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600 किमी की रफ्तार से उड़ती है जापान की सबसे तेज बुलेट ट्रेन, कभी नहीं हुआ कोई हादसा

जापान ने टोकियाडो शिन्कान्सेन को 1964 में आयोजित तोक्यो ओलिंपिक से पहले लॉन्च किया था।
जापान की बुलेट ट्रेनें।

अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन का आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे ने शिलान्यास किया। इस प्रोजेक्ट के साल 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है। अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन के निर्माण में 1.10 लाख करोड़ की लागत आएगी। इसके तैयार होने के बाद 500 किलोमीटर की दूरी दो घंटे में पूरी हो जाएगी। जापान के पीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 0.1 प्रतिशत की न्यूनतम दर पर लोन दिया है। यह भारतीय रेलवे और जापान के शिन्कान्सेन टेक्नोलॉजी का जॉइंट प्रोजेक्ट है। जापान की सबसे तेज बुलेट ट्रेन अधिकतम 500-600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। आइए आपको इन ट्रेनों खासियतों और इतिहास के बारे में बताते हैं।

-जापान में पिछले 53 वर्षों से बुलेट ट्रेनें चल रही हैं। पहली बार इस देश में हाई स्पीड ट्रेन चलाने का ख्याल 1930 में आया था। लेकिन पहली ट्रेन चली 1964 में। देखने में यह बंदूक की गोली जैसी नजर आती है, इसलिए लोगों ने इसे बुलेट कहना शुरू कर दिया। जापान ने बुलेट ट्रेन नेटवर्क को शिन्कान्सेन के नाम से जाना जाता है। इसमें शिन का मतलब होता है नई और कान्शेन का मेन लाइन।

-बीबीसी के मुताबिक साल 1959 में नए रेल नेटवर्क को डिजाइन करने के लिए हेड इंजीनियर हिडियो शिमा को बुलाया गया। उनकी टीम एक एेसी ट्रेन का आइडिया लेकर आई जो एलिवेटेड ट्रैक पर चल सकती थी और जिसमें घुमाव कम से कम रखे गए थे। लेकिन इससे प्रोजेक्ट की लागत 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई। हेड इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया। वह उस वक्त भी मौजूद नहीं थे, जब आगे से सांप के आकार वाली यह ट्रेन पटरी पर आई, लेकिन फिर भी उन्हें शिन्कान्सेन का पिता कहा जाता है।

-जापान ने टोकियाडो शिन्कान्सेन को 1964 में आयोजित तोक्यो ओलिंपिक से पहले लॉन्च किया था। तत्कालीन सम्राट हीरोहितो, जिन्होंने देश को हिरोशिमा और नागासाकी पर हमले के बाद संबोधित किया था, ने शिन्कान्सेन को लॉन्च करते हुए कहा था कि यह देश के सार्वजनिक यातायात में क्रांति ला देगी।

-पहली शिन्कान्सेन लाइन तोक्यो से लेकर ओसाका तक बनाई गई। इस दौरान बीच में माउंट फुजी भी दिखाई देती है। 16 कोच वाली यह ट्रेन 270 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से महज दो घंटे में मंजिल तक पहुंच गई, जिससे समय की बहुत ज्यादा बचत हुई।

-शिन्कान्सेन रेल नेटवर्क से आज पूरा जापान जुड़ा हुआ है। साल 2011 तक इसमें सफर करने वालों की तादाद सबसे ज्यादा थी। अब चीन में सबसे ज्यादा लोग इसमें सफर करते हैं। जापान में हर तीन मिनट में 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन चलती हैं। इनका संचालन जापान रेलवे ग्रुप की कंपनियां करती हैं, जो अपने सेफ्टी रिकॉर्ड और समय के पाबंद होने के लिए जानी जाती हैं। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अगर ट्रेन एक मिनट भी लेट हो जाती है तो शिन्कॉन्सेन ट्रेनों को इसके लिए जवाब देना पड़ता है।

-जापान में बुलेट ट्रेनों को 53 साल हो गए, लेकिन आज तक कोई हादसा नहीं हुआ, जबकि इस देश में आए दिन भूकंप आते हैं। अगर गूगल में शिन्कान्सेन हादसों के बारे में खोजा जाए तो ट्रेन में खुद को आग लगाने या भूकंप के कारण पटरी से उतरने के मामले मिलते हैं। इसके कर्मचारी इतने कुशल हैं कि सफर पूरा होने के बाद महज 7 मिनट में पूरी ट्रेन साफ कर देते हैं और ट्रेन अगले यात्रियों के लिए तैयार हो जाती है।

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