू द्वीपों को लेकर काफी तल्खी आ गई थी।

जापान ने ये भी साफ किया है कि डोकलाम का विवाद मूलतः चीन और भूटान के बीच का विवाद है और दोनों देश इसे स्वीकार करते हैं। डोकला में भारत की “मौजदूगी” पर जापान का रुख साफ है कि ये चीन और भारत के बीच हुए समझौते के तहत ही है। पूरे विवाद में भारत के बातचीत से हल निकालने के भारत के रवैये को लेकर भी जापान सकारात्मक है। सूत्रों के अनुसार चीन द्वारा बार-बार भड़काऊ बयान दिए और किसी भी बड़े देश के एशिया की दो महाशक्तियों के बीच सीधे तौर पर किसी एक का पक्ष न लेने के बाद जापान हिंदुस्तान के पक्ष में खड़ा हुआ है। अमेरिका और ब्रिटेन डोकलाम को दो देशों के बीच का मसला बता चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भी तनाव न बढ़ाने और मसले को बातचीत से सुलझाने की सलाह दी है। यहां ये ध्यान रखना भी जरूरी है कि जापान और भूटान के बीच तीन दशकों से बहुत ही घनिष्ठ संबंध हैं।

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  1. B
    bitterhoney
    Aug 19, 2017 at 8:39 am
    दिल के बहलाने को ग़ालिब यह ख्याल अच्छा है. या, भोली भाली जनता को उल्लू बनाने को ग़ालिब यह ख्याल अच्छा है.
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    1. B
      bitterhoney
      Aug 19, 2017 at 8:32 am
      ट्रम्प अंकल तो मोदीजी की जेब में हैं अब हमें किसी और के साथ की आवश्यकता नहीं है. हिंदी अमरीकी भाई भाई.
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      1. M
        manish agrawal
        Aug 19, 2017 at 8:13 am
        जापान एक आर्थिक महाशक्ति है ना की सामरिक महाशक्ति ! जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कोई जंग नहीं लड़ी है और ना ही उसके पास एटमी हथियार हैं ! ऐसी हालत में जापान की सेना सिर्फ एक Peace Time Military बनकर रह गयी है ! जापान की हवाई ताक़त भी चीन के सामने नगण्य है ! जापान का सपोर्ट हिन्दोस्तान को कोई सैन्य मदद नहीं दे सकता ! लेकिन "दिल को बहलाने के लिए ग़ालिब ख्याल अच्छा है", वाली बात है !
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        सबरंग