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रेलवे के खजाने पर बोझ है वीआइपी कोटा

तत्काल श्रेणी के आरक्षण यात्रा की तिथि से एक दिन पहले हो सकते हैं। ऐसे आरक्षण पर मूल भाड़े के अतिरिक्त 10 से 30 फीसद तक का अतिरिक्त चार्ज लिया जाता है, जो एक बर्थ के लिए श्रेणी के मुताबिक 90 रुपए से 400 रुपए तक बैठता है।
Author नई दिल्ल | July 5, 2017 05:18 am
रेलवे की व्यस्त मार्गों पर क्षमता बढ़ाने की योजना अगर परवान चढ़ती है तो 2021 से यात्रियों को उनके पसंदीदा ट्रेनों में सीट कंफर्म मिलेगी।

सुरेश प्रभु के रेल मंत्री बनने से लोगों ने रेलवे में जिस तरह के सुधार की उम्मंीदें लगाई थीं, वे अभी तक तो परवान चढ़ती नहीं दिख रहीं। एक तरफ देश में तेज रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन चलाने की योजनाएं बन रही हैं तो दूसरी तरफ मौजूदा रेल सुविधाओं की हालत बद से बदतर ही हुई है। ज्यादातर रेलगाड़ियां न तो समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच पा रही हैं और न ही दुर्घटनाओं की संख्या में खास कमी आ पाई है।  अलबत्ता रेलवे ने यात्रियों पर कई तरह के बोझ जरूर बढ़ाए हैं। उस पर भी रेल मंत्री का तुर्रा यही है कि रेलवे सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जितने संसाधनों की जरूरत है, उतने सरकार के पास हैं ही नहीं। मोदी सरकार ने एक सदी पुरानी अलग रेल बजट की परंपरा को इस साल खत्म कर रेलवे को भी आम बजट में ही शामिल करते हुए दावा किया था कि इससे रेलवे की हालत सुधरेगी। पर यह भी खरा नहीं निकला।

एक तरफ अतिरिक्त संसाधन जुटाने के बहाने आरक्षण की तत्काल, डायनामिक व फ्लैक्सी फेयर जैसी व्यवस्थाओं के जरिए यात्रियों पर भार बढ़ाया गया है तो दूसरी तरफ वीआइपी कोटा आज भी मुफ्त में उपलब्ध है। जबकि इस श्रेणी के तहत होने वाले आरक्षण पर तत्काल श्रेणी की तरह शुल्क वसूला जाए तो हर साल रेलवे को तीन अरब रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। तत्काल श्रेणी के आरक्षण यात्रा की तिथि से एक दिन पहले हो सकते हैं। ऐसे आरक्षण पर मूल भाड़े के अतिरिक्त 10 से 30 फीसद तक का अतिरिक्त चार्ज लिया जाता है, जो एक बर्थ के लिए श्रेणी के मुताबिक 90 रुपए से 400 रुपए तक बैठता है। तत्काल की सुविधा प्रथम श्रेणी में उपलब्ध नहीं है। इस श्रेणी के लिए तत्काल की जगह प्रीमियम आरक्षण ज्यादा चार्ज लेकर दिया जाता है, लेकिन रेलवे मुख्यालय से वीआइपी श्रेणी के आरक्षणों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाता। वसूली के मामले में रेलवे आम लोगों के प्रति इसके उलट काफी कठोर रुख अपनाता है। मसलन, गर्मी के मौसम में चलाई जाने वाली विशेष रेलगाड़ियों में किराया स्पेशल के बहाने 250 किलोमीटर की यात्रा पर भी रेलवे न्यूनतम 500 किलोमीटर का वसूल कर रहा है। वीआइपी आरक्षण की व्यवस्था रेलवे ने आपात स्थिति के लिए कर रखी है। मसलन, किसी को यात्रा आकस्मिक करनी पड़े तब। बीमारी के इलाज, नौकरी के इंटरव्यू और किसी परिजन की मृत्यु जैसी स्थिति के लिए बनाए गए इस कोटे का सांसद, मंत्री, विधायक और अफसर मनमाना इस्तेमाल कर रहे हैं। तत्काल श्रेणी के लिए तो रेलवे को खास मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती पर वीआइपी श्रेणी में तो उसका खासा श्रम खपता है। मसलन पहले ऐसी सिफारिशों को एक जगह रखा जाता है। फिर रेलगाड़ी और श्रेणी के हिसाब से छांटा जाता है। उसके बाद आरक्षण कर चार्ट बनाने वाले विभाग को जानकारी दी जाती है। आरक्षण का चार्ट गाड़ी छूटने से चार घंटे पहले ही तैयार होता है। सिफारिश करने वाले वीआइपी को भी सिफारिश मंजूर हो जाने की रेलवे द्वारा सूचना दी जाती है।

रेलवे ने ऐसे आरक्षण पर प्रीमियम चार्ज वसूलने की सिफारिश की थी, जो बाद में घटते-घटते तत्काल के समान शुल्क वसूलने तक ही व्यावहारिक मानी गई। लेकिन लागू उसे भी आज तक नहीं किया गया, जबकि इस श्रेणी का उपयोग आमतौर पर सांसद और विधायक करते हैं। उनसे रेलवे अगर वसूली करे भी तो सरकार उनकी भरपाई कर देगी। रेलवे ने माना है कि 2015-16 के दौरान वीआईपी श्रेणी में दिए गए कुल आरक्षणों पर अगर तत्काल श्रेणी के बराबर चार्ज वसूला जाता तो रेलवे को तीन अरब रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती थी। पर सवाल यही है कि सबका साथ सबका विकास का नारा लगाने वाली सरकार वीआइपी श्रेणी को तो अतिरिक्त प्रभार से मुक्त ही रखने पर आमादा है।

 
सीटें निर्धारित हैं वीआइपी कोटे में कुल आरक्षित सीटों की, जो 61,700 सीट दैनिक बनती हंै। यह बात अलग है कि इसमें से उपयोग अभी औसतन 41 फीसद का ही हो पा रहा है। यह जानकारी रेलवे के जन सूचना अधिकारी विक्रम सिंह ने दी।

नीमच (मध्यप्रदेश) के आरटीआइ कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने वीआइपी श्रेणी पर भी तत्काल की तरह अतिरिक्त चार्ज लिए जाने की बाबत पड़ताल की तो रेलवे ने माना कि इसके लिए कोशिशें तो कई बार हुई पर हर बार निर्णय टाल दिया गया। जबकि औचित्य के हिसाब से तो वीआइपी के लिए तत्काल से भी ज्यादा चार्ज लिया जाना चाहिए।

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